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दो साल में दो बार बनाई योजना, एक बार भी नहीं चढ़ी सिरे
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:29 AM IST
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दो बार जलभराव की समस्या झेल चुके शहरवासी, अभी तक शुरू नहीं हुआ बरसाती पानी निकासी की योजना पर काम
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहरवासियों को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन गंभीर नहीं है। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और लोग दो जलभराव की परेशानी झेल भी चुके हैं। शहर के अधिकतर नाले गंदगी से अटे होने के कारण पानी निकासी नहीं हो रही है फिर भी शहर की सरकार ध्यान नहीं दे रही है। शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए नगर परिषद व जनस्वास्थ्य विभाग दो साल में दो बार दो-दो करोड़ रुपये की योजना बना चुका है, लेकिन आज तक योजना सिरे नहीं चढ़ी है। पिछले साल तो जनस्वास्थ्य विभाग ने योजना बनाकर शहर के अधिकांश हिस्सों में पाइप दबाने का निर्णय लिया था लेकिन लोगों के विरोध के कारण योजना क्रियान्वित ही नहीं हो पाई। अब नगर परिषद ने पानी निकालने का जिम्मा अपने ऊपर लिया है। पानी निकासी के लिए 2 करोड़ 80 लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत हो चुका है लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
उल्लेखनीय है कि शहर में कुल सात जगह बारिश के पानी के भराव की समस्या अधिक होती है। यह पानी शहर के बीच बनी छलक नदी के नाले से होते हुए शहर से बाहर गांव नूनी शेखुपरा की ओर निकाला जाता है। जिससे गांव का भूजल स्तर भी ठीक रहता है तथा शहर के नाले के आसपास भी भूजल स्तर रिचार्ज होते रहने के कारण सही रहता है। लेकिन यह नाला गंदगी से अटा पड़ा है। पिछले साल शहर में सात मुख्य जगहों से पानी निकालने के लिए नप ने जनस्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर दो करोड़ नौ लाख रुपये की योजना बनाई थी। जिसके तहत इन सात जगहों से पाइप दबाकर नाले में पानी डाला जाना था। लेकिन केवल एक जगह रावका व भाटवाड़ा में योजना को अमलीजामा पहनाया गया, अन्य निकासी की योजना सही नहीं होने के कारण लोगों ने इसका विरोध किया तथा काम ठंडे बस्ते में चला गया।
इन जगहों से निकाला जाना था बारिश का पानी
1. महावीर चौक से पताली मंदिर, नगर परिषद, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने से होते हुए रामानंद राधेश्याम धर्मशाला के पास गंदे नाले तक 60 मीटर दूरी की 24 इंच पाइप लाइन बिछाई जानी थी, ताकि इस क्षेत्र का बरसाती पानी गंदे नाले में गिराया जा सके।
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2. पुरानी कचहरी मार्ग पर यहां एक पाइप लाइन आफिसर कालोनी से आरंभ होकर जूनियर डीपीएस स्कूल के सामने से शनि मंदिर के पास गंदा नाला में मिलाई जानी थी। इसी का एक भाग घड़ी वाले मंदिर से आरंभ होकर मुकेश ठेकेदार के साथ से शनि मंदिर तक जाने वाली पाइप लाइन में मिलाया जाना था। यह दोनों ही लाइन 550 मीटर और 14 इंच का सीमेंटिड पाइप से होती।
3. सेन चौक से 24 इंच राउंड सीमेंटिड पाइप लाइन बिछाई जानी थी। यह लाइन रविदास मार्ग पर सिटी स्कूल के सामने से होते हुए गंदा नाले में मिलती। इस पाइप लाइन की 600 मीटर दूरी थी।
