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Mahendragarh-Narnaul News: पांच माह में घरेलू हिंसा के 85 मामले पहुंचे, 82 में हुआ समझौता
Wed, 03 Jun 2026 12:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 03 Jun 2026 12:17 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। वन स्टाप सखी सेंटर में इस वर्ष जनवरी से मई तक घरेलू हिंसा से जुड़े 85 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 82 मामलों का समझौते से समाधान कराया गया। तीन मामले अभी भी लंबित हैं और उन पर कार्रवाई जारी है।
इनमें कई ऐसे मामले भी होते हैं जो सामाजिक संकोच, पारिवारिक दबाव या जागरूकता की कमी के कारण सेंटर तक पहुंच ही नहीं पाते। ऐसे में घरेलू हिंसा की वास्तविक संख्या दर्ज मामलों से अधिक होने की संभावना रहती है।
सेंटर का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता, परामर्श और सुरक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल यादव ने मानसिक तनाव को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन, अवसाद या मानसिक अस्थिरता के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
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समय रहते उचित परामर्श और उपचार मिलने से गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि लगातार मानसिक दबाव में रहने वाला व्यक्ति कभी-कभी ऐसा कदम उठा सकता है, जिसका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है।
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नारनौल। वन स्टाप सखी सेंटर में इस वर्ष जनवरी से मई तक घरेलू हिंसा से जुड़े 85 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 82 मामलों का समझौते से समाधान कराया गया। तीन मामले अभी भी लंबित हैं और उन पर कार्रवाई जारी है।
इनमें कई ऐसे मामले भी होते हैं जो सामाजिक संकोच, पारिवारिक दबाव या जागरूकता की कमी के कारण सेंटर तक पहुंच ही नहीं पाते। ऐसे में घरेलू हिंसा की वास्तविक संख्या दर्ज मामलों से अधिक होने की संभावना रहती है।
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सेंटर का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता, परामर्श और सुरक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल यादव ने मानसिक तनाव को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन, अवसाद या मानसिक अस्थिरता के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
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समय रहते उचित परामर्श और उपचार मिलने से गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि लगातार मानसिक दबाव में रहने वाला व्यक्ति कभी-कभी ऐसा कदम उठा सकता है, जिसका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है।