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Mahendragarh-Narnaul News: बिजली कानून के विरोध में रोहतक में सम्मेलन आज
Tue, 21 Nov 2023 12:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 21 Nov 2023 12:15 AM IST
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नारनौल। बिजली उपभोक्ता मंच हरियाणा संबंधित ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर एसोसिएशन के तत्वावधान में जन विरोधी बिजली कानून-2003 और बिजली बिल-2022 को रद्द कराने और स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने को लेकर हुड्डा पार्क रोहतक में मंगलवार को राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
मजदूर नेता सीताराम ने बताया कि बिजली एक जन उपयोगी सेवा है। मौजूदा समय में बिजली के बिना आधुनिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आमदनी का स्तर जो भी हो, अमीर-गरीब बिजली लोगों का मौलिक अधिकार बन चुका है, जिसे केंद्र व राज्य की सरकार छिनने पर आमादा है। केंद्र व राज्य की सरकार आम आदमी के हितों पर कुठाराघात करते हुए बिजली का निजीकरण बड़ी तेजी से कर रही है। नतीजतन बिजली गरीबों की पहुंच से बाहर व किसानों के लिए सिंचाई महंगी हो जाएगी। आजादी के बाद लाभ- हानि के मकसद से हटकर बिजली आपूर्ति कानून 1948 के तहत बिजली को जन सेवा बनाया गया था, लेकिन भूमंडलीकरण, निजीकरण की नीतियों के चलते जनता के धन पर बने बिजली के देशव्यापी ग्रिड-नेटवर्क को देशी-विदेशी प्राइवेट कंपनियों के कंट्रोल में लाया जाने लगा है।बिजली कानून-2003 पूंजीपतियों के हित साधने के लिए बनाया गया था। बिजली कानून -2003 आम उपभोक्ताओं के लिए अभिशाप बन गया है।
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मजदूर नेता सीताराम ने बताया कि बिजली एक जन उपयोगी सेवा है। मौजूदा समय में बिजली के बिना आधुनिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आमदनी का स्तर जो भी हो, अमीर-गरीब बिजली लोगों का मौलिक अधिकार बन चुका है, जिसे केंद्र व राज्य की सरकार छिनने पर आमादा है। केंद्र व राज्य की सरकार आम आदमी के हितों पर कुठाराघात करते हुए बिजली का निजीकरण बड़ी तेजी से कर रही है। नतीजतन बिजली गरीबों की पहुंच से बाहर व किसानों के लिए सिंचाई महंगी हो जाएगी। आजादी के बाद लाभ- हानि के मकसद से हटकर बिजली आपूर्ति कानून 1948 के तहत बिजली को जन सेवा बनाया गया था, लेकिन भूमंडलीकरण, निजीकरण की नीतियों के चलते जनता के धन पर बने बिजली के देशव्यापी ग्रिड-नेटवर्क को देशी-विदेशी प्राइवेट कंपनियों के कंट्रोल में लाया जाने लगा है।बिजली कानून-2003 पूंजीपतियों के हित साधने के लिए बनाया गया था। बिजली कानून -2003 आम उपभोक्ताओं के लिए अभिशाप बन गया है।
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