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जिप के 20 पार्षद पहुंचे, चुनाव अधिकारी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:11 AM IST
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जिप का चुनाव टला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शनिवार सुबह पंचायत भवन परिसर में करीब पौने घंटे तक चले हाई प्रोफाइल ड्रामे के बाद जिला प्रमुख और उपप्रमुख पद के लिए होने वाले चुनाव एक बार फिर से टल गए। चुनाव टलने के पीछे चुनाव अधिकारी एडीसी आरएस वर्मा की तबीयत अचानक खराब होना बताया गया। चुनाव टलते ही राव इंद्रजीत ग्रुप की डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और विधायक ओमप्रकाश एडीओ को झटका लगा है, वे 13 पार्षदों के साथ लौट गए। दूसरे ग्रुप के भी सात पार्षद मौके पर मौजूद थे। राजनीतिक गलियारों में इसे शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा की बड़ी जीत बताई जा रही है। अब चुनाव अधिकारी द्वारा चुनाव की तारीख दी जाएगी।
शनिवार को जिला परिषद प्रमुख और उप प्रमुख के लिए चुनाव होने थे। इसके तहत एडीसी आरएस वर्मा ने पंचायत भवन नारनौल में सुबह साढ़े नौ बजे का समय दिया था। इस बारे में सभी 20 पार्षदों को भी सूचित कर दिया गया था। करीब तीन दिन पहले दोबारा से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई थी। इसके बाद से ही जिला प्रमुख और उप प्रमुख बनने के सपने संजोए उम्मीदवारों ने अपने-अपने आकाओं के यहां जाना शुरू कर दिया था। इसके चलते दो-तीन पहले डिप्टी स्पीकर के यहां बैठकों का दौर भी चला। वहीं एक धड़े के 11 पार्षद भी मौजूद थे। दूसरे धड़े के लोग भी अपनी-अपनी जुगत बैठाने में लगे थे। वीरवार को सभी पार्षद भारत भ्रमण के लिए भी गए थे। इसके तहत एक गुट के पार्षद या पार्षद के परिजन राजस्थान घूमने गए थे। वहीं से पूरा राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा था।
डिप्टी स्पीकर के साथ बस में सवार होकर आए पार्षद
शनिवार को तिथि होने के कारण एक गुट के 13 पार्षद डिप्टी स्पीकर संतोष यादव की महेंद्रगढ़ रोड स्थित कोठी पर सुबह करीब साढ़े आठ बजे एकत्र हुए। वहां पर नारनौल के विधायक भी पहुंचे। वहां से सुबह ठीक सवा नौ बजे के करीब 13 पार्षद डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और विधायक ओमप्रकाश की अगुवाई में एक निजी स्कूल की बस में सवार होकर पंचायत भवन पहुंचे। डिप्टी स्पीकर और विधायक बस में होने के कारण पार्षदों की भरी बस को वहां तैनात पुलिस कर्मचारियों ने सीधे पंचायत भवन के अंदर जाने दिया। जहां से सभी 13 पार्षद उतरकर पंचायत भवन के अंदर गए। इन 13 पार्षदों में प्रधान पद के दावेदार माने जाने वाले वार्ड-14 से राजेश मांदी के अलावा वार्ड -एक से सुशीला, चार से प्रदीप मालड़ा, सात से सतपाल पाथेड़ा, आठ से कुलदीप सुरजनवास, नौ से सुनीता वर्मा, 11 से इंद्रपाल मिर्जापुर, 12 से योगेंद्र दौंगड़ा अहीर, 13 से राजबाला, 16 से सुरेश कुमार, 17 से रामा धौलेड़ा, 18 से सुमन देवी व 19 से कमला दंचोली शामिल हैं।
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बंद था कमरा, बाहर ही हुई मंत्रणा
पार्षदों के साथ-साथ डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और विधायक भी उतरकर पंचायत भवन के अंदर पहुंचे। अंदर पहुंचने पर डिप्टी स्पीकर ने देखा की जहां पर चुनाव होना है, उस मीटिंग हाल के बाहर ताला लगा हुआ है। इसे देखकर संतोष यादव और विधायक पंचायत भवन के पीछे चले गए। जहां पर उन्होंने अधिकारियों और अन्य से फोन पर करीब आधे घंटे तक मंत्रणा की।
