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मौत के साये में ड्यूटी कर रहे बिजली कर्मचारी
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sun, 08 May 2016 11:53 PM IST
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बिजली कर्मचारी भवन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हित में कितनी सजग है, इसका अंदाजा दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम के 132 केवी सब स्टेशन से ही लगाया जा सकता है। जहां दूसरों के घरों में उजाला करने वाले कर्मचारी खुद मौत के साये में रहने को मजबूर हैं। आलम यह है कि तीन दशक पूर्व अस्तित्व में आए इस 132 केवी सब स्टेशन के भवनों की सुध न लेने के कारण यह भवन खस्ता और जर्जर हो गया है।
यहां भवनों का अभाव होने के कारण कर्मचारियों को इन खस्ताहाल भवनों में ही रिहायश करनी पड़ रही है। इन भवनों का प्लास्टर खुद में खुद गिरने लगा है। बरसात के मौसम में जमकर पानी गिरता है। विभाग के सूत्रों के अनुसार उक्त पावर हाउस में 22 रिहायशी भवन व 1 उपमंडल अधिकारी और 1 विभाग के एसएससी की कोठी स्थापित है। उक्त सभी भवन जर्जर व खस्ताहाल है, लेकिन कुछ कर्मचारी तो बाहर किराए के मकानों में रह रहे हैं। अभी विभाग के 6 कर्मचारी खंडहर व खस्ता हालत भवनों में रहने को मजबूर हैं।
गौर करने लायक बात यह भी है कि लगभग छोटे बड़े सैकड़ों गांवों का बिजली संबंधित कार्य इसी कार्यालय में किया जाता है, लेकिन विभाग द्वारा यहां कार्यालय के नाम पर कोई भवन स्थापित नहीं किया गया। अधिकारियों की रिहायशी कोठियों में यहां कार्य चल रहा है। यहां स्थापित लगभग सारे भवन खंडहर है लेकिन नए भवनों का निर्माण न होने के कारण यहां कर्मचारी इन्हीं भवनों में कार्य व रहने के लिए मजबूर हैं। जो किसी भी समय प्राण घातक साबित हो सकते हैं। सूत्र बतातेे हैं कि इन भवनों में रहने वाले कर्मचारी प्रतिमाह 124 रुपये विभाग में जमा भी कराते है। लेकिन पिछले कई वर्षों से जर्जर व खस्ताहाल भवन की सुविधा भी इस बजट नहीं होने वाली। क्योंकि विभाग द्वारा जिले में किश्त वाइज सुधारीकरण का कार्य करवाया जाता है।
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गई है और न ही नए भवनों के निर्माण के लिए आदेश आए है। -सुरेश कुमार, इंचार्ज भवन निर्माण व जेई अटेली
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यहां भवनों का अभाव होने के कारण कर्मचारियों को इन खस्ताहाल भवनों में ही रिहायश करनी पड़ रही है। इन भवनों का प्लास्टर खुद में खुद गिरने लगा है। बरसात के मौसम में जमकर पानी गिरता है। विभाग के सूत्रों के अनुसार उक्त पावर हाउस में 22 रिहायशी भवन व 1 उपमंडल अधिकारी और 1 विभाग के एसएससी की कोठी स्थापित है। उक्त सभी भवन जर्जर व खस्ताहाल है, लेकिन कुछ कर्मचारी तो बाहर किराए के मकानों में रह रहे हैं। अभी विभाग के 6 कर्मचारी खंडहर व खस्ता हालत भवनों में रहने को मजबूर हैं।
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गौर करने लायक बात यह भी है कि लगभग छोटे बड़े सैकड़ों गांवों का बिजली संबंधित कार्य इसी कार्यालय में किया जाता है, लेकिन विभाग द्वारा यहां कार्यालय के नाम पर कोई भवन स्थापित नहीं किया गया। अधिकारियों की रिहायशी कोठियों में यहां कार्य चल रहा है। यहां स्थापित लगभग सारे भवन खंडहर है लेकिन नए भवनों का निर्माण न होने के कारण यहां कर्मचारी इन्हीं भवनों में कार्य व रहने के लिए मजबूर हैं। जो किसी भी समय प्राण घातक साबित हो सकते हैं। सूत्र बतातेे हैं कि इन भवनों में रहने वाले कर्मचारी प्रतिमाह 124 रुपये विभाग में जमा भी कराते है। लेकिन पिछले कई वर्षों से जर्जर व खस्ताहाल भवन की सुविधा भी इस बजट नहीं होने वाली। क्योंकि विभाग द्वारा जिले में किश्त वाइज सुधारीकरण का कार्य करवाया जाता है।
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गई है और न ही नए भवनों के निर्माण के लिए आदेश आए है। -सुरेश कुमार, इंचार्ज भवन निर्माण व जेई अटेली