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30 करोड़ बांटे फिर भी कैश की किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jan 2017 12:01 AM IST
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बैंक के बाहर लगी लाइन
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महेंद्रगढ़ की चेस्ट ब्रांच पटियाला ने अभी तक 30 करोड़ रुपये वितरित किया है। नोटबंदी के 57 दिन बाद भी बैंकों में कैश की समस्या बरकरार है। उपभोक्ता बुधवार सुबह सात बजे आकर बैंकों के बाहर लाइन में लग रहे हैं। बैंकों में कर्मचारी और पेंशनर्स को अब भी सर्वाधिक परेशानी हो रही है। पंजाब नेशनल बैंक और एसबीआई के उपभोक्ताओं को बुधवार को भी छह हजार रुपये ही मिल रहे हैं जबकि एटीएम बुधवार को भी खाली रहे। बैंकों में स्वैप मशीनें, चेक और एटीएम कार्ड भी समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्वैप मशीनों के आवेदन बैंकों में नोटबंदी के बाद से आज तक 125 तक आ चुके हैं लेकिन आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को स्वैप मशीनें नहीं मिली हैं। बैंक में हर रोज कैश भी आ रहा है पैसे जमा भी हो रहे हैं उसे भी वितरित किया जा रहा है। इसके बाद भी कैश की समस्या बरकरार है। बैंक प्रशासन का कहना है कि एटीएम में पैसे डाल दिए हैं, कैश भी लोगों को मिल रहा है लेकिन हकीकत कुछ और है।
एटीएम रहे खाली
भले ही सरकार ने एटीएम में कैश की संख्या बढ़ा दी हो लेकिन हकीकत यह है कि एटीएम बुधवार को भी रहे। उपभोक्ता लाइनों में लगने पर मजबूर हैं। शनिवार को एसबीआई ने अपने चार एटीएम में कैश डाला था उसके बाद कैश नहीं डाला गया है। पटियाला बैंक के पास एक ही एटीएम है वह बंद पड़ा है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक के शहर में पांच एटीएम बंद हैं जबकि मैनेजर का कहना है एटीएम में पैसे आज डाले गए। वास्तविकता यह है कि नगर में पंजाब नेशनल बैंक का एक भी एटीएम दोपहर तीन बजे तक चालू नहीं था।
ये भी है समस्या
उपभोक्ताओं ने बैंकों से एटीएम कार्ड, स्वैप मशीनें, क्रेडिट कार्ड, चैक बुक जारी करने के लिए आवेदन किया है। परंतु बैंक से उपभोक्ताओं उपरोक्त चीजें भी समय पर नहीं मिल पा रही। चेकबुक की हर रोज बैंकों में 100 से 150 अप्लीकेशन आ रही हैं लेकिन चेक बुक जारी नहीं हो रही। यही हाल एटीएम एवं क्रेडिट कार्ड का है। स्वैप मशीनें तो नोटबंदी के बाद एसबीआई, एसबीपी और पीएनबी ने लगाई ही नहीं है।
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वर्जन:
कैश के हालात बैंकों नहीं सुधर रहे है। मैं सुबह 10 बजे कैश लेने के लिए आया था। चार घंटे में मेरा नंबर आया है। मुझे छह हजार रुपये ही मिले हैं। नेट बैंकिंग के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। - पूर्ण सिंह धौली।
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मैं गांव झगड़ौली से पेंशन के लिए आया हूं। 11 बजे लाइन में लगा लंच हो चुका है नंबर अभी भी नहीं आया है। अभी मेरे आगे 50 लोग और लगे हैं। बैंक के हालात में केवल यही सुधार है पहले दो हजार रुपये देते थे। अब छह हजार रुपये दे रहे हैं। - बहादुरमल
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मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति से खुश हूं लेकिन बैंकों में ऊपरी लेवल पर जो भ्रष्टाचार हो रहा है। उससे बहुत आहत भी हूं। कैश की समस्या तो बैंकों में है, एक दिन में 24 हजार नहीं दे पा रहे लेकिन कैश रोज लाइन में खड़े होने से मिल जाता है। मैं पेंशन लेने के लिए आया था। तीन घंटे से लाइन में खड़ा हूं। - कप्तान रामस्वरूप
