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Mahendragarh-Narnaul News: लंपी पीड़ित गोवंशों के लिए मौके पर पहुंच रही उपचार शाला की टीम
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फोटो 09 उपचार शाला में चारा खाते गोवंश। संवाद
नारनौल। शहर की प्रसिद्ध गो माता उपचार शाला में इन दिनों लंपी वायरस से पीड़ित छह गोवंशों का इलाज चल रहा है। फिलहाल सभी की हालत स्थिर है। इनमें एक गोवंश रेवाड़ी के बावल क्षेत्र का है जिसका इलाज टीम मौके पर जाकर कर रही है।
बाकी पांच गोवंश स्थानीय जिले के हैं। सभी का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके साथ ही लंपी से प्रभावित गोवंशों की संख्या बढ़कर 122 हो गई है। यह उपचार शाला पिछले 16 वर्षों से बेसहारा पशुओं के लिए बड़ी उम्मीद बनी हुई है।
इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में सिंघाणा रोड पर हुई थी। वर्ष 2014 में इसे स्टेडियम के पास नई जगह मिली जहां से यह लगातार संचालित हो रही है। पहले बीमार और घायल पशुओं को इलाज के लिए झज्जर भेजना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल रहा है।
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संस्था अब तक हजारों बेसहारा पशुओं को नया जीवन दे चुकी है। उपचार शाला में चार डॉक्टरों की टीम तैनात है। इनमें दो स्थायी और दो प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टर शामिल हैं।
दान और सरकारी सहायता से संचालन
उपचार शाला के प्रधान गंगाराम सैनी ने बताया कि यह संस्थान पूरी तरह से दानदाताओं और सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता के बल पर ही चल रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि रास्ते में कोई भी आवारा, बीमार या घायल पशु दिखाई दे, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 8198920920 पर सूचना दें। सूचना मिलते ही उपचार शाला की ओर से तुरंत एम्बुलेंस भेजकर पशु को इलाज के लिए लाया जाएगा। हालांकि लंपी से ग्रस्त गोवंश का उपचार मौके पर ही किया जाएगा, उसे उपचार शाला में नहीं रखा जाएगा।
बॉक्स:
कहां कितने मिले गोवंश व कब किया टीकाकरण
स्थान गोवंश की संख्या कब किया टीकाकरण
गांव कोरियावास 01 11 सितंबर
सैनी धर्म कांटा 01 12 सितंबर
नई सब्जी मंडी 01 24 अगस्त
परानी सब्जी मंडी 01 13 सितंबर
कोरियावास रोड 01 06 सितंबर
बावल, रेवाड़ी 01 05 सितंबर
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बाकी पांच गोवंश स्थानीय जिले के हैं। सभी का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके साथ ही लंपी से प्रभावित गोवंशों की संख्या बढ़कर 122 हो गई है। यह उपचार शाला पिछले 16 वर्षों से बेसहारा पशुओं के लिए बड़ी उम्मीद बनी हुई है।
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इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में सिंघाणा रोड पर हुई थी। वर्ष 2014 में इसे स्टेडियम के पास नई जगह मिली जहां से यह लगातार संचालित हो रही है। पहले बीमार और घायल पशुओं को इलाज के लिए झज्जर भेजना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल रहा है।
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संस्था अब तक हजारों बेसहारा पशुओं को नया जीवन दे चुकी है। उपचार शाला में चार डॉक्टरों की टीम तैनात है। इनमें दो स्थायी और दो प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टर शामिल हैं।
दान और सरकारी सहायता से संचालन
उपचार शाला के प्रधान गंगाराम सैनी ने बताया कि यह संस्थान पूरी तरह से दानदाताओं और सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता के बल पर ही चल रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि रास्ते में कोई भी आवारा, बीमार या घायल पशु दिखाई दे, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 8198920920 पर सूचना दें। सूचना मिलते ही उपचार शाला की ओर से तुरंत एम्बुलेंस भेजकर पशु को इलाज के लिए लाया जाएगा। हालांकि लंपी से ग्रस्त गोवंश का उपचार मौके पर ही किया जाएगा, उसे उपचार शाला में नहीं रखा जाएगा।
बॉक्स:
कहां कितने मिले गोवंश व कब किया टीकाकरण
स्थान गोवंश की संख्या कब किया टीकाकरण
गांव कोरियावास 01 11 सितंबर
सैनी धर्म कांटा 01 12 सितंबर
नई सब्जी मंडी 01 24 अगस्त
परानी सब्जी मंडी 01 13 सितंबर
कोरियावास रोड 01 06 सितंबर
बावल, रेवाड़ी 01 05 सितंबर