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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस : मानसिक तनाव का शिकार हो रहे किशोर और युवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Oct 2024 05:38 AM IST
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World Mental Health Day: Teenagers and youth becoming victims of mental stress
कुरुक्षेत्र। अगर आपका बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया है, उसे भूख नहीं लग रही और रात को नींद नहीं आ रही तो वह मानसिक तनाव (डिप्रेशन) का शिकार हो सकता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में 10 साल के बच्चों से लेकर युवा मानसिक तनाव से ग्रस्त हैं। आज 10 अक्तूबर को कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य थीम पर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जा रहा है। इसके तहत एलएनजेपी अस्पताल और प्रतापगढ़ में मंदबुद्धि बच्चों को थीम के तहत कार्यक्रम आयोजित कर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक बुजुर्गों की तुलना में 14 से 25 आयु वर्ग से ज्यादा के लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। दुनिया भर में 28 करोड़ लोग मानसिक तनाव का शिकार हैं। कोरोना महामारी के बाद बच्चों और युवाओं में इसका ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।
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एलएनजेपी अस्पताल में प्रतिदिन 150 लोग मानसिक रोग विभाग में उपचार के लिए आते हैं। इसमें 30 नए लोग भी शामिल हैं। मौजूदा स्थिति में अस्पताल में 10 साल से ऊपर के करीब 40 बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य का उपचार चल रहा है, जबकि इस अकेले अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित हर रोज बच्चों के करीब आठ नए मामले सामने आते हैं। अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की महीने भर में 500 से ज्यादा ओपीडी होती है, जिसमें युवाओं की संख्या 90 फीसदी के आसपास रहती है।
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तनाव का मुख्य कारण हमारी जीवन शैली, दिनचर्या, कार्यस्थल पर काम का बोझ, बच्चों में पढ़ाई व परीक्षा, वर्तमान परिवेश, मोबाइल व इंटरनेट है। अधिकतर लोगों की दिनचर्या निर्धारित नहीं है। इस कारण उनके रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं। नशा भी एक कारण है, क्योंकि तनाव होने पर लोग शराब, सिगरेट व नशा का सहारा लेते हैं, मगर उससे उनकी क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस कारण उनको ज्यादा परेशानी होने लगती है।
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कोरोना महामारी के बाद ज्यादा असर
एलएनजेपी के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढाण ने बताया कि पहले बच्चों और युवाओं में मानसिक तनाव के कम ही मामले आते थे, मगर कोरोना महामारी के बाद ज्यादा मामले सामने आने लगे हैं। कोरोना महामारी में लंबे वक्त तक बच्चे मोबाइल व इंटरनेट के जरिए पढ़ाई करते रहे। दूसरा, नौकरीपेशा लोग भी घर से काम करने को मजबूर थे। इस कारण उनको बाहर के परिवेश में ढलने का मौका नहीं मिला और मोबाइल की लत से उनको मानसिक तनाव होने लगा। अगर कोई नींद न आने, भूख न लगने, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होने या घबराहट होने की समस्या से जूझ रहा है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।


यह करने से होगा तनाव कम
-मोबाइल की दुनिया को छोड़कर अपने परिजनों, दोस्त व मिलने-जुलने वाले लोगों के साथ समय बिताएं।
-सुबह की सैर, योग, कसरत और प्राणायाम करें।
-कोई समस्या है तो अपने सीनियर, परिजन और दोस्त के साथ बातचीत करें।
-अपनी दिनचर्या को निर्धारित करें। अच्छी जीवनशैली अपनाएं।
-काम के बीच में कुछ देर का ब्रेक जरूर लें। अच्छी किताबें पढ़े।
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