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रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है सतनाली का सीएचसी

Wed, 22 Aug 2018 12:56 AM IST
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:56 AM IST
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रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है सतनाली का सीएचसी
अमर उजाला ब्यूरो
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सतनाली मंडी। भले ही प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे तो किए जाते हों, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। सतनाली का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जिसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो मिल चुका हैं, लेकिन यहां सुविधाएं नदारद हैं। हालात यह कि कंडम घोषित भवन में मरीजों का इलाज हो रहा है। अस्पताल में न तो चिकित्सक और न ही जांच मशीनें। हां इतना जरूर है कि अस्पताल में बुखार, खांसी, जुखाम व छोटी-मोटी चोट का इलाज जरूर हो जाता है। किसी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीज को तुरंत ही प्राथमिक जांच उपरांत अन्य सेंटर पर रेफर कर दिया जाता है।

2014 में दिया था सीएचसी का दर्जा
30 जून 2014 को आईटीआई महेंद्रगढ़ मैदान में तत्कालीन एमएलए राव दान सिंह विकास रैली आयोजित की थी। रैली में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सतनाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सीएचसी का दर्जा देने की घोषणा की थी। उस दौरान भवन के लिए 60 लाख रुपये भी आ चुके थे। परंतु बाद में यह पैसा लैप्स हो गया। वर्तमान सरकार को लगभग चार वर्ष का समय हो गया परंतु इस संदर्भ में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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एक स्थायी चिकित्सक चला रहा है काम
अस्पताल में एक एसएएमओ तथा सात चिकित्सकों के पद सृजित हैं जबकि यहां मात्र एक चिकित्सक की नियुक्ति है जबकि दूसरे चिकित्सक डेपुटेशन पर सप्ताह में पांच दिन सेवाएं दे रहे हैं। अस्पताल में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 200 मरीजों की ओपीडी हो रही है। अस्पताल में महिला चिकित्सक का पद तो लंबे समय से रिक्त ही पड़ा है। ऐसे में महिलाओं को मजबूरी में या तो पुरुष चिकित्सकों से उपचार करवाना पड़ता है या फिर अन्य इलाज करवाना पड़ता है।
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25 गांवों के बीच है यह बड़ा अस्पताल
सतनाली का अस्पताल लगभग 55 वर्ष पुराना है। उस समय सतनाली की जनसंख्या लगभग सात हजार ही थी। परंतु अब इस गांवों का उप तहसील का दर्जा दिया जा चुका है। साथ ही 25 गांव भी इस कस्बे के अंतर्गत आते हैं। एक जमाने में लगभग 350 से अधिक ओपीडी अस्पताल में होने लगी थी। परंतु सुविधा के अभाव में अब मरीज महेंद्रगढ़ एवं लोहारू का रुख करने लगे हैं। इससे उनको शारीरिक, आर्थिक तथा मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

एक महीने पहले भवन को किया जा चुका है कंडम घोषित
अस्पताल के भवन को भी पिछले दिनों कंडम घोषित किया जा चुका है, बावजूद इसके नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। अस्पताल के नए भवन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब दो माह पूर्व नया भवन बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग की टीम ने अस्पताल की भूमि की नापतौल भी की थी लेकिन इसके बाद फिर से फाइल ठंडे बस्ते में चली गई है।

महेंद्रगढ़ से उधार मंगवानी पड़ती है एंबुलेंस
सतनाली अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा नहीं है। मरीजों के लिए महेंद्रगढ़ से एंबुलेंस मंगवानी पड़ती है। गंभीर स्थिति में निजी अस्पतालों की एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है। परेशानी उस समय अधिक बढ़ जाती है जब सतनाली के आसपास दुर्घटना हो जाती है। उस समय 25 किलोमीटर दूर महेंद्रगढ़ से एंबुलेंस मंगवानी पड़ती है।


प्रिंसिपल सेक्रेटरी से की थी मांग
सतनाली कस्बे को प्रिंसिपल सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी ने गोद लिया हुआ है। उनके दौरे के दौरान सरपंच प्रतिनिधि उदय सिंह शेखावत ने स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी चिकित्सकों की शीघ्र नियुक्ति एवं आवश्यक उपकरण मुहैया करवाने की मांग की थी। बावजूद इसके अभी तक न तो नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है, न रिक्त पदों को भरा जा रहा है और न ही अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

वर्जन
सतनाली अस्पताल के लिए हमने साइट प्लान भेजा हुआ है। उच्च अधिकारियों की अनुमति आने पर एस्टिमेट बनाकर भेज दिया जाएगा।
- इंद्रजीत सिंह धनखड़, सीएमओ, नारनौल।
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