{"_id":"6a34380a52cabbf39b065f10","slug":"demand-for-job-security-for-teachers-appointed-before-2010-intensifies-narnol-news-c-203-1-sroh1011-127476-2026-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की मांग तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की मांग तेज
विज्ञापन
फोटो संख्या:55 एसडीएम को ज्ञापन देते शिक्षक महासंघ पदाधिकारी व सदस्य। विज्ञप्ति
महेंद्रगढ़। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) के जिला पदाधिकारियों और शिक्षकों ने गुरुवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम दिया गया। इसमें 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों की रक्षा की मांग की गई है।
महासंघ ने बताया कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को न्यूनतम योग्यता के रूप में लागू किया था। इससे पहले देश में लाखों शिक्षक उस समय के नियमों के अनुसार वैध रूप से नियुक्त हुए थे। जिला अध्यक्ष राजेश शर्मा झाड़ली और महासचिव दीपक कुमार शर्मा ने कहा कि 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद इन शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ज्ञापन में मांग की गई कि 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट दी जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य लाभ सुरक्षित रखे जाएं। जरूरत पड़ने पर संसद में कानून संशोधन किया जाए और सभी राज्यों को स्पष्ट निर्देश जारी हों।
विज्ञापन
विज्ञापन
महासंघ ने बताया कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को न्यूनतम योग्यता के रूप में लागू किया था। इससे पहले देश में लाखों शिक्षक उस समय के नियमों के अनुसार वैध रूप से नियुक्त हुए थे। जिला अध्यक्ष राजेश शर्मा झाड़ली और महासचिव दीपक कुमार शर्मा ने कहा कि 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद इन शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विज्ञापन
ज्ञापन में मांग की गई कि 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट दी जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य लाभ सुरक्षित रखे जाएं। जरूरत पड़ने पर संसद में कानून संशोधन किया जाए और सभी राज्यों को स्पष्ट निर्देश जारी हों।
विज्ञापन