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हैरिटेज सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है नारनौल
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 18 Apr 2016 12:08 AM IST
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नारनौल में बन सकता है हेरिटेज सिटी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ऐतिहासिक शहर नारनौल में आज भी अनेक मुगलकालीन वास्तुकला की बेहतरीन बानगी को पेश करते स्मारक प्राचीन गौरवगाथा के गवाह हैं। इनमें मुख्य जल महल, राय बालमुकंद का छत्ता (बीरबल का छत्ता), इब्राहिम खान का मकबरा और चौर गुंबद आदि शामिल हैं। नारनौल शहर को हैरिटेज सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए सरकार ने करीब एक माह पूर्व प्रस्ताव भी रखा था, मगर अब इस बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही। यदि नारनौल शहर को हैरिटेज सिटी के रूप में विकसित कर दिया जाए तो यहां के पिछड़ेपन के दाग को भी धोया जा सकता है।
नारनौल में कुल 14 ऐतिहासिक स्मारक स्थित हैं। इनमें से 3 केंद्रीय पुरातत्व तथा शेष 11 हरियाणा राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित हैं। यहां के प्रमुख स्मारकों में सम्राट शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित उनके दादा इब्राहिम खान का मकबरा, जल महल, शाहकुली खान का मकबरा, राय बालमुकुंद का छत्ता जिसे बीरबल का छत्ता के नाम से जाना जाता है, तख्त वाली बावड़ी, चोर गुंबद और शेख मिहिंरा की दरगाह आदि शामिल हैं। इनके अतिरिक्त यहां का चामुंडा देवी मंदिर भी ऐतिहासिक है। महर्षि च्यवन की तपोभूमि ढोसी और माधोगढ़ का ऐतिहासिक किला भी इसी जिले की सीमा में आते हैं। दिल्ली से नारनौल होकर हर रोज सैकड़ों पर्यटक राजस्थान के मंडावा व बिकानेर की ओर जाते हैं। यदि यहां के पर्यटन स्थलों व रोडों को ठीक कर इन पर्यटकों को यही रोक लिया जाए तो शहर की सूरत ही बदल जाएगी।
जर्मन की कंपनी कर रही है प्रयास
जर्मन की एक प्राइवेट कंपनी मार्को पोलो यहां के एक स्थानीय होटल व्यवसायी से मिलकर यहां के एतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी करा रही है। इसके तहत गत वर्ष सैकड़ों जर्मन पर्यटक नारनौल के जलमहल को देखने आए थे। इस वर्ष भी तीन ग्रुप इसको देखने के लिए आ चुके हैं। सभी ने जलमहल की काफी सराहना की। यदि ऐसे ही किसी प्राइवेट कंपनी से अनुबंध कर लिया जाए तो भी यहां के पर्यटक स्थलों की सूरत बदल सकती है।
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ये हैं नारनौल के मुख्य एतिहासिक स्थल
जलमहल:- मन को मोह लेने वाला व आश्चर्यचकित कर देने वाले इस जल महल का निर्माण सन 1591 में नारनौल के जागीरदार शाह कुलीखान ने करवाया था। यह जलमहल लगभग 11 एकड़ के विशाल भूखंड पर बना हुआ है। 750 गुणा 750 फुट के इस विशाल तालाब के बीच एक स्मारक बना हुआ है। इस पर पहुंचने के लिए तालाब के बीचों-बीच एक पुल बनाया हुआ है जो इसकी सुंदरता पर चार चांद लगा रहा है। इस महल के निर्माण में मुगलकालीन वास्तुकला का जो अनूठा प्रदर्शन किया गया है वह देखने योग्य है। भीतरी भाग में चित्रकला और उसमें भरे हुए विभिन्न रंग आज भी स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। शहर से बाहर खुले मैदान में स्थित होने के कारण इस महल के सौंदर्य में और भी निखार आ जाता है। इसका निर्माण इस ढंग से किया गया है कि महल के प्रत्येक भाग में खुली हवा बिना किसी रुकावट के प्रवेश कर सकती है और चारों दिशाओं से तालाब को आसानी से देखा जा सकता है। दूसरी मंजिल के चारों कोनों पर विश्राम करने के लिए स्थान है। महल से तालाब में उतरने के लिए चारों तरफ से सीढ़ियां बनाई गई हैं। पर्यटकों को यहां आकर साफ व सुथरा वातावरण मिले। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जलमहल के सामने हराभरा पार्क बनाया गया है। एक बार इस महल को पानी से भरा गया था, जिसकी छटा देखते ही बनती थी, मगर अब फिर से स्थिति वही है।