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एटीएम में पैसे नहीं हैं। यहां लाइन में लगे हैं। अगर एटीएम में पैसे डाल दिए जाए तो भीड़ पर काबू पाया जा सकता है। मैं सुबह से लाइन में खड़ा हूं। लंच हो चुका है नंबर अभी भी नहीं आया है। बुधवार को छह हजार रुपये का कैश दे रहे हैं। - विक्रम सिंह
कोट
बैंक के पास कैश जैसे-जैसे आ रहा है वो उपभोक्ताओं में वितरित किया जा रहा है। हर रोज उपभोक्ताओं को छह हजार रुपये दे रहे हैं। कोई भी उपभोक्ता बिना कैश वापस नहीं जा रहा। इसके अलावा उपभोक्ताओं की स्वैप और चेक के लिए अप्लीकेशन आती हैं तो वे भेज दी जाती हैं। आने पर उन्हें दे दी जाएगी। आर.पी. मेहरानिया-मैनेजर पीएनबी महेंद्रगढ़।
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एटीएम रहे खाली
भले ही सरकार ने एटीएम में कैश की संख्या बढ़ा दी हो लेकिन हकीकत यह है कि एटीएम बुधवार को भी रहे। उपभोक्ता लाइनों में लगने पर मजबूर हैं। शनिवार को एसबीआई ने अपने चार एटीएम में कैश डाला था उसके बाद कैश नहीं डाला गया है। पटियाला बैंक के पास एक ही एटीएम है वह बंद पड़ा है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक के शहर में पांच एटीएम बंद हैं जबकि मैनेजर का कहना है एटीएम में पैसे आज डाले गए। वास्तविकता यह है कि नगर में पंजाब नेशनल बैंक का एक भी एटीएम दोपहर तीन बजे तक चालू नहीं था।
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ये भी है समस्या
उपभोक्ताओं ने बैंकों से एटीएम कार्ड, स्वैप मशीनें, क्रेडिट कार्ड, चैक बुक जारी करने के लिए आवेदन किया है। परंतु बैंक से उपभोक्ताओं उपरोक्त चीजें भी समय पर नहीं मिल पा रही। चेकबुक की हर रोज बैंकों में 100 से 150 अप्लीकेशन आ रही हैं लेकिन चेक बुक जारी नहीं हो रही। यही हाल एटीएम एवं क्रेडिट कार्ड का है। स्वैप मशीनें तो नोटबंदी के बाद एसबीआई, एसबीपी और पीएनबी ने लगाई ही नहीं है।
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कैश के हालात बैंकों नहीं सुधर रहे है। मैं सुबह 10 बजे कैश लेने के लिए आया था। चार घंटे में मेरा नंबर आया है। मुझे छह हजार रुपये ही मिले हैं। नेट बैंकिंग के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। - पूर्ण सिंह धौली।
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मैं गांव झगड़ौली से पेंशन के लिए आया हूं। 11 बजे लाइन में लगा लंच हो चुका है नंबर अभी भी नहीं आया है। अभी मेरे आगे 50 लोग और लगे हैं। बैंक के हालात में केवल यही सुधार है पहले दो हजार रुपये देते थे। अब छह हजार रुपये दे रहे हैं। - बहादुरमल
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मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति से खुश हूं लेकिन बैंकों में ऊपरी लेवल पर जो भ्रष्टाचार हो रहा है। उससे बहुत आहत भी हूं। कैश की समस्या तो बैंकों में है, एक दिन में 24 हजार नहीं दे पा रहे लेकिन कैश रोज लाइन में खड़े होने से मिल जाता है। मैं पेंशन लेने के लिए आया था। तीन घंटे से लाइन में खड़ा हूं। - कप्तान रामस्वरूप
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एटीएम में पैसे नहीं हैं। यहां लाइन में लगे हैं। अगर एटीएम में पैसे डाल दिए जाए तो भीड़ पर काबू पाया जा सकता है। मैं सुबह से लाइन में खड़ा हूं। लंच हो चुका है नंबर अभी भी नहीं आया है। बुधवार को छह हजार रुपये का कैश दे रहे हैं। - विक्रम सिंह
कोट
बैंक के पास कैश जैसे-जैसे आ रहा है वो उपभोक्ताओं में वितरित किया जा रहा है। हर रोज उपभोक्ताओं को छह हजार रुपये दे रहे हैं। कोई भी उपभोक्ता बिना कैश वापस नहीं जा रहा। इसके अलावा उपभोक्ताओं की स्वैप और चेक के लिए अप्लीकेशन आती हैं तो वे भेज दी जाती हैं। आने पर उन्हें दे दी जाएगी। आर.पी. मेहरानिया-मैनेजर पीएनबी महेंद्रगढ़।