4. निर्मल क्लीनिक के पास से सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सामने से होते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम के साथ लगते गंदे नाले में पाइप लाइन को डाला जाना था। करीब 750 मीटर दूरी की यह पाइप लाइन 24 इंच साइज की होती।
5. टीबी हास्पिटल से मोहल्ला रावका होते हुए न्यू सिटी पुलिस थाना के पास गंदा नाला तक 400 मीटर लाइन बिछाई जानी थी। यहां भी 24 इंच पाइप लाइन होती।
6. पुराने रेलवे स्टेशन के पास धर्मशाला से पाइप लाइन बिछाई जानी थी। यह लाइन पटीकरा की ओर जाने वाले रास्ते से होती हुई रेलवे फाटक के सामने से कृष्णावती नदी तक 24 इंच पाइप लाइन बिछाई जाती। स्टेशन से नदी तक इस पाइप लाइन की दूरी 1400 मीटर की होती।
7. बहरोड रोड पर रेलवे फाटक पार करने के बाद सड़क पर अक्सर पानी एकत्रित रहता है। बरसात में सबसे बुरा होता होता है। यहां से पाइप लाइन आरंभ होकर कड़िया वाला मंदिर से पहले तालाब के पास तक बिछाई जानी थी। इसकी लंबाई 300 मीटर रहेगी। यहां भी 24 इंची पाइप लाइन सीमेंटिड डाली जानी थी। इनमें से केवल पांच नंबर की योजना पर ही काम हुआ ।
रिचार्ज बोर लगाने और नालों की सफाई कराने की योजना
इस बार नगर परिषद ने बरसाती पानी की निकासी का जिम्मा लिया है। जिसके तहत करीब 25 दिन पहले बैठक भी हुई थी। इसमें शहर में सैन चौक, रेस्ट हाउस के पास रिचार्ज बोर लगाने की योजना है। वहीं शहर के सभी छोटे व बड़े नालों की साफ-सफाई व मरम्मत किए जाने की भी योजना है, ताकि छोटे नालों से मुख्य नाले में पानी चला जाए। पानी निकासी योजना के लिए 2 करोड़ 80 लाख का बजट भी स्वीकृत हो चुका है।
शहर में बारिश के पानी से होने वाली जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए नप ने कार्य शुरू कर दिया है। इसके तहत नालों की सफाई की जाने लगी है। जल्द ही नालों को साफ कर दिया जाएगा, ताकि बारिश का पानी न जमा हो।
- अभय सिंह यादव, ईओ, नगर परिषद, नारनौल
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहरवासियों को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन गंभीर नहीं है। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और लोग दो जलभराव की परेशानी झेल भी चुके हैं। शहर के अधिकतर नाले गंदगी से अटे होने के कारण पानी निकासी नहीं हो रही है फिर भी शहर की सरकार ध्यान नहीं दे रही है। शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए नगर परिषद व जनस्वास्थ्य विभाग दो साल में दो बार दो-दो करोड़ रुपये की योजना बना चुका है, लेकिन आज तक योजना सिरे नहीं चढ़ी है। पिछले साल तो जनस्वास्थ्य विभाग ने योजना बनाकर शहर के अधिकांश हिस्सों में पाइप दबाने का निर्णय लिया था लेकिन लोगों के विरोध के कारण योजना क्रियान्वित ही नहीं हो पाई। अब नगर परिषद ने पानी निकालने का जिम्मा अपने ऊपर लिया है। पानी निकासी के लिए 2 करोड़ 80 लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत हो चुका है लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
उल्लेखनीय है कि शहर में कुल सात जगह बारिश के पानी के भराव की समस्या अधिक होती है। यह पानी शहर के बीच बनी छलक नदी के नाले से होते हुए शहर से बाहर गांव नूनी शेखुपरा की ओर निकाला जाता है। जिससे गांव का भूजल स्तर भी ठीक रहता है तथा शहर के नाले के आसपास भी भूजल स्तर रिचार्ज होते रहने के कारण सही रहता है। लेकिन यह नाला गंदगी से अटा पड़ा है। पिछले साल शहर में सात मुख्य जगहों से पानी निकालने के लिए नप ने जनस्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर दो करोड़ नौ लाख रुपये की योजना बनाई थी। जिसके तहत इन सात जगहों से पाइप दबाकर नाले में पानी डाला जाना था। लेकिन केवल एक जगह रावका व भाटवाड़ा में योजना को अमलीजामा पहनाया गया, अन्य निकासी की योजना सही नहीं होने के कारण लोगों ने इसका विरोध किया तथा काम ठंडे बस्ते में चला गया।
