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Mahendragarh-Narnaul News: शीतला माता की जात लगवाने के लिए मेले में उमड़ी लोगों की भीड़
Tue, 02 Apr 2024 12:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 02 Apr 2024 12:33 AM IST
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नारनौल। क्षेत्र में सोमवार को बासोड़ा पर्व बड़ी धूमधाम व आस्था के साथ मनाया गया। बासोड़ा पर्व को लेकर समीपवर्ती गांव नूनी शेखपुरा में विशाल मेले का आयोजन किया गया। मेले में शीतला माता की जात लगवाने को लेकर लोगों की भारी भीड़ रही।
मेले से पूर्व रविवार रात को माता के मंदिर में एक हवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें नगर परिषद की चेयरपर्सन कमलेश सैनी ने परिवार सहित भाग लेकर हवन में आहुति डाली। यह बासोड़ा का मेला होली के बाद आने वाले पहले सोमवार को लगता है। मेले में बच्चों को शीतला माता की जात लगवाने के लिए लोगों की भीड़ रात एक बजे बाद से शुरू हो गई थी। दोपहर बाद तक भी जारी रही। मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। जिनको माता के दर्शनों के लिए घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। मेले में शीतला माता की जात लगवाने को लेकर लोगों में मान्यता है कि इससे बच्चों होने वाले अनेक प्रकार के रोग भी नहीं होते और बच्चा हमेशा स्वस्थ रहता है। इस मेले को लेकर सभी घरों में रविवार रात को ही भोजन तैयार कर लिया जाता है। जिसमें लोग पूरी, सब्जी, गुलगुले और राबड़ी व मीठे चावल बनाते हैं। इसी का सुबह शीतला माता को भोग लगाकर खाया जाता है।
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मेले से पूर्व रविवार रात को माता के मंदिर में एक हवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें नगर परिषद की चेयरपर्सन कमलेश सैनी ने परिवार सहित भाग लेकर हवन में आहुति डाली। यह बासोड़ा का मेला होली के बाद आने वाले पहले सोमवार को लगता है। मेले में बच्चों को शीतला माता की जात लगवाने के लिए लोगों की भीड़ रात एक बजे बाद से शुरू हो गई थी। दोपहर बाद तक भी जारी रही। मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। जिनको माता के दर्शनों के लिए घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। मेले में शीतला माता की जात लगवाने को लेकर लोगों में मान्यता है कि इससे बच्चों होने वाले अनेक प्रकार के रोग भी नहीं होते और बच्चा हमेशा स्वस्थ रहता है। इस मेले को लेकर सभी घरों में रविवार रात को ही भोजन तैयार कर लिया जाता है। जिसमें लोग पूरी, सब्जी, गुलगुले और राबड़ी व मीठे चावल बनाते हैं। इसी का सुबह शीतला माता को भोग लगाकर खाया जाता है।
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