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Mahendragarh-Narnaul News: 183 लोगों की हुई जांच, 15 संदिग्ध मरीजों के भेजे गए बलगम के नमूने
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फोटो संख्या:63- गांव ढ़ाणा में मरीजों की टीबी की जांच करते स्वास्थ्य कर्मचारी--स्रोत- स्वास्थ्य
कनीना। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत गांव ढाणा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में शनिवार को टीबी जांच और जागरूकता शिविर लगाया गया। शिविर का आयोजन पीएचसी भोजावास के प्रभारी डॉ. आशुतोष शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर में 183 संभावित मरीजों की जांच की। इनमें से 51 लोगों के चेस्ट एक्स-रे किए गए। टीबी के लक्षण मिलने पर 15 मरीजों के बलगम के नमूने जांच के लिए उप नागरिक अस्पताल कनीना की प्रयोगशाला में भेजे गए।
एसटीएस पवन कुमार और टीबीएचवी युद्धवीर ने लोगों को टीबी के लक्षणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा समय तक खांसी रहती है तो तुरंत बलगम की जांच करवानी चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
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सीएचओ आशीष और स्वास्थ्य कर्मी प्रवीण ने बताया कि टीबी मरीजों को छह माह का नियमित उपचार पूरा करना जरूरी है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की दवाइयां मुफ्त मिलती हैं। वहीं, निक्षय पोषण योजना के तहत उपचार ले रहे मरीजों को हर माह एक हजार रुपये की पोषण सहायता भी दी जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर में 183 संभावित मरीजों की जांच की। इनमें से 51 लोगों के चेस्ट एक्स-रे किए गए। टीबी के लक्षण मिलने पर 15 मरीजों के बलगम के नमूने जांच के लिए उप नागरिक अस्पताल कनीना की प्रयोगशाला में भेजे गए।
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एसटीएस पवन कुमार और टीबीएचवी युद्धवीर ने लोगों को टीबी के लक्षणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा समय तक खांसी रहती है तो तुरंत बलगम की जांच करवानी चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
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सीएचओ आशीष और स्वास्थ्य कर्मी प्रवीण ने बताया कि टीबी मरीजों को छह माह का नियमित उपचार पूरा करना जरूरी है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की दवाइयां मुफ्त मिलती हैं। वहीं, निक्षय पोषण योजना के तहत उपचार ले रहे मरीजों को हर माह एक हजार रुपये की पोषण सहायता भी दी जाती है।