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Mahendragarh-Narnaul News: डाकघर की गलती पर कोर्ट का सख्त रुख, भुगतान में देरी पर ब्याज देने का आदेश
Tue, 07 Jul 2026 11:29 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 07 Jul 2026 11:29 PM IST
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नारनौल। डाक घर की ओर से जारी आरडी का 1,11,977 रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में ट्रायल कोर्ट के अतिरिक्त सिविल जज के मुकदमा दायर करने की तारीख से ब्याज सहित पैसा वापस करने के फैसले को जिला न्यायाधीश रितु वाईके बहल ने रद्द कर दिया है। उन्होंने पीड़ित मुकुल गोयल को खाता परिपक्व होने की तारीख से ब्याज सहित पैसा चुकाने का आदेश दिया है।
महेंद्रगढ़ निवासी मुकुल गोयल का मुख्य डाकघर में 5 वर्षीय आवर्ती जमा खाता था जो 20 अप्रैल 2020 को परिपक्व हुआ था। डाकघर के अधिकारियों ने उन्हें 1,11,977 रुपये का एक चेक जारी किया, लेकिन उस पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके चलते चेक बाउंस हो गया।
वादी ने कानूनी नोटिस भेजा और ट्रायल कोर्ट में रिकवरी का मुकदमा दायर किया। 24 दिसंबर 2024 को अतिरिक्त सिविल जज ने वादी के पक्ष में डाक विभाग को आदेश दिया कि 1,11,977 रुपये की राशि मुकदमा दायर करने की तिथि 1 जुलाई 2023 से लेकर वास्तविक भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाए।
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वादी ने इस अपील को केवल ब्याज की अवधि को लेकर चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि ब्याज मुकदमा दायर करने की तारीख से मिलने के बजाय, खाता परिपक्व होने की तारीख 20 अप्रैल 2020 से मिलना चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि गलती डाकघर की थी और वादी अपने पैसे के लिए कानूनी नोटिस और विभागों में चक्कर काट रहा था। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी ठोस कारण के परिपक्वता की तारीख से ब्याज देने से इनकार किया था।
अदालत ने निचली अदालत के फैसले में संशोधन करते हुए मूल राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज खाता परिपक्व होने की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक देने का फैसला सुनाया।
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महेंद्रगढ़ निवासी मुकुल गोयल का मुख्य डाकघर में 5 वर्षीय आवर्ती जमा खाता था जो 20 अप्रैल 2020 को परिपक्व हुआ था। डाकघर के अधिकारियों ने उन्हें 1,11,977 रुपये का एक चेक जारी किया, लेकिन उस पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके चलते चेक बाउंस हो गया।
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वादी ने कानूनी नोटिस भेजा और ट्रायल कोर्ट में रिकवरी का मुकदमा दायर किया। 24 दिसंबर 2024 को अतिरिक्त सिविल जज ने वादी के पक्ष में डाक विभाग को आदेश दिया कि 1,11,977 रुपये की राशि मुकदमा दायर करने की तिथि 1 जुलाई 2023 से लेकर वास्तविक भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाए।
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वादी ने इस अपील को केवल ब्याज की अवधि को लेकर चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि ब्याज मुकदमा दायर करने की तारीख से मिलने के बजाय, खाता परिपक्व होने की तारीख 20 अप्रैल 2020 से मिलना चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि गलती डाकघर की थी और वादी अपने पैसे के लिए कानूनी नोटिस और विभागों में चक्कर काट रहा था। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी ठोस कारण के परिपक्वता की तारीख से ब्याज देने से इनकार किया था।
अदालत ने निचली अदालत के फैसले में संशोधन करते हुए मूल राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज खाता परिपक्व होने की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक देने का फैसला सुनाया।