दूसरे गुट में आए सात पार्षद
दूसरे गुट में सात पार्षद तीन गाड़ियों में सवार होकर आए। उनकी गाड़ियों को पंचायत भवन के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इस पर उन्होंने वहां पर थोड़ी देर हंगामा भी किया। बाद में वे सभी पैदल उतरकर अंदर आ गए। उनका आरोप था कि पहले प्राइवेट बस को तो अंदर जाने दिया, अब उन्हें पुलिसकर्मी अंदर नहीं जाने दे रहे। इन सात पार्षदों में वार्ड नंबर दो से राकेश बुडिन उर्फ गौतम, तीन नंबर से रितु खुड़ाना, पांच नंबर से राजेश देवी, छह नंबर से अजय सेहलंग, दस नंबर से अश्वनी कुमार, 15 नंबर से आरती देवी और 20 नंबर वार्ड से विनोद भील शामिल हैं।
पंचायत भवन के अंदर खड़े रहे पार्षद
पंचायत भवन का मीटिंग हाल बंद होने के कारण पार्षद भी दो-तीन टोल बनाकर पंचायत भवन के अंदर ही खड़े रहे। इसमें महिला पार्षदों का अलग टोल और पुरुष पार्षदों के अलग-अलग टोल थे।
सैकड़ों पुलिसकर्मियों की लगाई थी ड्यूटी
जिला परिषद के प्रधान और उपप्रधान के चुनाव के चलते उपपुलिस अधीक्षक महेश कुमार की अगुवाई में सैकड़ों पुलिसकर्मियों की ड्यूटी पंचायत भवन में सुरक्षा के चलते लगाई गई थी। चुनाव नहीं होने पर पुलिस की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी किसी भी व्यक्ति को पंचायत भवन के अंदर प्रवेश नहीं करने दे रहे थे।
पंचायत भवन के बाहर था लोगों का हुजूम
पंचायत भवन में होने वाले जिला परिषद प्रमुख और उप प्रमुख पद के चुनाव के नतीजों को जानने के लिए पंचायत भवन के पास लोगों का हुजूम सुबह से ही उमड़ा हुआ था। सुबह करीब सवा दस बजे जब लोगों को चुनाव टलने के बारे में पता चला तो सबको निराशा हाथ लगी।
डिप्टी स्पीकर ने कहा, टल गया चुनाव
करीब सवा दस बजे डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और विधायक ओमप्रकाश पंचायत भवन के अंदर से बाहर परिसर में आए और उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों से कहा कि एडीसी और चुनाव अधिकारी आरएस वर्मा की अचानक तबीयत खराब होने की वजह से फिलहाल चुनाव टाल दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि उनको इस बारे में सूचना नहीं थी, जबकि अधिकारियों ने शुक्रवार शाम को ही चुनाव रद कर दिए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें यह जानकारी यहां आने के बाद ही लगी है। अब आगे की तिथि की घोषणा जल्द ही कर दी जाएगी।
पहले भी टल चुके हैं चुनाव
फरवरी में हुए पंचायत चुनाव के बाद 24 फरवरी को प्रधान तथा उपप्रधान पद के लिए चुनाव होने की घोषणा हुई थी, मगर उस समय कोई पार्षद चुनावी बैठक में नहीं पहुंचा। जिसके कारण उस समय भी चुनाव टल गए थे। अब दुबारा से शनिवार को चुनाव टाल दिए गए हैं।
अंबाला में भी हुई थी एडीसी की तबीयत खराब
नारनौल में जिला परिषद के प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव सभी 20 पार्षदों के पहुंचने के बाद भी टल गए। चुनाव टलने की मुख्य वजह चुनाव अधिकारी एडीसी आरएस वर्मा की तबीयत खराब होना बताया गया। इससे पूर्व अंबाला में भी एडीसी की तबीयत खराब होने से वहां होने वाले चुनाव एक बार टल गए थे। चुनाव टलने की सूचना मिलते ही पत्रकारों और वहां मौजूद अन्य अधिकारियों सहित पार्षदों और नेताओं ने एडीसी के मोबाइल पर संपर्क साधना चाहा, मगर एडीसी आरएस वर्मा का मोबाइल देर शाम तक स्विच ऑफ था। बताया जा रहा है कि उन्हें किसी अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है।
