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Mahendragarh-Narnaul News: पंचायत घर में चल रहे रीजनल सेंटर के हॉल को कराया खाली
Wed, 15 May 2024 11:16 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 15 May 2024 11:16 PM IST
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फोटो संख्या:55- रिवासा पंचायत घर में बनाया गया हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र --स्रोत--संवाद
महेंद्रगढ़। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय का गांव रिवासा के पंचायत घर में छह सालों से चल रहे रीजनल सेंटर को पंचायत ने भवन खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था।
पंचायत के नोटिस के बाद जिम्मेदारों ने भवन के हॉल काे खाली करा अन्य सामान को दो कमरों में ऊपर-नीचे ठूंसकर भर दिया है। अब छह चिकित्सकों व करीब 22 कर्मचारियों के पंचायत घर के बरामदे की छत ही नसीब हो पाएगी। इतना सबकुछ होने के बावजूद भी जिम्मेदार अपने ही भवन का शुभारंभ कराने तक को तैयार नहीं हैं।
पंचायत घर में ही बने बूथ नंबर 104 में अब लोकसभा के लिए मतदान होना है। सहायक निर्वाचन अधिकारी की ओर से 11 मई को खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को पत्र जारी कर बूथ को खाली कराने के आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद इसी दिन खंड विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से ग्राम पंचायत को पत्र भेजकर भवन को खाली कराने के आदेश जारी किए गए थे। ग्राम पंचायत की ओर से क्षेत्रीय निदेशक हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र को 12 मई को नोटिस जारी कर भवन खाली कराने को कहा गया है।
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लुवास का भवन उद्घाटन के इंतजार में पहुंचा जर्जर होने की कगार पर
दक्षिणी हरियाणा के छह जिलों के साथ-साथ राजस्थान के चार जिलों के पशु पालकों के लिए वरदान साबित हो रहा यह केंद्र सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहा है। 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल द्वारा इसकी घोषणा के बाद मार्च 2018 में काम शुरू किया गया था। यह कार्य दिसंबर 2020 तक पूरा होना था। छह साल पहले ही पंचायत घर में लुवास ने अपना स्टाफ बैठाना शुरू कर दिया था। हालांकि इसके लिए जिम्मेदारों ने जल्द ही निर्माणाधीन भवन में रीजनल सेंटर को शिफ्ट करने को कहा था। छह साल का लंबा समय बीतने के बाद भी जिम्मेदार अपने भवन का उद्घाटन तक नहीं करा पाए, जबकि इसका 95 प्रतिशत काम दो साल पहले ही पूरा हो चुका है। दो साल से काम बंद होने के कारण चारों भवनों की दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं व जर्जर होने के कगार पर पहुंच चुका है। नारनौल-महेंद्रगढ़ के अलावा भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, रेवाड़ी, गुरुग्राम, मेवात तथा राजस्थान प्रदेश के साथ लगते जिला झुंझुनू, अलवर, कोटपुतली-बहरोड, सीकर आदि जिलों के पशुपालकों के लिए यह परियोजना वरदान साबित होनी थी, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह योजना ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है।
अब यह है परेशानी
पिछले छह सालों से जिम्मेदारों ने सुविधाओं के दायरे को बढ़ाने की बजाए यहां से मशीनें व अन्य जरूरी उपकरण भी अन्य स्थानों पर भेज दीं, लेकिन 10 करोड़ रुपये से बने अपने ही भवन का शुभारंभ तक नहीं करा पाए। इसका खामियाजा यहां तैनात करीब छह चिकित्सक एवं 22 कर्मचारी भुगत रहे हैं। सेंटर पर प्रतिदिन 200 से अधिक पशुपालक सलाह लेने पहुंच रहे हैं। साथ ही प्रतिदिन पांच से सात ऑपरेशन, हर माह औसतन 15 बड़े स्तर के ऑपरेशन के साथ-साथ 80 से अधिक ओपीडी हो रही हैं।
ग्राम पंचायत की ओर से पंचायत भवन के बूथ को खाली कराने के लिए क्षेत्रीय निदेशक को नोटिस दिया गया है। अब बूथ नंबर 104 के हॉल को खाली करा लिया गया है। जब लुवास के रीजनल सेंटर को चलाने के लिए पंचायत ने कुछ दिन के लिए भवन दिया था। लेकिन छह साल से इसी भवन में चलाया जा रहा है। आचार संहिता हटने के शीघ्र बाद ही ग्राम पंचायत इस पर ठोस निर्णय लेगी।
-महेश कुमार, सरपंच ग्राम पंचायत रिवासा।
ग्राम पंचायत की ओर से उन्हें अवगत कराया गया था। महज 24 व 25 मई के लिए कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन इस दौरान भी सेंटर के पशु वैज्ञानिकों व चिकित्सकों द्वारा ओपीडी व पशुओं की देखभाल का कार्य जारी रहेगा। पशुपालकों को कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि रीजनल सेंटर के भवन का गेट लगा दिया गया है जल्द ही इसका कार्य पूरा कराया जाएगा।
