कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में क्यों नहीं लगते ड्यूटी पर परमानेंट प्रोफेसर

ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र Updated Sun, 18 Oct 2015 11:45 PM IST
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प्रदेश की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी केयू परीक्षा प्रणाली की बदहाली के चलते अपनी साख खोती जा रही है। केयू की सुप्रीम बॉडी कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में भी यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
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ईसी के एक सदस्य ने सीधे यूनिवर्सिटी की परीक्षा कंडक्ट ब्रांच की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा कर दिया। पूछा कि आखिर क्यों परमानेंट प्रोफेसर को परीक्षा ड्यूटी में नहीं लगाया जाता। जबकि, नियमानुसार पहले परमानेंट स्टाफ को ही परीक्षा ड्यूटी में लगाना अनिवार्य है।
केयू ईसी की बैठक में परीक्षा प्रणाली को लेकर बहुत देर तक चर्चा हुई। ईसी सदस्य और डीएवी कॉलेज पूंडरी के प्रिंसिपल डॉ. सुभाष तंवर ने कुलपति के समक्ष केयू प्रशासन के परीक्षा कराने से लेकर रिजल्ट घोषित करने तक की पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
डॉ. तंवर ने कुलपति को सौंपे पत्र में साफ कहा कि केयू की परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह से अपनी साख खो चुकी है। लगातार पेपर लीक हो रहे हैं, प्राध्यापक सही मूल्यांकन नहीं कर रहे, बिना कारणों के ही रिजल्ट देरी से घोषित किए जा रहे हैं।

क्यों नहीं लगाते परमानेंट स्टाफ की ड्यूटी
ईसी सदस्य डॉ.सुभाष तंवर ने बैठक में कहा कि परीक्षा के दौरान अधिकतर टेंपरेरी स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाती है। जबकि, यूनिवर्सिटी नॉर्म्स के अनुसार पहले परमानेंट स्टाफ की ड्यूटी लगनी चाहिए। पिछली परीक्षाओं का ड्यूटी रिकॉर्ड चेक करने पर साफ हो जाएगा कि बार-बार कुछ एक अध्यापकों की ड्यूटी लगाई जा रही है।

ये कहते हैं नियम
केयू परीक्षा शाखा द्वारा कॉलेजों के प्राचार्यों को भेजे पत्रों में भी  साफ लिखा होता है कि परीक्षा ड्यूटी से किसी को छूट नहीं है। यदि परीक्षा ड्यूटी में कोताही बरती जाती है अथवा कोई मना करता है तो उसकी अनुपस्थिति लगाई जाएगी। कुलपति इसके खिलाफ  अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं। नियमानुसार परीक्षा ड्यूटी अनिवार्य ड्यूटी है। इससे कोई मना नहीं कर सकता है। यदि किसी को छूट चाहिए भी तो उसका सही कारण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

ये मिले सुझाव भी...
- यूएमसी में फंसे छात्र को अगली कक्षा में दाखिले से बाहर करना होगा।
- रेगुलर स्टाफ को परीक्षा ड्यूटी में शामिल करना अनिवार्य है। क्योंकि, टेंपरेरी स्टाफ की जिम्मेदारी नहीं होती।
- परीक्षा ड्यूटी लगाते समय संबंधित कॉलेजों के प्रिंसिपल की राय का सम्मान किया जाए।
- यदि कोई स्टाफ परीक्षा के दौरान किसी तरह से इन्वॉल्व मिलता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाए।
- जो अधिकारी परीक्षा कंडक्ट कर रहा है, किसी तरह की खामी के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाए।
- परीक्षा के दौरान प्रतिदिन चीफ सुपरींटेंडेंट/प्रिंसिपल से फीडबैक लिया जाए और उस पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
- फ्लाइंग स्क्वॉयड को दो से अधिक परीक्षा केंद्र न दिए जाएं ताकि स्क्वॉयड एक केंद्र पर एक से डेढ़ घंटे तक केंद्र पर रहे।

कुलपति ने किया कमेटी का गठन
परीक्षा प्रणाली पर करीब 40 मिनट के गहन मंथन करने के बाद कुलपति ने समीक्षा समिति का गठन किया है। इस समिति के कनवीनर डॉ. अनिल वोहरा रहेंगे। जबकि, सदस्य सचिव परीक्षा शाखा-1 के नियंत्रक होंगे। इसके अलावा सदस्यों में डॉ. सुभाष तंवर, एसडी कॉलेज अंबाला कैंट के प्रिंसिपल डॉ. राजेंद्र राणा, आरकेएसडी कॉलेज कैथल के डॉ. राजबीर पाराशर, वुमन स्टडीज विभाग की निदेशक डॉ. ऋचा तंवर, संस्कृत विभाग की डीन डॉ. अरुणा शर्मा, रिटायर्ड प्रो. डॉ. हरी सिंह सैनी को शामिल किया है।


केयू की परीक्षा प्रणाली को लेकर ऑन द टेबल एजेंडा आया है। इस पर गहनता से मंथन किया गया है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द प्रशासन को सौंपेगी।
डॉ. प्रवीण सैनी, रजिस्ट्रार, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र।
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