{"_id":"68657934b26028ebb1033431","slug":"example-narendra-has-been-lighting-the-lamp-of-cleanliness-on-the-threshold-of-temples-for-forty-years-narnol-news-c-203-1-sroh1010-118212-2025-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: मिसाल... चालीस साल से मंदिरों की देहरी पर स्वच्छता का दीया जला रहे नरेंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: मिसाल... चालीस साल से मंदिरों की देहरी पर स्वच्छता का दीया जला रहे नरेंद्र
Wed, 02 Jul 2025 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 02 Jul 2025 11:53 PM IST
विज्ञापन
फोटो संख्या:69- सुरतागिरी आश्रम के नजदीक सफाई करता दुकानदार नरेंद्र कुमार--संवाद
अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की सफाई तो सभी करते हैं, लेकिन क्या कोई दूसरों की जगह पर फैलाई गंदगी को भी साफ करता है भला? हां...नगर पालिका के सफाईकर्मी तो ऐसा करते ही हैं, कुछ समाजसेवी भी हैं, जो बगैर किसी शोर-शराबे के स्वच्छ-साधना में लीन हैं। अमर उजाला इस अभियान के जरिये स्वच्छता के ऐसे ही सजग प्रहरियों से आपकी मुलाकात कराएगा। पहली कड़ी में पेश है, 65 साल के नरेंद्र कुमार की कहानी...
महेंद्रगढ़। मोहल्ला ढाणी में रहने वाले 65 बरस के नरेंद्र कुमार तकरीबन 40 साल से मंदिरों की देहरी तक स्वच्छता का दीया जला रहे हैं। वह ठाकुरजी मंदिर से सुरता गिरि आश्रम तक 100 मीटर का रास्ता रोज साफ करते हैं। इस साधना के पीछे भाव यही कि भगवान के पास कोई जाए तो गंदगी से दो-चार न होना पड़े।
नरेंद्र कुमार ने घर से करीब 300 मीटर दूरी पर 25 वर्ष की उम्र में मसानी चौक के पास परचून की दुकान खोली थी। वह बताते हैं कि उस वक्त आसपास बहुत गंदगी रहती थी। वहीं से लोग गुजरते हुए ठाकुरजी मंदिर और सुरता गिरि आश्रम जाया करते थे। इसे देखते हुए सफाई की शुरुआत की।
विज्ञापन
अब यह एक घंटे की सफाई उनकी दिनचर्या का नियमित हिस्सा हो चुकी है। नरेंद्र बताते हैं कि जिस वक्त सफाई की शुरुआत की थी, तब महेंद्रगढ़ नगर पालिका नहीं बनी थी। वर्ष 1993 में दर्जा मिलने के बाद भी सफाई कर्मियों की पूर्ति नहीं हो पाई।
इसी कारण चौक की गंदगी साफ करने का सिलसिला चला और 40 साल बाद आज भी चालू है। अब तो आसपास के बच्चे भी हाथ बंटाने आ जाते हैं। वह सुबह सात बजे दुकान और गली की सफाई करते हैं। उसी दौरान कूड़ा भी गाड़ी में डाल देते हैं।
इंसेट
पूरे वार्ड की सफाई का जिम्मा एक कर्मचारी पर
नगर पालिका में कहने को तो 75 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें 49 ही पालिका के रोल पर हैं। बाकी, हरियाणा कौशल रोजगार के तहत लगे हैं। बताते हैं कि 20 सफाईकर्मी तो अधिकारियों के आवासों और कार्यालयों पर तैनात हैं। 16 कर्मचारियों पर मुख्य बाजारों में सफाई का जिम्मा है, जबकि नौ कर्मचारी कूड़ा डालने वाले वाहनों में तैनात हैं। इस कारण 15 वार्डों की सफाई 15 कर्मचारियों पर ही है। यानी, एक वार्ड की एक कर्मचारी पर।
-- -- -- -- -- -- -
वर्जन:
सफाई के लिए पांच साल के टेंडर का एस्टीमेट शासन को भेजा है। इसके तहत हर वार्ड में न्यूनतम तीन कर्मचारियों की तैनाती का प्रस्ताव है। अच्छी व्यवस्था के लिए हमें 100 कर्मचारियों की जरूरत है। टेंडर मंजूरी के बाद इसे सुचारू बनाएंगे। - रमेश सैनी, चेयरमैन नगर पालिका
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। मोहल्ला ढाणी में रहने वाले 65 बरस के नरेंद्र कुमार तकरीबन 40 साल से मंदिरों की देहरी तक स्वच्छता का दीया जला रहे हैं। वह ठाकुरजी मंदिर से सुरता गिरि आश्रम तक 100 मीटर का रास्ता रोज साफ करते हैं। इस साधना के पीछे भाव यही कि भगवान के पास कोई जाए तो गंदगी से दो-चार न होना पड़े।
विज्ञापन
नरेंद्र कुमार ने घर से करीब 300 मीटर दूरी पर 25 वर्ष की उम्र में मसानी चौक के पास परचून की दुकान खोली थी। वह बताते हैं कि उस वक्त आसपास बहुत गंदगी रहती थी। वहीं से लोग गुजरते हुए ठाकुरजी मंदिर और सुरता गिरि आश्रम जाया करते थे। इसे देखते हुए सफाई की शुरुआत की।
विज्ञापन
अब यह एक घंटे की सफाई उनकी दिनचर्या का नियमित हिस्सा हो चुकी है। नरेंद्र बताते हैं कि जिस वक्त सफाई की शुरुआत की थी, तब महेंद्रगढ़ नगर पालिका नहीं बनी थी। वर्ष 1993 में दर्जा मिलने के बाद भी सफाई कर्मियों की पूर्ति नहीं हो पाई।
इसी कारण चौक की गंदगी साफ करने का सिलसिला चला और 40 साल बाद आज भी चालू है। अब तो आसपास के बच्चे भी हाथ बंटाने आ जाते हैं। वह सुबह सात बजे दुकान और गली की सफाई करते हैं। उसी दौरान कूड़ा भी गाड़ी में डाल देते हैं।
इंसेट
पूरे वार्ड की सफाई का जिम्मा एक कर्मचारी पर
नगर पालिका में कहने को तो 75 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें 49 ही पालिका के रोल पर हैं। बाकी, हरियाणा कौशल रोजगार के तहत लगे हैं। बताते हैं कि 20 सफाईकर्मी तो अधिकारियों के आवासों और कार्यालयों पर तैनात हैं। 16 कर्मचारियों पर मुख्य बाजारों में सफाई का जिम्मा है, जबकि नौ कर्मचारी कूड़ा डालने वाले वाहनों में तैनात हैं। इस कारण 15 वार्डों की सफाई 15 कर्मचारियों पर ही है। यानी, एक वार्ड की एक कर्मचारी पर।
वर्जन:
सफाई के लिए पांच साल के टेंडर का एस्टीमेट शासन को भेजा है। इसके तहत हर वार्ड में न्यूनतम तीन कर्मचारियों की तैनाती का प्रस्ताव है। अच्छी व्यवस्था के लिए हमें 100 कर्मचारियों की जरूरत है। टेंडर मंजूरी के बाद इसे सुचारू बनाएंगे। - रमेश सैनी, चेयरमैन नगर पालिका