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हकेंविवि मामलें यूजीसी ने एचआडी को सौंपी रिपोर्ट में रोस्टर में मिली खामियां

Wed, 15 Sep 2021 11:38 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 11:38 PM IST
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Hkenvivi: UGC submitted report to HRD, flaws found in roster
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय एडमिन ब्लॉक - फोटो : Narnol
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंविवि) से संबंधित जांच रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मानव संसाधन मंत्रालय के निदेशक विश्वजीत को सौंप दी है। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में बनाए गए रोस्टर में खामियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की ओर जारी मॉडल रोस्टर के तहत पुराना रोस्ट नहीं मिला। कुल पद, स्वीकृत पद, खाली पद आदि सरकार के नियमों के आधार पर नहीं थे। हालांकि रोस्टर को ठीक करने के लिए विश्वविद्यालय के प्रो. टंकेश्वर कुुमार ने आदेश जारी किए हैं ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो।
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यह रिपोर्ट नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग कार्यालय में आयोजित बैठक में सौंपी गई है। मीटिंग में यूजीसी के संयुक्त सचिव जीएस चौहान, एचआरडी निदेशक विश्वजीत सिंह, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन भगवान लाल सैनी, पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्या डॉ. सुुधा यादव, हकेंविवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर यूजीसी संयुक्त सचिव ने एक महीने के दौरान आयोग द्वारा हकेंविवि का सौंपे गए रोस्टर की जांच कर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निदेशक विश्वजीत को सौंपी।
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बिना विज्ञापन और अनुमति के मामले में नहीं आई रिपोर्ट
हकेंविवि के कुछ शिक्षकों ने आयोग से शिकायत की हुई है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले बिना विज्ञापन और इंटरव्यू के एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति कर दी है। 18 अगस्त को राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की टीम ने जब हकेंविवि का निरीक्षण किया तो इस प्रकार लगभग 9 केस सामने आए थे। उसमें भी यूजीसी की ओर से जांच की जा रही है। अभी तक वह जांच पूरी नहीं हुई है। जांच आने के बाद ही सच्चाई का पता चल पाएगा।
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शिक्षक मनोज मामले में कोर्ट से मिला स्टे
विश्वविद्यालय को शिक्षक मनोज के मामले में स्टे मिला हुआ है और यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट में चल रहा है। मामले में पिछड़ा आयोग दखल नहीं दे सकता। कमीशन को बीच में हस्तक्षेप में कोई अधिकार नहीं है। कमीशन कोर्ट के समानांतर जांच नहीं कर सकता है। इस मामले में 17 सितंबर से पहले आयोग कोई हियरिंग नहीं कर सकता और न कार्रवाई कोई आदेश दे सकता।
रोस्टर में कमी की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन दोषी
आयोग की सदस्य डॉ. सुधा यादव ने बताया कि जिस तरीके से रोस्टर में कमियां मिली हैं। सरकार की गाइड लाइन अनुसार विश्वविद्यालय का तत्कालीन प्रशासन दोषी हैं। आयोग ने इस मामले में अभी निर्णय नहीं लिया है, अभी फुल कमीशन बैठेगा, उसमें निर्णय लिया जाएगा। अभी तक इसमें डेट निर्धारित नहीं की गई।
पुराना रोस्टर ठीक नहीं था। फॉर्मेट के अनुसार रोस्टर नहीं था लेकिन अब ठीक है। उसको सुधार दिया गया है। 2021 का रोस्टर सरकार के फॉर्मेट के आधार पर बनाया गया है।

प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, हकेंविवि
यह था मामला
विश्वविद्यालय के चार पांच शिक्षकों ने राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग के पास शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत में बताया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों का उत्पीड़न करता है। मामले में 18 अगस्त को आयोग की टीम हकेंविवि में पहुंची थी। टीम ने विवि में जो कुछ कमियां मिली उसकी जांच के लिए यूजीसी को दस्तावेज सौंपे गए थे। यूजीसी इस मामले में लगभग एक महीने से जांच कर रही थी।
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