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मुख्यमंत्री उड़न दस्ते का दो दुकानों पर छापा, सात नमूने भरे
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फोटो नंबर 16 - गोदाम पर मिठाई बनाते वर्कर।
- फोटो : Narnol
नारनौल। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रेवाड़ी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की संयुक्त टीम ने सिंघाना रोड स्थित पंजाबी महाबीर चौक स्थित श्री बीकानेर मिष्ठान और पंजाबी मिष्ठान भंडार पर वीरवार को छापा मारा। श्री बीकानेर मिष्ठान भंडार के पास फ्रेंचाइज का कोई दस्तावेज नहीं मिला जबकि श्री बीकानेर मिष्ठान भंडार के नाम से दुकान चल रही थी। टीम ने कॉपी राइट एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। टीम ने दोनों दुकानों से सात नमूने भरे जिन्हें जांच के लिए मधुबन लैब करनाल भेजा जाएगा।
त्योहारी सीजन में मिलावटी मिठाइयां बनाकर बेचने और खोवा भंडारण करने की शिकायतें आ रही थीं। इसको गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम ने महावीर चौक स्थित बीकानेर मिष्ठान भंडार और पंजाबी मिष्ठान भंडार पर दोपहर बाद छापा मारा। बीकानेर मिष्ठान भंडार के जमालपुर स्थित गोडाउन पर छापे के दौरान मिठाइयों के चार नमूने लिए गए। दुकानदार फ्रेंचाइज नहीं दिखा सका। विब्रे इंडिया डिटेक्टिव प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के जांच अधिकारी मुकेश माला ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि महाबीर चौक पर 10 -15 साल से श्री बीकानेर मिष्ठान भंडार नाम से दुकान चलाई जा रही है। श्री शब्द बहुत छोटा लिखा हुआ था और बीकानेर बड़ा लिखा हुआ था। दुकानदार के पास बीकानेर का ट्रेडमार्क एवं कॉपी राइट का कोई लाइसेंस नहीं मिला। पुलिस ने कॉपीराइट एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
इसके अलावा टीम ने पंजाबी मिष्ठान भंडार पर भी छापा मारा और तीन नमूने लिए। इस टीम में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के निरीक्षक सुबे सिंह, उप निरीक्षक सत्येंद्र , खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी दीपक चौधरी, सहायक उप निरीक्षक कर्मपाल, खुफिया विभाग की तरफ से उप निरीक्षक भीम सिंह रहे।
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काउंटर पर लगी मिठाइयों पर लगानी होती है तारीख:
कांउटर में लगी खुली मिठाई के बनाने और एक्सपायरी होने की तारीख लिखनी होगी। जिस दिन मिठाइ बनी उस दिन की तथा एक्सपायरी डेट लिखनी होती है। अगर कोई हलवाई या दुकानदार ऐसा नहीं करता है तो खाद्य सरंक्षा विभाग के अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
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बाक्स:
सैंपल फेल होने पर है पांच लाख रुपये तक का जुर्माना:
विभाग दो प्रकार के सैंपल चेक करता है। एक तो जो मिठाइयां खाने योग्य नहीं हो तथा दूसरा मिलावटी खाद्य पदार्थों का। खराब मिठाइयां जो खाने योग्य नहीं हो उसका केस सीजीएम कोर्ट में डाला जाता है। उसमें सजा तथा जुुर्माना दोनों का प्रावधान है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के बेचे जाने पर एडीसी कोर्ट में केस डाला जाता है। जिसमें पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। टीम ने बताया कि जनवरी से अब तक 80 नमूने लिए गए जिसमें 16 में अनियमितता पाई गई और कोर्ट में केस डाला गया है। 18 नमूने का स्तरठीक नहीं मिला। आठ दस रिपोर्ट पेंडिंग हैं जो जल्द आ जाएगी।
उल्लेखनीय है कि छापा के बाद जो नमूने जांच के लिए लैब में भेजे जाते हैं उसकी रिपोर्ट पंद्रह दिन बाद आती है। नमूना फेल होने पर कोर्ट केस किया जाता है।
मिलावटी मिठाई सेहत के लिए खतरनाक
