{"_id":"5fef66818ebc3e3e751c8d2e","slug":"farmer-did-not-aware-for-pestisize-narnol-news-rtk5889841155","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान खाद के प्रयोग पर सचेत नहीं, विभाग करेगा जागरूक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान खाद के प्रयोग पर सचेत नहीं, विभाग करेगा जागरूक
विज्ञापन
किसान कल्याण भूमि कार्यालय।
- फोटो : Narnol
नारनौल। जिले के किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड को लेकर संजीदा नहीं हैं। जिले में करीब 94 हजार किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड बने हुए हैं। लेकिन वे कार्ड अनुसार खेती में खाद का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इससे उन्हें फसल की अच्छी पैदावार नहीं मिल पा रही है। ऐसे में अब कृषि विभाग ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में जागरूक करने का फैसला लिया है।
बता दें कि सरकार मृदा स्वास्थ्य कार्ड को लेकर गंभीर है। सरकार का प्रयास है कि किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही खाद व बीज का प्रयोग करें। जिससे उन्हें अच्छी पैदावार मिल सके और मिट्टी भी उपजाऊ बनी रहे। इसलिए सभी किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाएं और उसी अनुसार खाद का प्रयोग करें। जानकारी के अनुसार करीब 94 हजार किसानों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया जा चुका है। इसमें 90 हजार कार्ड को दो-तीन साल पहले बने थे। साल 2019-2020 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 789 किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाने थे। लेकिन, विभाग करीब 2010 किसानों को कार्ड बनवाया था। जिससे की किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खाद का प्रयोग करें। इस प्रोजेक्ट में रामपुरा गांव में 880, मेघोत बिंजा में 420 और राजपुरा गांव में 710 किसानों के कार्ड बने थे। इस किसानों को सुझाव दिया गया था कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती में खाद का प्रयोग करें। जिससे उन्हें सफल का बेहतर पैदावार मिल सके। लेकिन, कार्ड का कम ही किसानों ने प्रयोग किया है। कृषि विभाग के अनुसार एक बार मृदा स्वास्थ्य कार्ड बन जाने के बाद तीन साल तक किसान दिए गए सुझावों के अनुसार खाद का प्रयोग कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें दोबारा से मिट्टी जांच कराने की जरूरत होती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनने के बाद किसानों को देखना है कि उसकी जमीन में किन-किन पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। यह चिह्नित होने के बाद मिट्टी की सेहत सुधारने की दिशा में काम करना होता है।
आर्गेनिक कार्बन तत्वों की कमी
जानकारी के अनुसार मिट्टी में आर्गेनिक तत्वों की करीब 60 फीसदी की कमी है। जिला भूमि परीक्षण अधिकारी हरिराम यादव ने बताया कि करीब 94 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाकर दिया गया है। अभी किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड का पूरा प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इससे उन्हें खेती का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकारी ने बताया कि किसान मिट्टी और पानी की जांच जरूर कराएं। विभाग के सुझाव के अनुसार ही खाद व बीज का प्रयोग करें, ताकि अच्छी पैदावार मिल सके। किसानों को हेल्थ कार्ड के बारे में जानकारी देने के लिए पहले चरण में 50 गांवों को चुना गया है। इसमें दस गांव अटेली, 11 नारनौल ब्लॉक, नौ सीहमा ब्लॉक, चार-चार नांगल चौधरी और निजामपुर ब्लॉक के शामिल है। अन्य गांव महेंद्रगढ़ व कनीना ब्लॉक के शामिल हैं। 12 गांवों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए कैंप लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश किसान यूरिया और डीएपी का प्रयोग करते हैं। बेहतर होगा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खाद का प्रयोग करें। मिट्टी में 16 पोषक तत्व जरूरी हैं।
विज्ञापन