-नरेश कुमार जिंदल, निदेशक अनुसंधान, लाला लाजपत राव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार।
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पंचायत के नोटिस के बाद जिम्मेदारों ने भवन के हॉल काे खाली करा अन्य सामान को दो कमरों में ऊपर-नीचे ठूंसकर भर दिया है। अब छह चिकित्सकों व करीब 22 कर्मचारियों के पंचायत घर के बरामदे की छत ही नसीब हो पाएगी। इतना सबकुछ होने के बावजूद भी जिम्मेदार अपने ही भवन का शुभारंभ कराने तक को तैयार नहीं हैं।
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पंचायत घर में ही बने बूथ नंबर 104 में अब लोकसभा के लिए मतदान होना है। सहायक निर्वाचन अधिकारी की ओर से 11 मई को खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को पत्र जारी कर बूथ को खाली कराने के आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद इसी दिन खंड विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से ग्राम पंचायत को पत्र भेजकर भवन को खाली कराने के आदेश जारी किए गए थे। ग्राम पंचायत की ओर से क्षेत्रीय निदेशक हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र को 12 मई को नोटिस जारी कर भवन खाली कराने को कहा गया है।
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लुवास का भवन उद्घाटन के इंतजार में पहुंचा जर्जर होने की कगार पर
दक्षिणी हरियाणा के छह जिलों के साथ-साथ राजस्थान के चार जिलों के पशु पालकों के लिए वरदान साबित हो रहा यह केंद्र सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहा है। 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल द्वारा इसकी घोषणा के बाद मार्च 2018 में काम शुरू किया गया था। यह कार्य दिसंबर 2020 तक पूरा होना था। छह साल पहले ही पंचायत घर में लुवास ने अपना स्टाफ बैठाना शुरू कर दिया था। हालांकि इसके लिए जिम्मेदारों ने जल्द ही निर्माणाधीन भवन में रीजनल सेंटर को शिफ्ट करने को कहा था। छह साल का लंबा समय बीतने के बाद भी जिम्मेदार अपने भवन का उद्घाटन तक नहीं करा पाए, जबकि इसका 95 प्रतिशत काम दो साल पहले ही पूरा हो चुका है। दो साल से काम बंद होने के कारण चारों भवनों की दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं व जर्जर होने के कगार पर पहुंच चुका है। नारनौल-महेंद्रगढ़ के अलावा भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, रेवाड़ी, गुरुग्राम, मेवात तथा राजस्थान प्रदेश के साथ लगते जिला झुंझुनू, अलवर, कोटपुतली-बहरोड, सीकर आदि जिलों के पशुपालकों के लिए यह परियोजना वरदान साबित होनी थी, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह योजना ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है।
अब यह है परेशानी
पिछले छह सालों से जिम्मेदारों ने सुविधाओं के दायरे को बढ़ाने की बजाए यहां से मशीनें व अन्य जरूरी उपकरण भी अन्य स्थानों पर भेज दीं, लेकिन 10 करोड़ रुपये से बने अपने ही भवन का शुभारंभ तक नहीं करा पाए। इसका खामियाजा यहां तैनात करीब छह चिकित्सक एवं 22 कर्मचारी भुगत रहे हैं। सेंटर पर प्रतिदिन 200 से अधिक पशुपालक सलाह लेने पहुंच रहे हैं। साथ ही प्रतिदिन पांच से सात ऑपरेशन, हर माह औसतन 15 बड़े स्तर के ऑपरेशन के साथ-साथ 80 से अधिक ओपीडी हो रही हैं।
ग्राम पंचायत की ओर से पंचायत भवन के बूथ को खाली कराने के लिए क्षेत्रीय निदेशक को नोटिस दिया गया है। अब बूथ नंबर 104 के हॉल को खाली करा लिया गया है। जब लुवास के रीजनल सेंटर को चलाने के लिए पंचायत ने कुछ दिन के लिए भवन दिया था। लेकिन छह साल से इसी भवन में चलाया जा रहा है। आचार संहिता हटने के शीघ्र बाद ही ग्राम पंचायत इस पर ठोस निर्णय लेगी।
-महेश कुमार, सरपंच ग्राम पंचायत रिवासा।
ग्राम पंचायत की ओर से उन्हें अवगत कराया गया था। महज 24 व 25 मई के लिए कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन इस दौरान भी सेंटर के पशु वैज्ञानिकों व चिकित्सकों द्वारा ओपीडी व पशुओं की देखभाल का कार्य जारी रहेगा। पशुपालकों को कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि रीजनल सेंटर के भवन का गेट लगा दिया गया है जल्द ही इसका कार्य पूरा कराया जाएगा।
-नरेश कुमार जिंदल, निदेशक अनुसंधान, लाला लाजपत राव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार।