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Mahendragarh-Narnaul News: चोरी के प्रयास के मामले में आरोपी बरी
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रेवाड़ी। शहर थाना पुलिस द्वारा दर्ज चोरी के प्रयास के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल की अदालत ने आरोपी कुराना नयाबास निवासी आरिफ अल्वी को बरी कर दिया।
मामला 2 जनवरी 2022 को दर्ज एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता मदनलाल ने बताया था कि रामगढ़ रोड स्थित उसके गोदाम से 60 प्लेट और 53 जैक चोरी करने का प्रयास किया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान आरोपी आरिफ अल्वी का नाम सामने आया और उसे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके बयान के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 511 जोड़ी और चालान अदालत में पेश किया। अदालत ने 24 अप्रैल को आरोपी के खिलाफ धारा 511 के तहत आरोप तय किए।
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सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता मदनलाल ने अदालत में कहा कि गोदाम की जांच करने पर सभी सामान सुरक्षित मिला था। उसने आरोपी की पहचान करने से भी इनकार किया। जांच अधिकारी ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि पुलिस ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज या मोबाइल टावर की लोकेशन संबंधी कोई रिकॉर्ड हासिल नहीं किया था। आरोपी की मौके पर मौजूदगी का भी कोई साक्ष्य नहीं मिला और उससे कोई बरामदगी नहीं हुई।
अदालत ने कहा कि अभियोजन का मुख्य आधार आरोपी का कथित खुलासा बयान है, लेकिन अकेले खुलासा बयान के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। इस मामले में बयान के आधार पर ऐसी कोई बरामदगी भी नहीं हुई, जिससे आरोप की पुष्टि हो सके।
इन परिस्थितियों में अदालत ने अभियोजन को आरोप साबित करने में विफल मानते हुए आरिफ अल्वी को धारा 511 के आरोप से बरी कर दिया।
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मामला 2 जनवरी 2022 को दर्ज एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता मदनलाल ने बताया था कि रामगढ़ रोड स्थित उसके गोदाम से 60 प्लेट और 53 जैक चोरी करने का प्रयास किया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
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जांच के दौरान आरोपी आरिफ अल्वी का नाम सामने आया और उसे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके बयान के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 511 जोड़ी और चालान अदालत में पेश किया। अदालत ने 24 अप्रैल को आरोपी के खिलाफ धारा 511 के तहत आरोप तय किए।
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सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता मदनलाल ने अदालत में कहा कि गोदाम की जांच करने पर सभी सामान सुरक्षित मिला था। उसने आरोपी की पहचान करने से भी इनकार किया। जांच अधिकारी ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि पुलिस ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज या मोबाइल टावर की लोकेशन संबंधी कोई रिकॉर्ड हासिल नहीं किया था। आरोपी की मौके पर मौजूदगी का भी कोई साक्ष्य नहीं मिला और उससे कोई बरामदगी नहीं हुई।
अदालत ने कहा कि अभियोजन का मुख्य आधार आरोपी का कथित खुलासा बयान है, लेकिन अकेले खुलासा बयान के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। इस मामले में बयान के आधार पर ऐसी कोई बरामदगी भी नहीं हुई, जिससे आरोप की पुष्टि हो सके।
इन परिस्थितियों में अदालत ने अभियोजन को आरोप साबित करने में विफल मानते हुए आरिफ अल्वी को धारा 511 के आरोप से बरी कर दिया।