राय बाल मुकंद का छत्ता : बीरबल के छत्ते के नाम से प्रसिद्ध इस विशाल भवन का निर्माण ऐतिहासिक रिकार्ड के अनुसार शाहजहां के शासनकाल में हुआ था, जबकि भू राजस्व रिकार्ड के मुताबिक इसका निर्माण राय बाल मुकंद ने कराया था। वैसे यह छत्ता बीरबल छत्ते के नाम से भी प्रसिद्ध है और ऐसा माना जाता है कि बीरबल और अकबर इस शहर में आते रहते थे। इस विशाल इमारत की तीन मंजिलें भूमिगत है। इसका निर्माण चुने और पत्थर से किया गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने लिए पुरातत्व विभाग द्वारा छत्ते के भूमिगत तलों की साफ सफाई का कार्य किया गया था, मगर यह अकसर बंद ही रहता है, क्योंकि यहां बनी गुफाओं में जाने की वजह से हादसे हो सकते हैं।
इब्राहिम खान का मकबरा : शहर की घनी आबादी के बीच स्थित यह मकबरा एक विशाल गुंबद के आकार का है। इसका निर्माण इतिहास प्रसिद्ध सम्राट शेरशाह सूरी ने अपने दादा इब्राहिम खान की यादगार में करवाया था। इसके भीतर इब्राहिम खान की कब्र है, जिस पर शाही खानदान का निशान भी है। बताया जाता है कि ये कब्रें इब्राहिम खान के परिवार के लोगों की है। इस मबकरे के निर्माण में लाल स्लेटी रंग के पत्थर का प्रयोग किया गया है, जिस पर मीनाकारी का कार्य बड़ी दक्षता से किया गया है। इसके निर्माण में बड़ी-बड़ी शिलाओं का प्रयोग किया गया है। पत्थर इतना साफ और चिकना है कि अकस्मात उसे देखकर संगमरमर होने का भ्रम होता है। फिलहाल इस मकबरे की सफाई का कार्य किया जा रहा है। जिसके तहत इसकी दीवारों को साफ-सफाई की जा रही है।
चोर गुम्बद: चोर गुंबद यद्यपि एक यादगार के रूप में बनाया गया स्मारक है, परंतु प्राचीन काल में यह स्मारक शहर के बाहर स्थित होने के कारण कालांतर में इस स्थान पर चोर लुटेरे शरण लेने लगे थे, जिसके फलस्वरूप लोग इधर जाने से भी घबराते थे। इसी कारण इसका नाम चोर गुंबद पड़ गया। आज यहां पर एक सुंदर पार्क बना हुआ है तथा प्रशासन ने चोर गुंबद को भी नए सिरे से चमकाया है। जिसके तहत इसकी मरम्मत का कार्य किया गया है। पहले इसके अंदर लोग जा सकते थे, मगर अब लोगों का इसके अंदर प्रवेश बंद कर दिया गया है। इसके चारों ओर सुंदर पार्क बना हुआ है। जहां शहर के लोग सुबह-शाम घूमने के लिए आते हैं।
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नारनौल में कुल 14 ऐतिहासिक स्मारक स्थित हैं। इनमें से 3 केंद्रीय पुरातत्व तथा शेष 11 हरियाणा राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित हैं। यहां के प्रमुख स्मारकों में सम्राट शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित उनके दादा इब्राहिम खान का मकबरा, जल महल, शाहकुली खान का मकबरा, राय बालमुकुंद का छत्ता जिसे बीरबल का छत्ता के नाम से जाना जाता है, तख्त वाली बावड़ी, चोर गुंबद और शेख मिहिंरा की दरगाह आदि शामिल हैं। इनके अतिरिक्त यहां का चामुंडा देवी मंदिर भी ऐतिहासिक है। महर्षि च्यवन की तपोभूमि ढोसी और माधोगढ़ का ऐतिहासिक किला भी इसी जिले की सीमा में आते हैं। दिल्ली से नारनौल होकर हर रोज सैकड़ों पर्यटक राजस्थान के मंडावा व बिकानेर की ओर जाते हैं। यदि यहां के पर्यटन स्थलों व रोडों को ठीक कर इन पर्यटकों को यही रोक लिया जाए तो शहर की सूरत ही बदल जाएगी।
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जर्मन की एक प्राइवेट कंपनी मार्को पोलो यहां के एक स्थानीय होटल व्यवसायी से मिलकर यहां के एतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी करा रही है। इसके तहत गत वर्ष सैकड़ों जर्मन पर्यटक नारनौल के जलमहल को देखने आए थे। इस वर्ष भी तीन ग्रुप इसको देखने के लिए आ चुके हैं। सभी ने जलमहल की काफी सराहना की। यदि ऐसे ही किसी प्राइवेट कंपनी से अनुबंध कर लिया जाए तो भी यहां के पर्यटक स्थलों की सूरत बदल सकती है।