दोनों की गुटों में दिखा गुस्सा
अचानक चुनाव टलने के कारण दोनों ही गुटों में गुस्सा दिखाई दिया। दोनों ही गुटों के समर्थकों ने पंचायत भवन के बाहर नारेबाजी की तथा इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
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शनिवार को जिला परिषद प्रमुख और उप प्रमुख के लिए चुनाव होने थे। इसके तहत एडीसी आरएस वर्मा ने पंचायत भवन नारनौल में सुबह साढ़े नौ बजे का समय दिया था। इस बारे में सभी 20 पार्षदों को भी सूचित कर दिया गया था। करीब तीन दिन पहले दोबारा से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई थी। इसके बाद से ही जिला प्रमुख और उप प्रमुख बनने के सपने संजोए उम्मीदवारों ने अपने-अपने आकाओं के यहां जाना शुरू कर दिया था। इसके चलते दो-तीन पहले डिप्टी स्पीकर के यहां बैठकों का दौर भी चला। वहीं एक धड़े के 11 पार्षद भी मौजूद थे। दूसरे धड़े के लोग भी अपनी-अपनी जुगत बैठाने में लगे थे। वीरवार को सभी पार्षद भारत भ्रमण के लिए भी गए थे। इसके तहत एक गुट के पार्षद या पार्षद के परिजन राजस्थान घूमने गए थे। वहीं से पूरा राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा था।
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डिप्टी स्पीकर के साथ बस में सवार होकर आए पार्षद
शनिवार को तिथि होने के कारण एक गुट के 13 पार्षद डिप्टी स्पीकर संतोष यादव की महेंद्रगढ़ रोड स्थित कोठी पर सुबह करीब साढ़े आठ बजे एकत्र हुए। वहां पर नारनौल के विधायक भी पहुंचे। वहां से सुबह ठीक सवा नौ बजे के करीब 13 पार्षद डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और विधायक ओमप्रकाश की अगुवाई में एक निजी स्कूल की बस में सवार होकर पंचायत भवन पहुंचे। डिप्टी स्पीकर और विधायक बस में होने के कारण पार्षदों की भरी बस को वहां तैनात पुलिस कर्मचारियों ने सीधे पंचायत भवन के अंदर जाने दिया। जहां से सभी 13 पार्षद उतरकर पंचायत भवन के अंदर गए। इन 13 पार्षदों में प्रधान पद के दावेदार माने जाने वाले वार्ड-14 से राजेश मांदी के अलावा वार्ड -एक से सुशीला, चार से प्रदीप मालड़ा, सात से सतपाल पाथेड़ा, आठ से कुलदीप सुरजनवास, नौ से सुनीता वर्मा, 11 से इंद्रपाल मिर्जापुर, 12 से योगेंद्र दौंगड़ा अहीर, 13 से राजबाला, 16 से सुरेश कुमार, 17 से रामा धौलेड़ा, 18 से सुमन देवी व 19 से कमला दंचोली शामिल हैं।
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बंद था कमरा, बाहर ही हुई मंत्रणा
पार्षदों के साथ-साथ डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और विधायक भी उतरकर पंचायत भवन के अंदर पहुंचे। अंदर पहुंचने पर डिप्टी स्पीकर ने देखा की जहां पर चुनाव होना है, उस मीटिंग हाल के बाहर ताला लगा हुआ है। इसे देखकर संतोष यादव और विधायक पंचायत भवन के पीछे चले गए। जहां पर उन्होंने अधिकारियों और अन्य से फोन पर करीब आधे घंटे तक मंत्रणा की।
दूसरे गुट में आए सात पार्षद
