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74 वर्ष का महेंद्रगढ़ जिला अपने से अलगे हुए जिलों से आज भी है पीछे

Tue, 01 Nov 2022 12:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 12:39 AM IST
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74 years old Mahendragarh district is still behind the districts separated from it
हरियाणा जन्म से पहले का जिला महेंद्रगढ़ 74 वर्षों में उतनी तरक्की नहीं कर पाया जितनी होनी चाहिए थी। 1948 में बने इस जिले में विकास नहीं होने की वजह से इसे काला पानी का दर्जा मिला हुआ है। जिले से 1989 में अलग हुआ रेवाड़ी इससे बहुत आगे निकल गया है। अधिकारियों को यहां सजा के तौर पर भेजा जाता है। एक के बाद एक राजनीतिक लोग आए और अपनी रोटियां सेक कर चले गए। किसी ने इसकी ओर ध्यान नहीं दिया, लेकिन पिछले 15 वर्षों चल रहे विकास कार्यों से इसकी सूरत बदलने लगी है। जिला शिक्षा का हब बना गया। स्वास्थ्य सेवाएं भी लगातार दुरुस्त हो रही हैं। (संवाद)
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इन योजनाओं से लगेंगे विकास को पंख
जिले में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज पहले बन चुका है और मेडिकल कॉलेज का भी 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जिले को दो नेशनल हाईवे मिले हैं। टूरिज्म सर्किट पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा जिले में लॉजिस्टिक हब और आईएमटी भी प्रस्तावित हैं अगर ये दोनों प्रोजेक्ट सिरे चढ़ गए तो महेंद्रगढ़ पर लगा काला पानी का दाग भी धुल जाएगा। लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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वर्ष 1948 में बना था महेंद्रगढ़ जिला
1948 में पटियाला रियासत की नारनौल और महेंद्रगढ़ तहसीलें, जींद रियासत की दादरी (चरखी दादरी) तहसील और नाभा रियासत की बावल निजामत का कुछ हिस्सा मिलाकर महेंद्रगढ़ जिले का गठन किया गया था। नारनौल को जिला मुख्यालय बनाया गया। उल्लेखनीय है कि महेंद्रगढ़ जिला राज्य का एकमात्र ऐसा जिला है, जिसका जिला मुख्यालय जिले के नाम के अनुरूप न होकर नारनौल में स्थित है। 1948 में महेंद्रगढ़ जिले के गठन के बाद से जिलों के पुनर्गठन व नए जिले बनने की वजह से महेंद्रगढ़ की भौगोलिक सीमाओं में अनेक बार परिवर्तन किए गये हैं। 1989 में रेवाड़ी को नया जिला बनाने के बाद महेंद्रगढ़ जिले की भौगोलिक सीमाओं में परिवर्तन हुआ है।
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गांव बाछोद की बेटी तनिष्का यादव ने नीट में किया था टॉप
महेंद्रगढ़ जिला स्कूल स्तर पर शिक्षा का हब बन चुका है। इसके पीछे सरकार का कोई खास योगदान नहीं है बल्कि निजी शिक्षण संस्थाओं की वजह से बना है। जिले के अंदर 150 से 200 निजी शिक्षण संस्थाएं हैं। जिले के विद्यार्थी यूजीसी, नीट, आईआईटीसी, बोर्ड परीक्षा में टॉप कर रहे हैं। वर्ष 2021 में गांव बसई की ममता यादव ने यूपीएससी में पांचवां स्थान प्राप्त किया था। इस वर्ष नीट में गांव बाछोद की बेटी तनिष्का यादव ने हिंदुस्तान में पहला स्थान प्राप्त किया। सीबीएसई 2021-22 में 12वीं की परीक्षा में गांव सिलारपुर की बेटी अंजलि ने पूरे देश में टॉप किया था। जिले के अंदर हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय भी अपना परचम लहरा रहा है। इस महाविद्यालय में देश-विदेश के 3500 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
जिले को मिले दो नेशनल हाईवे
पिछले आठ वर्षों में जिले को दो नेशनल हाईवे की सौगात मिली है। लगभग साढ़े 9 करोड़ रुपये से ग्रीनफील्ड कॉरिडोर नारनौल से इस्माइलाबाद तक बनाया गया है। वहीं एक रोड नेशनल हाईवे 11 सिंघाना से रेवाड़ी तक बनाई गई है। इसके अलावा नारनौल के चारों ओर ओवरब्रिज के माध्यम से बाइक पास बना दिया गया है। तीसरा नेशनल हाईवे हांसी, तोशाम, लोहारू, सतनाली, महेंद्रगढ़, कनीना होते हुए केएमपी तक बनाया जाएगा, जिसकी केंद्र परिवहन मंत्री से मंजूरी मिल चुकी। इसके अलावा अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन की भी मंजूरी मिल चुकी है।
टूरिज्म सर्किट में रूप में विकसित हो रहा
महेंद्रगढ़ जिला टूरिज्म के रूप में भी आगे बढ़ रहा है। महेंद्रगढ़ में माधोगढ़ एवं महेंद्रगढ़ किले पर काम चल रहा है। वहीं नारनौल के अंदर बीरबल का छत्ता व तख्त बावली का काम चल रहा है। यहां जलमहल, शा कुली खान का मकबरा, चोर गुंबज आदि का पहले ही जीर्णोद्धार किया जा चुका है। प्रदेश सरकार इसे टूरिज्म सर्किट में रूप में विकसित कर रही है।
कोरियावास में बनाया जा रहा मेडिकल कॉलेज
जिले में चिकित्सा सुविधाओं में भी परिवर्तन हो रहा है। आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज पर ओपीडी सेवाएं दो वर्षों से चल रही हैं। इस वर्ष बीएएमएस के लिए एडमिशन भी शुरू हो जाएंगे। गांव कोरियावास में 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है, जिसका 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नारनौल शहर में ट्रामा सेंटर बनाया जा रहा है। महेंद्रगढ़ शहर में 100 बेड का अस्पताल का नया भवन बनाया जा रहा है। सतनाली में 50 बेड का अस्पताल भवन बनकर तैयार हो गया है। इसके अलावा सतनाली में भी जल्द ही 25 बेड का अस्पताल भवन बनकर तैयार हो जाएगा।

भविष्य में स्थापित होंगे उद्योग, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
गांव में घाटासेर के पास जल्द ही 1200 एकड़ भूमि पर लॉजिस्टिक हब स्थापित किया जाएगा। सरकार बिजली, पानी और रोड को लेकर काम चला रही है। वहीं गांव खुडाना में आईएमटी स्थापित की जाएगी। अभी इस प्रोजेक्ट पर जमीन ट्रांसफर का कार्य पूरा नहीं हो पाया है, लेकिन सरकार बार-बार यहां पर आईएमटी स्थापित करने का दावा कर रही है। अगर ये सभी प्रोजेक्ट पूरे हो जाएंगे तो जिले की सूरत बदल जाएगी। जिले में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के लिए अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
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