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Mahendragarh-Narnaul News: जन्म लेते ही दिल की जंग, हर साल बढ़ रहे हार्ट डिफेक्ट
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नारनौल। नवजातों में जन्म के समय ही हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिले में वर्ष 2024-25 के दौरान 18 और 2025-26 में अब तक 12 नवजातों के दिल में छेद पाए गए हैं। गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना इसका एक प्रमुख कारण हो सकता है।
वहीं, निजी अस्पतालों में इलाज पर लाखों रुपये खर्च होते हैं जो हर परिवार के लिए संभव नहीं। ऐसे जरूरतमंद परिवारों के लिए स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके योजना राहत बनकर सामने आई है जिसके तहत बीते पांच वर्षों में 67 बच्चों का निशुल्क उपचार कराया गया।
जिले में बीते पांच वर्षों में दिल में छेद से पीड़ित 67 बच्चों का उपचार कराया गया जिस पर सरकार की ओर से करीब 69 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है।
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इसके अलावा आंख, ईएनटी और पैरों के टेढ़े मेढ़े होने पर बच्चों के ऑपरेशन करवाए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में पांच साल में आंगनबाड़ी केंद्रों में 0-18 वर्ष के अब तक 3 लाख 10 हजार 514 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है जबकि स्कूलों में 1 लाख 83 हजार 421 विद्यार्थियों की जांच की गई।
नवजात में दिखें ये लक्षण तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले
अक्सर नवजात के दिल में छेद की जानकारी कुछ समय बाद ही सामने आती है। ऐसे बच्चों में दिल की धड़कन सामान्य से तेज हो सकती है। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बच्चे को दूध पीने में परेशानी होती है और वह जल्दी थक जाता है। समय के साथ बच्चे की शारीरिक वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रहती है। इसके अलावा, सांस लेने में तकलीफ या बार-बार हांफने जैसी समस्या भी देखी जा सकती है।
आरबीएसके योजना के तहत जिले में हुए ऑपरेशन
वर्ष दिल के ऑपरेशन खर्च
2021-22 13 1995496
2022-23 16 1765238
2023-24 08 315000
2024-25 18 1856324
2025-26 12 958720
वर्जन
वर्ष 2025-26 में 12 नवजात बच्चों के दिल में छेद मिला था जिनके ऑपरेशन पर करीब 958720 रुपये का खर्च आया है। इसके अलावा ईएनटी की समस्या के पीड़ित बच्चों का उपचार किया गया है।-मीरा यादव, जिला कोऑर्डिनेटर, आरबीएसके
वर्जन:
गर्भवतियों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। इससे बच्चे के दिल में छेद जैसी परेशानी भी हो सकती है। यह समस्या शुगर और थायराइड की वजह से भी हो सकती है। गर्भवती को खानपान को लेकर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। -डॉ. जितेंद्र यादव, फिजिशियन नागरिक अस्पताल
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वहीं, निजी अस्पतालों में इलाज पर लाखों रुपये खर्च होते हैं जो हर परिवार के लिए संभव नहीं। ऐसे जरूरतमंद परिवारों के लिए स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके योजना राहत बनकर सामने आई है जिसके तहत बीते पांच वर्षों में 67 बच्चों का निशुल्क उपचार कराया गया।
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जिले में बीते पांच वर्षों में दिल में छेद से पीड़ित 67 बच्चों का उपचार कराया गया जिस पर सरकार की ओर से करीब 69 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है।
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इसके अलावा आंख, ईएनटी और पैरों के टेढ़े मेढ़े होने पर बच्चों के ऑपरेशन करवाए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में पांच साल में आंगनबाड़ी केंद्रों में 0-18 वर्ष के अब तक 3 लाख 10 हजार 514 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है जबकि स्कूलों में 1 लाख 83 हजार 421 विद्यार्थियों की जांच की गई।
नवजात में दिखें ये लक्षण तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले
अक्सर नवजात के दिल में छेद की जानकारी कुछ समय बाद ही सामने आती है। ऐसे बच्चों में दिल की धड़कन सामान्य से तेज हो सकती है। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बच्चे को दूध पीने में परेशानी होती है और वह जल्दी थक जाता है। समय के साथ बच्चे की शारीरिक वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रहती है। इसके अलावा, सांस लेने में तकलीफ या बार-बार हांफने जैसी समस्या भी देखी जा सकती है।
आरबीएसके योजना के तहत जिले में हुए ऑपरेशन
वर्ष दिल के ऑपरेशन खर्च
2021-22 13 1995496
2022-23 16 1765238
2023-24 08 315000
2024-25 18 1856324
2025-26 12 958720
वर्जन
वर्ष 2025-26 में 12 नवजात बच्चों के दिल में छेद मिला था जिनके ऑपरेशन पर करीब 958720 रुपये का खर्च आया है। इसके अलावा ईएनटी की समस्या के पीड़ित बच्चों का उपचार किया गया है।-मीरा यादव, जिला कोऑर्डिनेटर, आरबीएसके
वर्जन:
गर्भवतियों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। इससे बच्चे के दिल में छेद जैसी परेशानी भी हो सकती है। यह समस्या शुगर और थायराइड की वजह से भी हो सकती है। गर्भवती को खानपान को लेकर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। -डॉ. जितेंद्र यादव, फिजिशियन नागरिक अस्पताल