मृदा स्वास्थ्य कार्ड को लेकर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें किसानों को समझाया जा रहा है कि उनकी जमीन में जिन पोषक तत्वों की कमी है, कैसे दूर करना है। गांवों में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कार्ड बनाया गया है। इससे खेती में अंधाधुंध खाद के प्रयोग पर रोक लगेेगी और जरूरत के अनुसार किसान खाद का प्रयोग कर सकेंगे। मिट्टी की सेहत सुधरने पर उत्पादन भी बढ़ जाएगा। किसान हेल्थ कार्ड का प्रयोग जरूर करें।
-हरिराम यादव, भूमि परीक्षण अधिकारी नारनौल।
विज्ञापन
बता दें कि सरकार मृदा स्वास्थ्य कार्ड को लेकर गंभीर है। सरकार का प्रयास है कि किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही खाद व बीज का प्रयोग करें। जिससे उन्हें अच्छी पैदावार मिल सके और मिट्टी भी उपजाऊ बनी रहे। इसलिए सभी किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाएं और उसी अनुसार खाद का प्रयोग करें। जानकारी के अनुसार करीब 94 हजार किसानों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया जा चुका है। इसमें 90 हजार कार्ड को दो-तीन साल पहले बने थे। साल 2019-2020 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 789 किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाने थे। लेकिन, विभाग करीब 2010 किसानों को कार्ड बनवाया था। जिससे की किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खाद का प्रयोग करें। इस प्रोजेक्ट में रामपुरा गांव में 880, मेघोत बिंजा में 420 और राजपुरा गांव में 710 किसानों के कार्ड बने थे। इस किसानों को सुझाव दिया गया था कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती में खाद का प्रयोग करें। जिससे उन्हें सफल का बेहतर पैदावार मिल सके। लेकिन, कार्ड का कम ही किसानों ने प्रयोग किया है। कृषि विभाग के अनुसार एक बार मृदा स्वास्थ्य कार्ड बन जाने के बाद तीन साल तक किसान दिए गए सुझावों के अनुसार खाद का प्रयोग कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें दोबारा से मिट्टी जांच कराने की जरूरत होती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनने के बाद किसानों को देखना है कि उसकी जमीन में किन-किन पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। यह चिह्नित होने के बाद मिट्टी की सेहत सुधारने की दिशा में काम करना होता है।
विज्ञापन
आर्गेनिक कार्बन तत्वों की कमी
जानकारी के अनुसार मिट्टी में आर्गेनिक तत्वों की करीब 60 फीसदी की कमी है। जिला भूमि परीक्षण अधिकारी हरिराम यादव ने बताया कि करीब 94 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाकर दिया गया है। अभी किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड का पूरा प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इससे उन्हें खेती का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकारी ने बताया कि किसान मिट्टी और पानी की जांच जरूर कराएं। विभाग के सुझाव के अनुसार ही खाद व बीज का प्रयोग करें, ताकि अच्छी पैदावार मिल सके। किसानों को हेल्थ कार्ड के बारे में जानकारी देने के लिए पहले चरण में 50 गांवों को चुना गया है। इसमें दस गांव अटेली, 11 नारनौल ब्लॉक, नौ सीहमा ब्लॉक, चार-चार नांगल चौधरी और निजामपुर ब्लॉक के शामिल है। अन्य गांव महेंद्रगढ़ व कनीना ब्लॉक के शामिल हैं। 12 गांवों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए कैंप लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश किसान यूरिया और डीएपी का प्रयोग करते हैं। बेहतर होगा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खाद का प्रयोग करें। मिट्टी में 16 पोषक तत्व जरूरी हैं।
विज्ञापन
मृदा स्वास्थ्य कार्ड को लेकर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें किसानों को समझाया जा रहा है कि उनकी जमीन में जिन पोषक तत्वों की कमी है, कैसे दूर करना है। गांवों में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कार्ड बनाया गया है। इससे खेती में अंधाधुंध खाद के प्रयोग पर रोक लगेेगी और जरूरत के अनुसार किसान खाद का प्रयोग कर सकेंगे। मिट्टी की सेहत सुधरने पर उत्पादन भी बढ़ जाएगा। किसान हेल्थ कार्ड का प्रयोग जरूर करें।
-हरिराम यादव, भूमि परीक्षण अधिकारी नारनौल।