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हर छत पर फैला है मौत का जाल
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 07 May 2016 11:42 PM IST
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छत पर फैला मौत का जाल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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लाखों रुपये खर्च कर आशियाना बनाया जाए और आप उसकी छत पर पर भी न जा सकें तो आपको कैसा लगेगा। कुछ ऐसा ही हो रहा है शहर की करीब चार कालोनियों दीवान कालोनी, कर्मचारी कालोनी, फ्रेंडस कालोनी और अनाज मंडी के बगल में रहने वाले इन 200 परिवारों के साथ। ऐसा इसलिए है क्योंकि इनकी छतों से हाईवोल्टेज बिजली की दो-दो लाइनें गुजर रहीं हैं। इन परिवारों के द्वारा बिजली निगम के अनगिनत चक्कर काटे जा चुके हैं लेकिन इसका कोई समाधान नहीं हो पाया।
टूटने लगे हैं जर्जर तार और खंभे
बिजली निगम के द्वारा लोहे के खंभों को बदलने के आदेश काफी पहले ही दिए जा चुके हैं लेकिन बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन दोनों लाइनों के अधिकतर पोल लोहे वाले ही हैं। लाइन के बारे में बताया जा रहा है कि करीब 15 से 20 वर्ष से भी ज्यादा पुरानी है। ऐसे में ये खंभे अब जंग खा चुके हैं और इसके साथ ही तार भी। जंग खाए खंभे काफी जगहों से टूट चुके हैं और लोगों के द्वारा अपने खर्च पर ही इन्हें लकड़ी के गुटखों के द्वारा बदला गया है। वहीं कई घरों में ये हाई वोल्टेज के तार टूटकर गिर रहे हैं।
हाल में दो लोग बन चुके हैं शिकार
इन बिजली की लाइनों के हाल के ही दिनों में दो लोग शिकार बन चुके हैं। पहली घटना में एक दुकान की चिनाई कर रहा एक राजमिस्त्री इस लाइन का शिकार बना। अत्यधिक झुलस जाने के बाद जिसकी मौत हो गई। वहीं तीन दिन पूर्व सिसौठ गांव का एक बच्चा, जब रिवासा पुल के पास बने एक मकान की छत पर खेलते-खेलते चला गया तो वो भी हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आ गया।
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बीच में काम छोड़ गए मिस्त्री
कर्मचारी कालोनी में ही सेना से सेवानिवृत्त जवान ने जब प्लाट लिया था तो उसने इस बिजली की लाइन का ध्यान नहीं किया। जब मिस्त्री ने मकान बनाना शुरू किया तो इस लाइन का ध्यान आया। मिस्त्री ने करीब 7 फीट तक तो इस मकान का निर्माण किया लेकिन इसके बाद करीब तीन फिट ऊंचाई पर ही बिजली की लाइन होने के कारण काम बीच में छोड़ कर चला गया। ऐसे में पीड़ित की सारी जमा पूंजी इस प्लाट में ही उलझ गई।
नहीं है इन मकानों की मार्केट में कीमत
जिन मकानों के ऊपर से ये बिजली की लाइन गुजर रही है, इसकी वजह से इनकी मार्केट में कोई कीमत नहीं है। यही वजह है कि ये लोग अपने मकानों को बेचकर दूसरी जगह पर भी नहीं रह सकते। ऐसे में इन लोगों के लिए ये बिजली लाइन आफत का कारण बनी हुई है। ये लोग अब सीढ़ियों वाले दरवाजे पर ताला लगाते हैं।
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टूटने लगे हैं जर्जर तार और खंभे
बिजली निगम के द्वारा लोहे के खंभों को बदलने के आदेश काफी पहले ही दिए जा चुके हैं लेकिन बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन दोनों लाइनों के अधिकतर पोल लोहे वाले ही हैं। लाइन के बारे में बताया जा रहा है कि करीब 15 से 20 वर्ष से भी ज्यादा पुरानी है। ऐसे में ये खंभे अब जंग खा चुके हैं और इसके साथ ही तार भी। जंग खाए खंभे काफी जगहों से टूट चुके हैं और लोगों के द्वारा अपने खर्च पर ही इन्हें लकड़ी के गुटखों के द्वारा बदला गया है। वहीं कई घरों में ये हाई वोल्टेज के तार टूटकर गिर रहे हैं।
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हाल में दो लोग बन चुके हैं शिकार
इन बिजली की लाइनों के हाल के ही दिनों में दो लोग शिकार बन चुके हैं। पहली घटना में एक दुकान की चिनाई कर रहा एक राजमिस्त्री इस लाइन का शिकार बना। अत्यधिक झुलस जाने के बाद जिसकी मौत हो गई। वहीं तीन दिन पूर्व सिसौठ गांव का एक बच्चा, जब रिवासा पुल के पास बने एक मकान की छत पर खेलते-खेलते चला गया तो वो भी हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आ गया।
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बीच में काम छोड़ गए मिस्त्री
कर्मचारी कालोनी में ही सेना से सेवानिवृत्त जवान ने जब प्लाट लिया था तो उसने इस बिजली की लाइन का ध्यान नहीं किया। जब मिस्त्री ने मकान बनाना शुरू किया तो इस लाइन का ध्यान आया। मिस्त्री ने करीब 7 फीट तक तो इस मकान का निर्माण किया लेकिन इसके बाद करीब तीन फिट ऊंचाई पर ही बिजली की लाइन होने के कारण काम बीच में छोड़ कर चला गया। ऐसे में पीड़ित की सारी जमा पूंजी इस प्लाट में ही उलझ गई।
नहीं है इन मकानों की मार्केट में कीमत
जिन मकानों के ऊपर से ये बिजली की लाइन गुजर रही है, इसकी वजह से इनकी मार्केट में कोई कीमत नहीं है। यही वजह है कि ये लोग अपने मकानों को बेचकर दूसरी जगह पर भी नहीं रह सकते। ऐसे में इन लोगों के लिए ये बिजली लाइन आफत का कारण बनी हुई है। ये लोग अब सीढ़ियों वाले दरवाजे पर ताला लगाते हैं।