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सभी क्षेत्रों में शक्ति का प्रदर्शन कर रहीं महिलाएं : प्रो. सचदेवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 01:27 AM IST
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Women showing power in all fields, Kurukshetra
जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। आज ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां महिलाओं ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन न किया हो। यह कहना है कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत कमेटी द्वारा विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में लैंगिक संवेदनशीलता पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि जेंडर सेंसिटाइजेशन का अर्थ है दूसरे के प्रति हमारे व्यवहार में बदलाव। लिंग समानता किसी समाज की वह स्थिति है, जिसमें संसाधनों एवं अवसरों की उपलब्धता की दृष्टि से स्त्री और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। महिला और पुरुष में भेदभाव हमारे समाज की ओर से ही बनाए गए हैं, जबकि हम सभी रूप से समान हैं। हमारे देश की संस्कृति ऐसी है जहां स्त्री भगवान की कल्पना है। लक्ष्मी को धन, सरस्वती को शिक्षा व रक्षा के लिए दुर्गा माता को पूजा जाता है।
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कुलपति ने कहा कि आज के संदर्भ में हम देखें तो न तो जन्म से पहले और न जन्म के बाद नारी सुरक्षित हैं। दो साल की बच्ची से लेकर 60 साल की वृद्धा भी सुरक्षित नहीं है। हमारे समाज को इसके लिए आत्ममंथन करना होगा। नारी को हम एक सुरक्षित माहौल बना सकते हैं। इस अवसर पर विवि की आतंरिक शिकायत कमेटी की चेयरपर्सन प्रो. नीलम ढांडा, डॉ. वनिता ढींगरा, प्रो. अमित लूदरी, प्रो. दलीप कुमार, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, प्रो. नीरा वर्मा, डॉ. दीपक राय, डॉ. रमेश सिरोही आदि मौजूद रहे।
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शिक्षण संस्थान में आंतरिक शिकायत कमेटी का गठन आवश्यक : प्रो. गिल
मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय की प्रो. राजेश गिल ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों, संबद्ध महाविद्यालयों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत कमेटी (आईसीसी) का गठन किया जाना आवश्यक है। इस अधिनियम के तहत पीड़ित महिला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की लिखित शिकायत आईसीसी को तीन माह के दौरान कर सकती हैं। आईसीसी अधिनियम के तीन अहम पहलू हैं, जिनमें रोकथाम, निषेध और निवारण शामिल हैं।
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