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छह लोगों को नई जिंदगी दे गया योगेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 01:51 AM IST
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Yogesh gave new life to six people, Kurukshetra
योगेश की फाइल फोटो। - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ करनाल के गांव बीड़ रायत निवासी 19 वर्षीय योगेश हमेशा के लिए अमर हो गया है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की सूझबूझ से पीजीआई चंडीगढ़ में योगेश के हृदय व लीवर सहित अन्य अंगों को प्रत्यारोपित करके छह लोगों को नया जीवन दिया गया।
दरअसल 16 मार्च को सड़क दुर्घटना में योगेश के सिर में गंभीर चोटें आईं थी। योगेश को तुरंत कुरुक्षेत्र के एक निजी अस्पताल में पहुंचाया गया था। यहां चिकित्सक ने प्राथमिक जांच के बाद योगेश के ब्रेन डेड होने की पुष्टि की थी। इसके बाद परिजन योगेश को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरप्रीत सिंह ने सूझबूझ दिखाते हुए योगेश के परिजनों को अंगदान करने के प्रति प्रेरित किया।
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परिजनों की सहमति के बाद उन्होंने एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. संदीप कोठारी से संपर्क किया। जब तक डॉ. कोठारी ने योगेश को बेहोश करके वेंटिलेटर की मदद से एंबुलेंस में शिफ्ट कराया तब तक डॉ. गुरप्रीत सिंह ने पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों से तालमेल किया। डॉ. गुरप्रीत सिंह ने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ में विशेषज्ञों की टीम ने योगेश को बेहतर उपचार दिया।
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आखिरकार रविवार को योगेश मौत से जंग हार गया, लेकिन जाते-जाते छह लोगों को नया जीवन दे गया। पीजीआई में विशेषज्ञों ने एक जरूरत मरीज में योगेश के हृदय को प्रत्यारोपित कर दिया। वहीं, एक मरीज को लिवर, एक को किडनी और एक अन्य मरीज में पैंक्रियाज को प्रत्यारोपित किया गया। इतना ही नहीं, योगेश की दोनों कार्निया अलग-अलग मरीजों में लगाई गई।

अंगदान अमरता का रास्ता : डॉ. गुरप्रीत सिंह
चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरप्रीत सिंह ने कहा कि अंगदान अमरता का रास्ता है। सामान्य मौत में इंसान के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं।आंखों को छोड़कर जल्दी ही सभी अंग बेकार होने लगते हैं। यही वजह है कि सामान्य मौत की हालत में सिर्फ आंखों का दान किया जा सकता है, लेकिन ब्रेन डेथ वह मौत है, जिसमें किसी भी वजह से इंसान के दिमाग को चोट पहुंचती है, लेकिन बाकी कुछ अंग ठीक काम कर रहे होते हैं। ब्रेन डेथ में जीवन की संभावना बिल्कुल खत्म हो जाती है। इसमें इंसान वापस नहीं लौटता। योगेश के भी ब्रेन को छोड़कर सभी अंग काम कर रहे थे। योगेश दुनिया को अलविदा कहकर भी अमर हो गए।
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