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ये हैं नारनौल के मुख्य एतिहासिक स्थल
जलमहल:- मन को मोह लेने वाला व आश्चर्यचकित कर देने वाले इस जल महल का निर्माण सन 1591 में नारनौल के जागीरदार शाह कुलीखान ने करवाया था। यह जलमहल लगभग 11 एकड़ के विशाल भूखंड पर बना हुआ है। 750 गुणा 750 फुट के इस विशाल तालाब के बीच एक स्मारक बना हुआ है। इस पर पहुंचने के लिए तालाब के बीचों-बीच एक पुल बनाया हुआ है जो इसकी सुंदरता पर चार चांद लगा रहा है। इस महल के निर्माण में मुगलकालीन वास्तुकला का जो अनूठा प्रदर्शन किया गया है वह देखने योग्य है। भीतरी भाग में चित्रकला और उसमें भरे हुए विभिन्न रंग आज भी स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। शहर से बाहर खुले मैदान में स्थित होने के कारण इस महल के सौंदर्य में और भी निखार आ जाता है। इसका निर्माण इस ढंग से किया गया है कि महल के प्रत्येक भाग में खुली हवा बिना किसी रुकावट के प्रवेश कर सकती है और चारों दिशाओं से तालाब को आसानी से देखा जा सकता है। दूसरी मंजिल के चारों कोनों पर विश्राम करने के लिए स्थान है। महल से तालाब में उतरने के लिए चारों तरफ से सीढ़ियां बनाई गई हैं। पर्यटकों को यहां आकर साफ व सुथरा वातावरण मिले। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जलमहल के सामने हराभरा पार्क बनाया गया है। एक बार इस महल को पानी से भरा गया था, जिसकी छटा देखते ही बनती थी, मगर अब फिर से स्थिति वही है।
राय बाल मुकंद का छत्ता : बीरबल के छत्ते के नाम से प्रसिद्ध इस विशाल भवन का निर्माण ऐतिहासिक रिकार्ड के अनुसार शाहजहां के शासनकाल में हुआ था, जबकि भू राजस्व रिकार्ड के मुताबिक इसका निर्माण राय बाल मुकंद ने कराया था। वैसे यह छत्ता बीरबल छत्ते के नाम से भी प्रसिद्ध है और ऐसा माना जाता है कि बीरबल और अकबर इस शहर में आते रहते थे। इस विशाल इमारत की तीन मंजिलें भूमिगत है। इसका निर्माण चुने और पत्थर से किया गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने लिए पुरातत्व विभाग द्वारा छत्ते के भूमिगत तलों की साफ सफाई का कार्य किया गया था, मगर यह अकसर बंद ही रहता है, क्योंकि यहां बनी गुफाओं में जाने की वजह से हादसे हो सकते हैं।
इब्राहिम खान का मकबरा : शहर की घनी आबादी के बीच स्थित यह मकबरा एक विशाल गुंबद के आकार का है। इसका निर्माण इतिहास प्रसिद्ध सम्राट शेरशाह सूरी ने अपने दादा इब्राहिम खान की यादगार में करवाया था। इसके भीतर इब्राहिम खान की कब्र है, जिस पर शाही खानदान का निशान भी है। बताया जाता है कि ये कब्रें इब्राहिम खान के परिवार के लोगों की है। इस मबकरे के निर्माण में लाल स्लेटी रंग के पत्थर का प्रयोग किया गया है, जिस पर मीनाकारी का कार्य बड़ी दक्षता से किया गया है। इसके निर्माण में बड़ी-बड़ी शिलाओं का प्रयोग किया गया है। पत्थर इतना साफ और चिकना है कि अकस्मात उसे देखकर संगमरमर होने का भ्रम होता है। फिलहाल इस मकबरे की सफाई का कार्य किया जा रहा है। जिसके तहत इसकी दीवारों को साफ-सफाई की जा रही है।
चोर गुम्बद: चोर गुंबद यद्यपि एक यादगार के रूप में बनाया गया स्मारक है, परंतु प्राचीन काल में यह स्मारक शहर के बाहर स्थित होने के कारण कालांतर में इस स्थान पर चोर लुटेरे शरण लेने लगे थे, जिसके फलस्वरूप लोग इधर जाने से भी घबराते थे। इसी कारण इसका नाम चोर गुंबद पड़ गया। आज यहां पर एक सुंदर पार्क बना हुआ है तथा प्रशासन ने चोर गुंबद को भी नए सिरे से चमकाया है। जिसके तहत इसकी मरम्मत का कार्य किया गया है। पहले इसके अंदर लोग जा सकते थे, मगर अब लोगों का इसके अंदर प्रवेश बंद कर दिया गया है। इसके चारों ओर सुंदर पार्क बना हुआ है। जहां शहर के लोग सुबह-शाम घूमने के लिए आते हैं।