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परिवार टूट नहीं रहे, बदल रहे हैं...तकनीक से फिर जुड़ सकते हैं रिश्ते : प्रो. मोना
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फोटो संख्या:60 छात्रा नेहा
महेंद्रगढ़। आज के समय में भले ही लोग नौकरी व पढ़ाई के चलते दूर रह रहे हों लेकिन तकनीक के जरिए वे रोज एक-दूसरे से जुड़े रह सकते हैं। वीडियो कॉल व मैसेज से अपनेपन को बनाए रखा जा सकता है। यह बात हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की पर्यावरण अध्ययन विभाग की प्रो. डॉ. मोना शर्मा ने कही।
अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के मौके पर शहर के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसे अमर उजाला फाउंडेशन ने आयोजित किया। इसकी थीम बदलती मानसिकता से टूटते संयुक्त परिवार रही।
इस मौके पर अधिवक्ता रेखा यादव, अधिवक्ता बबली और फैमिली कोर्ट काउंसलर पिंकी यादव भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में डॉ. शिव भावना और प्राचार्य सुनील गोरा ने भी छात्राओं को संबोधित किया। छात्राओं ने भी परिवार से जुड़े कई सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।
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बॉक्समातृभाषा को छोड़कर पाश्चात्य संस्कृति अपनाना भी परिवार टूटने का एक बड़ा कारण है। समाज में आज हिंदी बोलने वालों को कमतर और अंग्रेजी बोलने वालों को श्रेष्ठ समझा जाता है। यदि हम अपनी मातृभाषा को अपनाएं तो जापान, जर्मनी जैसे देशों की तरह प्रगति कर सकते हैं और परिवार भी मजबूत रहेंगे।-पिंकी यादव, काउंसलर, फैमिली कोर्ट
बॉक्स
वर्तमान की स्कूली शिक्षा केवल किताबों तक सिमट गई है और बच्चों से संस्कार गायब हो गए हैं। पहले बच्चों को गुरुकुल में विद्या और संस्कार दिए जाते और इसके कारण परिवार संगठित रहता था। आजकल एकल परिवार के कारण संस्कार और संस्कारों के अभाव में संयुक्त परिवार खत्म हो गए हैं। -रेखा यादव, अधिवक्ता, फैमिली कोर्ट
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छात्राओं के सवाल
उर्मिला : क्या संयुक्त परिवार में महिलाओं को तंग किया जाता है?
डॉ. मोना : संयुक्त परिवार में महिलाओं को तंग नहीं किया जाता है। नारी सहनशील है और वही परिवार को जोड़े रखने की कड़ी होती है और बातों पर बैठकर विमर्श करना चाहिए।
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नेहा : नारी आत्मनिर्भर है तो वहीं सभी का ध्यान क्यों रखे?
अधिवक्ता रेखा : नारी आत्मनिर्भर है लेकिन आत्मनिर्भरता का मतलब परिवार के दूर रहना और किसी का ध्यान रखने और नहीं रखने से संबंधित नहीं है। यह सबकी अपनी मर्जी होगी है।
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अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के मौके पर शहर के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसे अमर उजाला फाउंडेशन ने आयोजित किया। इसकी थीम बदलती मानसिकता से टूटते संयुक्त परिवार रही।
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इस मौके पर अधिवक्ता रेखा यादव, अधिवक्ता बबली और फैमिली कोर्ट काउंसलर पिंकी यादव भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में डॉ. शिव भावना और प्राचार्य सुनील गोरा ने भी छात्राओं को संबोधित किया। छात्राओं ने भी परिवार से जुड़े कई सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।
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बॉक्समातृभाषा को छोड़कर पाश्चात्य संस्कृति अपनाना भी परिवार टूटने का एक बड़ा कारण है। समाज में आज हिंदी बोलने वालों को कमतर और अंग्रेजी बोलने वालों को श्रेष्ठ समझा जाता है। यदि हम अपनी मातृभाषा को अपनाएं तो जापान, जर्मनी जैसे देशों की तरह प्रगति कर सकते हैं और परिवार भी मजबूत रहेंगे।-पिंकी यादव, काउंसलर, फैमिली कोर्ट
बॉक्स
वर्तमान की स्कूली शिक्षा केवल किताबों तक सिमट गई है और बच्चों से संस्कार गायब हो गए हैं। पहले बच्चों को गुरुकुल में विद्या और संस्कार दिए जाते और इसके कारण परिवार संगठित रहता था। आजकल एकल परिवार के कारण संस्कार और संस्कारों के अभाव में संयुक्त परिवार खत्म हो गए हैं। -रेखा यादव, अधिवक्ता, फैमिली कोर्ट
छात्राओं के सवाल
उर्मिला : क्या संयुक्त परिवार में महिलाओं को तंग किया जाता है?
डॉ. मोना : संयुक्त परिवार में महिलाओं को तंग नहीं किया जाता है। नारी सहनशील है और वही परिवार को जोड़े रखने की कड़ी होती है और बातों पर बैठकर विमर्श करना चाहिए।
नेहा : नारी आत्मनिर्भर है तो वहीं सभी का ध्यान क्यों रखे?
अधिवक्ता रेखा : नारी आत्मनिर्भर है लेकिन आत्मनिर्भरता का मतलब परिवार के दूर रहना और किसी का ध्यान रखने और नहीं रखने से संबंधित नहीं है। यह सबकी अपनी मर्जी होगी है।

फोटो संख्या:60 छात्रा नेहा

फोटो संख्या:60 छात्रा नेहा