दूसरे गुट में सात पार्षद तीन गाड़ियों में सवार होकर आए। उनकी गाड़ियों को पंचायत भवन के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इस पर उन्होंने वहां पर थोड़ी देर हंगामा भी किया। बाद में वे सभी पैदल उतरकर अंदर आ गए। उनका आरोप था कि पहले प्राइवेट बस को तो अंदर जाने दिया, अब उन्हें पुलिसकर्मी अंदर नहीं जाने दे रहे। इन सात पार्षदों में वार्ड नंबर दो से राकेश बुडिन उर्फ गौतम, तीन नंबर से रितु खुड़ाना, पांच नंबर से राजेश देवी, छह नंबर से अजय सेहलंग, दस नंबर से अश्वनी कुमार, 15 नंबर से आरती देवी और 20 नंबर वार्ड से विनोद भील शामिल हैं।
पंचायत भवन के अंदर खड़े रहे पार्षद
पंचायत भवन का मीटिंग हाल बंद होने के कारण पार्षद भी दो-तीन टोल बनाकर पंचायत भवन के अंदर ही खड़े रहे। इसमें महिला पार्षदों का अलग टोल और पुरुष पार्षदों के अलग-अलग टोल थे।
सैकड़ों पुलिसकर्मियों की लगाई थी ड्यूटी
जिला परिषद के प्रधान और उपप्रधान के चुनाव के चलते उपपुलिस अधीक्षक महेश कुमार की अगुवाई में सैकड़ों पुलिसकर्मियों की ड्यूटी पंचायत भवन में सुरक्षा के चलते लगाई गई थी। चुनाव नहीं होने पर पुलिस की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी किसी भी व्यक्ति को पंचायत भवन के अंदर प्रवेश नहीं करने दे रहे थे।
पंचायत भवन के बाहर था लोगों का हुजूम
पंचायत भवन में होने वाले जिला परिषद प्रमुख और उप प्रमुख पद के चुनाव के नतीजों को जानने के लिए पंचायत भवन के पास लोगों का हुजूम सुबह से ही उमड़ा हुआ था। सुबह करीब सवा दस बजे जब लोगों को चुनाव टलने के बारे में पता चला तो सबको निराशा हाथ लगी।
डिप्टी स्पीकर ने कहा, टल गया चुनाव
करीब सवा दस बजे डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और विधायक ओमप्रकाश पंचायत भवन के अंदर से बाहर परिसर में आए और उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों से कहा कि एडीसी और चुनाव अधिकारी आरएस वर्मा की अचानक तबीयत खराब होने की वजह से फिलहाल चुनाव टाल दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि उनको इस बारे में सूचना नहीं थी, जबकि अधिकारियों ने शुक्रवार शाम को ही चुनाव रद कर दिए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें यह जानकारी यहां आने के बाद ही लगी है। अब आगे की तिथि की घोषणा जल्द ही कर दी जाएगी।
पहले भी टल चुके हैं चुनाव
फरवरी में हुए पंचायत चुनाव के बाद 24 फरवरी को प्रधान तथा उपप्रधान पद के लिए चुनाव होने की घोषणा हुई थी, मगर उस समय कोई पार्षद चुनावी बैठक में नहीं पहुंचा। जिसके कारण उस समय भी चुनाव टल गए थे। अब दुबारा से शनिवार को चुनाव टाल दिए गए हैं।
अंबाला में भी हुई थी एडीसी की तबीयत खराब
नारनौल में जिला परिषद के प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव सभी 20 पार्षदों के पहुंचने के बाद भी टल गए। चुनाव टलने की मुख्य वजह चुनाव अधिकारी एडीसी आरएस वर्मा की तबीयत खराब होना बताया गया। इससे पूर्व अंबाला में भी एडीसी की तबीयत खराब होने से वहां होने वाले चुनाव एक बार टल गए थे। चुनाव टलने की सूचना मिलते ही पत्रकारों और वहां मौजूद अन्य अधिकारियों सहित पार्षदों और नेताओं ने एडीसी के मोबाइल पर संपर्क साधना चाहा, मगर एडीसी आरएस वर्मा का मोबाइल देर शाम तक स्विच ऑफ था। बताया जा रहा है कि उन्हें किसी अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है।
दोनों की गुटों में दिखा गुस्सा
अचानक चुनाव टलने के कारण दोनों ही गुटों में गुस्सा दिखाई दिया। दोनों ही गुटों के समर्थकों ने पंचायत भवन के बाहर नारेबाजी की तथा इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया।