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शिक्षा में बदलावों से भारत दोबारा बनेगा विश्व गुरु : राज्यपाल आर्य

Fri, 19 Jul 2019 11:03 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jul 2019 11:03 PM IST
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राज्यपाल एसएन आर्य ने कहा कि भारत को दोबारा से विश्व गुरू बनाने के लिए हमें शिक्षा पद्घति में बदलाव करना होगा। रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को लागू करना होगा। विश्वविद्यालयों की कार्य प्रणाली में बदलाव लाना होगा। समय की जरूरत के अनुसार डिजिटल संसाधनों को अपनाएं। युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। सूचना तकनीक, ऑनलाइन सुविधाओं, कौशल विकास व अनुसंधान पर फोकस करना होगा।
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राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य शुक्रवार को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए संसाधनों, सर्वोत्तम कार्यपद्धतियों की साझेदारी विषय पर आयोजित द्वितीय वार्षिक परिसम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत विश्व गुरु था। उस समय विद्यार्थी को उसकी रुचि के अनुसार शास्त्रों पर आधारित शिक्षा दी जाती थी। गुलामी के समय अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को खत्म कर लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति शुरू की। जिसमें भारतीयों को केवल क्लर्क बनाने तक की शिक्षा थी। दोबारा से विश्व गुरू बनने के लिए हमें शिक्षा में बदलाव के क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे। रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने होंगे। विश्वविद्यालयों को अपनी कार्य संस्कृति में बदलाव करना होगा। परीक्षा प्रणाली में भी सुधार करने की जरूरत है। परीक्षा और परिणाम का शेड्यूल पहले से तय होना चाहिए। पूर्व छात्रों की मदद से संसाधन जुटाने का प्रयास करें। उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को तैयार करें।
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उन्होंने कहा कि आज डिजिटल युग है। हमें युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। राज्यपाल ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के स्लोगन पर काम करें। हरियाणा की बेटियां हर क्षेत्र में शानदार उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। प्रदेश के शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा जो शिक्षक सीखना बंद देता है। वह अच्छी शिक्षा नहीं दे पाएगा। अच्छी टीचिंग के लिए लगातार लर्निंग की जरूरत है। विश्वविद्यालयों को रिसर्च के क्षेत्र में अधिक काम करने की जरूरत है। हर कुलपति किसी न किसी विषय का एक्सपर्ट होता है। कुलपति को 15 दिन में कम से कम एक क्लास जरूर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा भारत दोबारा से विश्व गुरु बनने की राह पर है। हमें अपने इतिहास पर रिसर्च जरूर करना चाहिए।
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इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव विजय दहिया, एचएयू के कुलपति डॉ. केपी सिंह, सीडीएलयू के कुलपति प्रोफेसर विजय कायत, महर्षि वाल्मीकि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. श्रेयांस द्विवेदी, हकेंविवि कुलसचिव डॉ. रामदत्त, चौधरी रणवीर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरबी सोलंकी, एनआरसी एक्वाइन के निदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी सहित अन्य मौजूद रहे।

विवि जल्द बनाएगा पोर्टल : कुहाड़
हकेंविवि कुलपति आरसी कुहाड़ ने कहा कि हकेंविवि जल्द ही पोर्टल बनाएगा, जिसमें सभी यूनिवर्सिटी सहित अन्य शिक्षण संस्थान अपने संसाधनों का ब्योरा दर्ज करा सकेंगे। मूक कोर्स तैयार करने के लिए यूनिवर्सिटी अपने संसाधन निशुल्क तौर पर उपलब्ध कराने को तैयार है। उन्होंने कहा कि संसाधनों को साझा करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर काम शुरू हो चुका है। प्रदेश स्तर पर भी यह काम होना चाहिए। जिसके लिए हकेंविवि पहल करने को तैयार है।
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