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60 प्रतिशत दुर्घटना होती है ओवर स्पीड के कारण
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ओवर स्पीड से गाड़ी चलाना अपने व दूसरे के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। वहीं आए दिन ओवरस्पीड के कारण हादसे भी हो रहे हैं जिनमें अनेक लोग अपनी जान गवां बैठते हैं तो कई शारीरिक अंगों को खो बैठते हैं। ऐसे ही एक सड़क हादसे में ढाणी सादा निवासी एक व्यक्ति अपना एक पैर गवां चुका है। वहीं मूसनौता निवासी बनवारी की रीढ़ की हड्डी टूट गई। दोनों ही व्यक्ति आज चल फिरने में असमर्थ है।
ढाणी सदा निवासी यादराम करीब बीस साल से ट्रक चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। दस मार्च को सुबह यादराम अपने घर से खाना पैक करवाकर ट्रक पर ड्यूटी के लिए घर से निकलकर ढाणी के बस स्टैंड पर जाकर खड़ा हुआ था कि एक मोटर साइकिल आकर रुकी यादराम उस पर सवार होकर 500 मीटर चला की मोटरसाइकल ओवर स्पीड होने के कारण बाइक डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना भयंकर था कि बाइक करीब 20 फिट उछल कर गिर गई ओर यादराम का पैर टूट गया। यादराम के पैर का दो बार आपरेशन किया गया लेकिन कामयाब नहीं हो पाया। जिस कारण यादराम चारपाई पर है। यादराम ने भावुक होते हुए बताया कि मेरा एक लक्ष्य था कि अपने बेटे को आर्मी अधिकारी बनाना है लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। वहीं यादराम ने अपनी छह बेटियों को पढ़ाकर उनकी शादी भी कर दी लेकिन यादराम के मन में बहुत कुछ और करने की थी। जिससे वह पूरा नहीं सका। 54 वर्षीय यादराम ने विकट परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और परिवार को आगे बढ़ाया।
दूसरा हादसा गांव मूसनोता के बनवारी लाल के साथ हुआ था। दस साल पहले मारुति कार में बैठकर गुरुग्राम से अपने घर आ रहा था। मानेसर के पास कार ओवर स्पीड में चल रही थी। वहीं चालक व बनवारी लाल ने शीट बेल्ट भी नहीं लगा रखी थी। दुर्घटना हो गई जिसमें बनवारी लाल की पीठ में झटका लगा और रीढ़ की हड्डी फैक्चर हो गई। अनेक जगह इलाज करवाने के बाद भी बनवारी लाल को कोई आराम नहीं मिला और आज चारपाई पर रहकर जीवन यापन करने को मजबूर है। बनवारी लाल का दूसरा साथी मर चुका है।
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पुलिस की मानें तो अधिकतर दुर्घटनाएं ओवर स्पीड के कारण होती हैं। कई बार दुर्घटना होने से परिवार बिखर जाता है और परिवार को संभालने वाला ही चला जाता है। इसलिए पुलिस समय-समय पर लोगों को ओवर स्पीड के अलावा शीट बेल्ट लगाकर ड्राइवरी करने के लिए जागरूक करती है। पुलिस की मानें तो 60 प्रतिशत दुर्घटना ओवर स्पीड के कारण होती है।
यातायात पुलिस लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करती रहती हैं। साथ-साथ चालान भी करती है, लेकिन लोग चालान भरकर भी नियमों का पालन नहीं करते हैं। लोगों को इसके लिए स्वयं जागरूक होना होगा। नशा कर वाहन चालन, तेज रफ्तार, ओवरलोड सवारी बैठाने, असुरक्षित ओवरटेक, वाहन चालन के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग, चालक द्वारा ध्यान का भटकना, थकान में वाहन चालन, सड़क पर वाहन खड़ा करना आदि सड़क दुर्घटना के प्रमुख कारण हैं। दो सप्ताह पहले छुछक भरकर गाड़ी से गांव मांदी से दिल्ली जाते हुए परिवार का ओवर स्पीड के कारण हुआ हादसा दो लोगों की जिंदगी लील लिया और परिवार के चार लोग अभी तक वेंटिलेटर पर है। इसलिए हमेशा ड्राइव करते समय शीट बेल्ट व कम स्पीड में ड्राइव करनी चाहिए व यातायात नियमों का पालन करना चाहिए।
