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प्रभु ही समस्त कामनाओं को पूर्ण करते हैं : शास्त्री

Sun, 27 Aug 2017 10:24 PM IST
Updated Sun, 27 Aug 2017 10:24 PM IST
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प्रभु ही समस्त कामनाओं को पूर्ण करते हैं : शास्त्री
प्रभु ही समस्त कामनाओं को पूर्ण करते हैं : शास्त्री
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। अग्रवाल सभा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे पंडित राधेश्याम शास्त्री ने रविवार को प्रवचन किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि भागवत महापुराण भगवान का वाण्मय स्वरूप है। इसके दर्शन, पठन और पूजन से पुण्य प्राप्त होता है।

उन्होंने रविवार को ध्रुव चरित्र की कथा में बताया कि यह अर्थ का प्रसंग है। जीवन में धन आदि की इच्छा भी हो तो उसे प्रभु से ही निवेदित करें। प्रभु ही समस्त कामनाओं को पूर्ण करते हैं। प्रभु चरित्र में बताया कि व्यक्ति को संतों का संग करना चाहिए। ये मानव जीवन केवल भोग के लिए नहीं है। जड़ भरत की कथा में उन्होंने बताया कि भरत का मन जीवन के अंत में मृग में लग गया। इस कारण भरत को दूसरे जन्म में मृग ही बनना पड़ा। इसलिए व्यक्ति को संसार की आसक्ति छोड़कर प्रभु शरणागति स्वीकार करनी चाहिए। राम के जन्म के विषय में बताया कि श्रीराम जन्म रावण को मारने के लिए नहीं, बल्कि मानव मात्र को शिक्षा देने के लिए परब्रह्म परमात्मा ने लिया था। शास्त्री ने बताया कि 28 प्रकार के नरक का वर्णन किया गया है, जो जैसा कर्म करता है, वह वैसा ही फल पाता है। उन्होंने पंक्ति सुनाई कि मालिक के दरबार में सब लोगों का खाता, जो भी जैसी करनी करता, वैसा ही फल पाता।
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