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Mahendragarh-Narnaul News: अपमिश्रित आहार से शरीर पर पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव
Sat, 21 Sep 2024 01:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 21 Sep 2024 01:14 AM IST
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फोटो नंबर-01पीजी कॉलेज में व्याख्यान देते डा. पवन कुमार शर्मा। स्त्रोत-संस्थान
नारनौल। राजकीय महाविद्यालय नारनौल में रसायन विभाग के तत्वावधान में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर व्याख्यान का आयोजन प्राचार्या डॉ. पूर्ण प्रभा की अध्यक्षता में किया गया।
मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय चरखी दादरी के प्राचार्य डॉ. पवन कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को खाद्य पदार्थों में मिलावट से शरीर में होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत करवाया। पूर्ण प्रभा ने विद्यार्थियों को बताया कि खाद्य अपमिश्रण से मूल खाद्य पदार्थ और मिलावटी खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है। अपमिश्रित आहार का उपयोग करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और शारीरिक विकार उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है।
खाद्य अपमिश्रण से आखों की रोशनी जाना, हृदय संबंधित रोग, लीवर खराब होना, कुष्ठ रोग, आहार तंत्र के रोग, पक्षाघात व कैंसर जैसे रोग हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि दैनिक उपभोग वाले खाद्य पदार्थ जैसे दूध, छाछ, शहद, मसाले, घी, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, खोया व आटा आदि में मिलावट की जा सकती है। उन्होंने सभी स्टाफ सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि महाविद्यालय के रसायन विभाग का समस्त स्टाफ लगातार पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों में इनोवेटिव और वैज्ञानिक सोच पैदा कर रहा है। उन्होंने सभी छात्र छात्राओं को इस तरह की गतिविधियों में बढ चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने यह भी बताया कि इंटर डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट्री ओलंपियाड 24 सितंबर को महाविद्यालय में होना सुनिश्चित हुआ है और इसमें जिले व अन्य सभी जिलों की टीमें इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकती हैं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त रसायन शास्त्र स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय चरखी दादरी के प्राचार्य डॉ. पवन कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को खाद्य पदार्थों में मिलावट से शरीर में होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत करवाया। पूर्ण प्रभा ने विद्यार्थियों को बताया कि खाद्य अपमिश्रण से मूल खाद्य पदार्थ और मिलावटी खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है। अपमिश्रित आहार का उपयोग करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और शारीरिक विकार उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है।
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खाद्य अपमिश्रण से आखों की रोशनी जाना, हृदय संबंधित रोग, लीवर खराब होना, कुष्ठ रोग, आहार तंत्र के रोग, पक्षाघात व कैंसर जैसे रोग हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि दैनिक उपभोग वाले खाद्य पदार्थ जैसे दूध, छाछ, शहद, मसाले, घी, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, खोया व आटा आदि में मिलावट की जा सकती है। उन्होंने सभी स्टाफ सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि महाविद्यालय के रसायन विभाग का समस्त स्टाफ लगातार पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों में इनोवेटिव और वैज्ञानिक सोच पैदा कर रहा है। उन्होंने सभी छात्र छात्राओं को इस तरह की गतिविधियों में बढ चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने यह भी बताया कि इंटर डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट्री ओलंपियाड 24 सितंबर को महाविद्यालय में होना सुनिश्चित हुआ है और इसमें जिले व अन्य सभी जिलों की टीमें इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकती हैं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त रसायन शास्त्र स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।