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Mahendragarh-Narnaul News: गढ़ी-महासर माता मंदिर के मेले में श्रद्धालु का लगा तांता

Thu, 10 Oct 2024 12:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 10 Oct 2024 12:51 AM IST
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Crowd of devotees gathered in the fair of Garhi-Mahasar Mata Temple
फोटो नंबर-03अटेली के गांव महासर मंदिर में दर्शन करते श्रद्धालु। संवाद
मंडी अटेली। अटेली-कनीना सड़क मार्ग पर स्थित गांव गढ़ी-महासर के प्राचीन माता मंदिर परिसर में नवरात्र पर शुरू हुए मेले में श्रद्धालु व भक्तों का तांता लगा हुआ है।
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माता के दरबार पर भक्तों ने आकर अपनी मन्नत मांग कर विधि विधान से पूजा अर्चना की। माता मंदिर में शतचंडी हवन यज्ञ शुरू किया गया है। माता के दरबार में जात-जडुले ज्यादा उतारे जाते हैं। यह नवमी तक सिलसिला जारी रहता है। इस स्थान के बारे में किंवदंती है कि दुर्गा माता मंदिर में पांडवों ने अपना खोया हुआ वैभव पाने के लिए द्वारिकाधीश के आदेश पर पूजा अर्चना की थी। माता के स्थान नवमी पर 11 अक्तूबर को भक्तगण अराधना करेंगे। मंदिर के पुजारी परिवार से संजय शास्त्री व सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि साढ़े पांच हजार वर्ष पहले लाक्ष्य गृह में पांडवों को जलाने पर विदुर नीति से पांडव बाहर निकले थे।
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जानकारों के अनुसार पांडवों ने सबसे पहले वैष्णो देवी व महेश्वरी पीठ का दर्शन किया था। उसके बाद पांडवों ने महासर माता के दर्शन किये थे। चैत्र मास की शुक्ल पंचमी को माता पिंडी के विशेष दर्शन होने पर सप्तमी पर भव्य मेला भरता है। मेले परिसर में क्षेत्र में अमन शांति के लिए शतचंडी का पाठ करवा रहे हैं। शतचंडी का पाठ संजय शास्त्री, प्रवीन शास्त्री व लालचंद शर्मा करवा रहे हैं। मंदिर में 20 वर्षो से अपनी सेवा देने वाले लक्ष्मण दल के सेवक राकेश अग्रवाल ने बताया कि मेले में सप्तमी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। संजय शास्त्री ने बताया कि दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है। दुर्गा माता को प्रसन्न करने के लिए हवन यज्ञ को विधि विधान से पूर्ण किया जाता है। उसे शतचंडी यज्ञ बोला जाता है। नवचंडी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है। इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहों की स्थिति को सही किया जा सकता है और सौभाग्य इस विधि के बाद आपका साथ देने लगता है। मंदिर में किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए 70 से अधिक कमरों वाली धर्मशाला बनाई गई है।
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गढ़ी महासर माता के लिए स्पेशल बस सेवा शुरू

गढ़ी महासर माता का स्थान अटेली व कनीना के बीच में पड़ता है। माता के दर्शन करने वाले भक्तोंं को किसी प्रकार का कष्ट न हो इसके लिए रेलवे ने रेवाड़ी-लोहारू रेल मार्ग के साथ रेवाड़ी-रींगस रेल मार्ग से गुजरने वाली सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव निश्चित कर दिया है। हरियाणा रोडवेज ने भी अटेली कनीना मार्ग पर स्थित महासर स्थान पर मेला स्पेशल बसों की व्यवस्था की है।
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