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Kurukshetra News: वकीलों के हड़ताल पर जाने से कामकाज ठप
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जिला कोर्ट परिसर में वकीलों के वर्क सस्पेंड के चलते खाली पड़ी कुर्सियां।
कुरुक्षेत्र। जिले के साथ-साथ प्रदेशभर की जिला अदालतों में बुधवार को वकीलों की हड़ताल के कारण कामकाज पूरी तरह ठप रहा। यह एक सप्ताह में दूसरा मौका है जब वकीलों ने वकील पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग पर कामकाज बंद किया है। हड़ताल के चलते जिला अदालत में करीब 1300 मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई जिससे पक्षकारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अंबाला बार एसोसिएशन के वकील संजीव मोहन लिब्राहन पर जमीन विवाद से जुड़े मामले में बीएनएस की धारा 115, 329(3) और 351(2) के तहत दर्ज मुकदमे के विरोध में यह हड़ताल की गई। कुरुक्षेत्र बार एसोसिएशन के प्रधान धर्मेंद्र अत्री ने कहा कि वकीलों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने हाल के उदाहरणों का जिक्र करते हुए बताया कि सिरसा में एक वकील पर सरकारी काम में बाधा डालने का झूठा आरोप लगाया गया जबकि गोहाना में एक जूनियर वकील के साथ पुलिस ने मारपीट की और उनके सहयोगियों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि कामकाज ठप करने का असर कुरुक्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर देखने को मिला जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हुए। एसोसिएशन की मांग है कि वकील पर दर्ज मामला रद्द किया जाए।
अत्री ने कहा कि यदि वकील अपने लिए न्याय नहीं दिला पाएंगे तो आम जनता को कैसे न्याय मिलेगा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की ऐसी गुंडागर्दी के खिलाफ यह लड़ाई जरूरी है। हड़ताल के कारण अदालत में सुनवाई के लिए आए पक्षकारों को हाजिरी लगाने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा।
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धर्मेंद्र अत्री ने चेतावनी दी कि यदि अंबाला के दोनों वकीलों पर दर्ज मुकदमा जल्द वापस नहीं लिया गया तो बार काउंसिल के निर्देश पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। हड़ताल से न्यायिक प्रक्रिया पर व्यापक असर पड़ा है और पक्षकारों में नाराजगी देखी गई।
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अंबाला बार एसोसिएशन के वकील संजीव मोहन लिब्राहन पर जमीन विवाद से जुड़े मामले में बीएनएस की धारा 115, 329(3) और 351(2) के तहत दर्ज मुकदमे के विरोध में यह हड़ताल की गई। कुरुक्षेत्र बार एसोसिएशन के प्रधान धर्मेंद्र अत्री ने कहा कि वकीलों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने हाल के उदाहरणों का जिक्र करते हुए बताया कि सिरसा में एक वकील पर सरकारी काम में बाधा डालने का झूठा आरोप लगाया गया जबकि गोहाना में एक जूनियर वकील के साथ पुलिस ने मारपीट की और उनके सहयोगियों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि कामकाज ठप करने का असर कुरुक्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर देखने को मिला जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हुए। एसोसिएशन की मांग है कि वकील पर दर्ज मामला रद्द किया जाए।
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अत्री ने कहा कि यदि वकील अपने लिए न्याय नहीं दिला पाएंगे तो आम जनता को कैसे न्याय मिलेगा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की ऐसी गुंडागर्दी के खिलाफ यह लड़ाई जरूरी है। हड़ताल के कारण अदालत में सुनवाई के लिए आए पक्षकारों को हाजिरी लगाने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा।
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धर्मेंद्र अत्री ने चेतावनी दी कि यदि अंबाला के दोनों वकीलों पर दर्ज मुकदमा जल्द वापस नहीं लिया गया तो बार काउंसिल के निर्देश पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। हड़ताल से न्यायिक प्रक्रिया पर व्यापक असर पड़ा है और पक्षकारों में नाराजगी देखी गई।