-निरीक्षक सत्यनारायण, यातायात प्रभारी, नारनौल।
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ढाणी सदा निवासी यादराम करीब बीस साल से ट्रक चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। दस मार्च को सुबह यादराम अपने घर से खाना पैक करवाकर ट्रक पर ड्यूटी के लिए घर से निकलकर ढाणी के बस स्टैंड पर जाकर खड़ा हुआ था कि एक मोटर साइकिल आकर रुकी यादराम उस पर सवार होकर 500 मीटर चला की मोटरसाइकल ओवर स्पीड होने के कारण बाइक डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना भयंकर था कि बाइक करीब 20 फिट उछल कर गिर गई ओर यादराम का पैर टूट गया। यादराम के पैर का दो बार आपरेशन किया गया लेकिन कामयाब नहीं हो पाया। जिस कारण यादराम चारपाई पर है। यादराम ने भावुक होते हुए बताया कि मेरा एक लक्ष्य था कि अपने बेटे को आर्मी अधिकारी बनाना है लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। वहीं यादराम ने अपनी छह बेटियों को पढ़ाकर उनकी शादी भी कर दी लेकिन यादराम के मन में बहुत कुछ और करने की थी। जिससे वह पूरा नहीं सका। 54 वर्षीय यादराम ने विकट परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और परिवार को आगे बढ़ाया।
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दूसरा हादसा गांव मूसनोता के बनवारी लाल के साथ हुआ था। दस साल पहले मारुति कार में बैठकर गुरुग्राम से अपने घर आ रहा था। मानेसर के पास कार ओवर स्पीड में चल रही थी। वहीं चालक व बनवारी लाल ने शीट बेल्ट भी नहीं लगा रखी थी। दुर्घटना हो गई जिसमें बनवारी लाल की पीठ में झटका लगा और रीढ़ की हड्डी फैक्चर हो गई। अनेक जगह इलाज करवाने के बाद भी बनवारी लाल को कोई आराम नहीं मिला और आज चारपाई पर रहकर जीवन यापन करने को मजबूर है। बनवारी लाल का दूसरा साथी मर चुका है।
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पुलिस की मानें तो अधिकतर दुर्घटनाएं ओवर स्पीड के कारण होती हैं। कई बार दुर्घटना होने से परिवार बिखर जाता है और परिवार को संभालने वाला ही चला जाता है। इसलिए पुलिस समय-समय पर लोगों को ओवर स्पीड के अलावा शीट बेल्ट लगाकर ड्राइवरी करने के लिए जागरूक करती है। पुलिस की मानें तो 60 प्रतिशत दुर्घटना ओवर स्पीड के कारण होती है।
यातायात पुलिस लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करती रहती हैं। साथ-साथ चालान भी करती है, लेकिन लोग चालान भरकर भी नियमों का पालन नहीं करते हैं। लोगों को इसके लिए स्वयं जागरूक होना होगा। नशा कर वाहन चालन, तेज रफ्तार, ओवरलोड सवारी बैठाने, असुरक्षित ओवरटेक, वाहन चालन के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग, चालक द्वारा ध्यान का भटकना, थकान में वाहन चालन, सड़क पर वाहन खड़ा करना आदि सड़क दुर्घटना के प्रमुख कारण हैं। दो सप्ताह पहले छुछक भरकर गाड़ी से गांव मांदी से दिल्ली जाते हुए परिवार का ओवर स्पीड के कारण हुआ हादसा दो लोगों की जिंदगी लील लिया और परिवार के चार लोग अभी तक वेंटिलेटर पर है। इसलिए हमेशा ड्राइव करते समय शीट बेल्ट व कम स्पीड में ड्राइव करनी चाहिए व यातायात नियमों का पालन करना चाहिए।
-निरीक्षक सत्यनारायण, यातायात प्रभारी, नारनौल।