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इन जगहों से निकाला जाना था बारिश का पानी
1. महावीर चौक से पताली मंदिर, नगर परिषद, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने से होते हुए रामानंद राधेश्याम धर्मशाला के पास गंदे नाले तक 60 मीटर दूरी की 24 इंच पाइप लाइन बिछाई जानी थी, ताकि इस क्षेत्र का बरसाती पानी गंदे नाले में गिराया जा सके।
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2. पुरानी कचहरी मार्ग पर यहां एक पाइप लाइन आफिसर कालोनी से आरंभ होकर जूनियर डीपीएस स्कूल के सामने से शनि मंदिर के पास गंदा नाला में मिलाई जानी थी। इसी का एक भाग घड़ी वाले मंदिर से आरंभ होकर मुकेश ठेकेदार के साथ से शनि मंदिर तक जाने वाली पाइप लाइन में मिलाया जाना था। यह दोनों ही लाइन 550 मीटर और 14 इंच का सीमेंटिड पाइप से होती।
3. सेन चौक से 24 इंच राउंड सीमेंटिड पाइप लाइन बिछाई जानी थी। यह लाइन रविदास मार्ग पर सिटी स्कूल के सामने से होते हुए गंदा नाले में मिलती। इस पाइप लाइन की 600 मीटर दूरी थी।
4. निर्मल क्लीनिक के पास से सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सामने से होते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम के साथ लगते गंदे नाले में पाइप लाइन को डाला जाना था। करीब 750 मीटर दूरी की यह पाइप लाइन 24 इंच साइज की होती।
5. टीबी हास्पिटल से मोहल्ला रावका होते हुए न्यू सिटी पुलिस थाना के पास गंदा नाला तक 400 मीटर लाइन बिछाई जानी थी। यहां भी 24 इंच पाइप लाइन होती।
6. पुराने रेलवे स्टेशन के पास धर्मशाला से पाइप लाइन बिछाई जानी थी। यह लाइन पटीकरा की ओर जाने वाले रास्ते से होती हुई रेलवे फाटक के सामने से कृष्णावती नदी तक 24 इंच पाइप लाइन बिछाई जाती। स्टेशन से नदी तक इस पाइप लाइन की दूरी 1400 मीटर की होती।
7. बहरोड रोड पर रेलवे फाटक पार करने के बाद सड़क पर अक्सर पानी एकत्रित रहता है। बरसात में सबसे बुरा होता होता है। यहां से पाइप लाइन आरंभ होकर कड़िया वाला मंदिर से पहले तालाब के पास तक बिछाई जानी थी। इसकी लंबाई 300 मीटर रहेगी। यहां भी 24 इंची पाइप लाइन सीमेंटिड डाली जानी थी। इनमें से केवल पांच नंबर की योजना पर ही काम हुआ ।
रिचार्ज बोर लगाने और नालों की सफाई कराने की योजना
इस बार नगर परिषद ने बरसाती पानी की निकासी का जिम्मा लिया है। जिसके तहत करीब 25 दिन पहले बैठक भी हुई थी। इसमें शहर में सैन चौक, रेस्ट हाउस के पास रिचार्ज बोर लगाने की योजना है। वहीं शहर के सभी छोटे व बड़े नालों की साफ-सफाई व मरम्मत किए जाने की भी योजना है, ताकि छोटे नालों से मुख्य नाले में पानी चला जाए। पानी निकासी योजना के लिए 2 करोड़ 80 लाख का बजट भी स्वीकृत हो चुका है।
शहर में बारिश के पानी से होने वाली जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए नप ने कार्य शुरू कर दिया है। इसके तहत नालों की सफाई की जाने लगी है। जल्द ही नालों को साफ कर दिया जाएगा, ताकि बारिश का पानी न जमा हो।
- अभय सिंह यादव, ईओ, नगर परिषद, नारनौल