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Mahendragarh-Narnaul News: इमारतें हुईं खंडहर, दी-कोऑपरेटिव सहकारिता की 6 शाखा बंद
Sat, 02 Mar 2024 11:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 02 Mar 2024 11:27 PM IST
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मंडी अटेली। दी-कोऑपरेटिव सहकारिता की ग्रामीण क्षेत्रों में बनी इमारतें खंडहर में तब्दील हो जाने के कारण सभी शाखाएं बंद हो चुकी है। जिसके चलते ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अटेली कस्बे में स्थापित दी- कोऑपरेटिव सहकारिता बैंक के अंतर्गत 40 गांव लगते हैं। इन गांवों के नागरिकों को बैंक सुविधा देने के लिए खेड़ी, कांटी, गणियार, गुजरवास तुर्कीयावास, राता व सैदपुर में बैंक शाखाओं को स्थापित किया गया था। जिनकी इमारतों का निर्माण 1980 के दशक में किया गया था, लेकिन सभी इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी। अटेली कस्बे में स्थापित बैंक किराए के भवन में चल रहा है। गांवों में स्थापित शाखाएं बंद होने के कारण उपभोक्ताओं को अटेली बैंक में लेन देन के लिए आना जाना पड़ता है। जिसके कारण उपभोक्ताओं काे अधिक समय व आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जिसकी वजह से किसानों को खाद, बीज के लिए भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि गांव राता कला में स्थापित पैक्स में ही गोदाम बना हुआ है, जो खेड़ी गांव से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित है। इतनी दूरी का सफर तय करने में किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग कि है की गांवों में स्थापित शाखाओं को दोबारा चालू की जाए ताकि उपभोक्ताओं को गांव में ही सुविधा उपलब्ध हो सके।
अटेली में कोऑपरेटिव सहकारिता के अंतर्गत 40 गांव लगते हैं, जिनको सुविधाएं देने के लिए 7 बैंक शाखाओं को स्थापित किया गया था, लेकिन इमारतें खंडहर होने के कारण 6 शाखाएं बंद हो चुकी है। मात्र राता कला की शाखा चल रही है। बीज, खाद का गोदाम भी राता कला में ही बनाया हुआ है। किसानों को वही से खाद बीज वितरण किया जाता है। किसानों की परेशानी को देखते हुए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। अब जल्द ही ग्रामीण शाखाओं को चालू कराने का प्रयास किया जाएगा।
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विजय कुमार, पैक्स इंचार्ज मंडी अटेली।
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अटेली कस्बे में स्थापित दी- कोऑपरेटिव सहकारिता बैंक के अंतर्गत 40 गांव लगते हैं। इन गांवों के नागरिकों को बैंक सुविधा देने के लिए खेड़ी, कांटी, गणियार, गुजरवास तुर्कीयावास, राता व सैदपुर में बैंक शाखाओं को स्थापित किया गया था। जिनकी इमारतों का निर्माण 1980 के दशक में किया गया था, लेकिन सभी इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी। अटेली कस्बे में स्थापित बैंक किराए के भवन में चल रहा है। गांवों में स्थापित शाखाएं बंद होने के कारण उपभोक्ताओं को अटेली बैंक में लेन देन के लिए आना जाना पड़ता है। जिसके कारण उपभोक्ताओं काे अधिक समय व आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जिसकी वजह से किसानों को खाद, बीज के लिए भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि गांव राता कला में स्थापित पैक्स में ही गोदाम बना हुआ है, जो खेड़ी गांव से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित है। इतनी दूरी का सफर तय करने में किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग कि है की गांवों में स्थापित शाखाओं को दोबारा चालू की जाए ताकि उपभोक्ताओं को गांव में ही सुविधा उपलब्ध हो सके।
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अटेली में कोऑपरेटिव सहकारिता के अंतर्गत 40 गांव लगते हैं, जिनको सुविधाएं देने के लिए 7 बैंक शाखाओं को स्थापित किया गया था, लेकिन इमारतें खंडहर होने के कारण 6 शाखाएं बंद हो चुकी है। मात्र राता कला की शाखा चल रही है। बीज, खाद का गोदाम भी राता कला में ही बनाया हुआ है। किसानों को वही से खाद बीज वितरण किया जाता है। किसानों की परेशानी को देखते हुए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। अब जल्द ही ग्रामीण शाखाओं को चालू कराने का प्रयास किया जाएगा।
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विजय कुमार, पैक्स इंचार्ज मंडी अटेली।