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. मनीष यादव ने बताया कि त्योहारों के सीजन में मावे और मावे से बनी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार में नकली मावा तथा उससे बनी मिठाइयां बिकती हैं जो सेहत के लिए खतरनाक होती हैं। नकली मावे की मिठाइयां खाने से फूड पाइजनिंग उल्टी, दस्त आदि की समस्या होती है।
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त्योहारी सीजन में मिलावटी मिठाइयां बनाकर बेचने और खोवा भंडारण करने की शिकायतें आ रही थीं। इसको गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम ने महावीर चौक स्थित बीकानेर मिष्ठान भंडार और पंजाबी मिष्ठान भंडार पर दोपहर बाद छापा मारा। बीकानेर मिष्ठान भंडार के जमालपुर स्थित गोडाउन पर छापे के दौरान मिठाइयों के चार नमूने लिए गए। दुकानदार फ्रेंचाइज नहीं दिखा सका। विब्रे इंडिया डिटेक्टिव प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के जांच अधिकारी मुकेश माला ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि महाबीर चौक पर 10 -15 साल से श्री बीकानेर मिष्ठान भंडार नाम से दुकान चलाई जा रही है। श्री शब्द बहुत छोटा लिखा हुआ था और बीकानेर बड़ा लिखा हुआ था। दुकानदार के पास बीकानेर का ट्रेडमार्क एवं कॉपी राइट का कोई लाइसेंस नहीं मिला। पुलिस ने कॉपीराइट एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
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इसके अलावा टीम ने पंजाबी मिष्ठान भंडार पर भी छापा मारा और तीन नमूने लिए। इस टीम में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के निरीक्षक सुबे सिंह, उप निरीक्षक सत्येंद्र , खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी दीपक चौधरी, सहायक उप निरीक्षक कर्मपाल, खुफिया विभाग की तरफ से उप निरीक्षक भीम सिंह रहे।
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काउंटर पर लगी मिठाइयों पर लगानी होती है तारीख:
कांउटर में लगी खुली मिठाई के बनाने और एक्सपायरी होने की तारीख लिखनी होगी। जिस दिन मिठाइ बनी उस दिन की तथा एक्सपायरी डेट लिखनी होती है। अगर कोई हलवाई या दुकानदार ऐसा नहीं करता है तो खाद्य सरंक्षा विभाग के अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
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सैंपल फेल होने पर है पांच लाख रुपये तक का जुर्माना:
विभाग दो प्रकार के सैंपल चेक करता है। एक तो जो मिठाइयां खाने योग्य नहीं हो तथा दूसरा मिलावटी खाद्य पदार्थों का। खराब मिठाइयां जो खाने योग्य नहीं हो उसका केस सीजीएम कोर्ट में डाला जाता है। उसमें सजा तथा जुुर्माना दोनों का प्रावधान है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के बेचे जाने पर एडीसी कोर्ट में केस डाला जाता है। जिसमें पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। टीम ने बताया कि जनवरी से अब तक 80 नमूने लिए गए जिसमें 16 में अनियमितता पाई गई और कोर्ट में केस डाला गया है। 18 नमूने का स्तरठीक नहीं मिला। आठ दस रिपोर्ट पेंडिंग हैं जो जल्द आ जाएगी।
उल्लेखनीय है कि छापा के बाद जो नमूने जांच के लिए लैब में भेजे जाते हैं उसकी रिपोर्ट पंद्रह दिन बाद आती है। नमूना फेल होने पर कोर्ट केस किया जाता है।
मिलावटी मिठाई सेहत के लिए खतरनाक
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. मनीष यादव ने बताया कि त्योहारों के सीजन में मावे और मावे से बनी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार में नकली मावा तथा उससे बनी मिठाइयां बिकती हैं जो सेहत के लिए खतरनाक होती हैं। नकली मावे की मिठाइयां खाने से फूड पाइजनिंग उल्टी, दस्त आदि की समस्या होती है।