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जहां सेंटर ही नहीं वहां का थमा दिया रोल नंबर
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 09 May 2016 12:31 AM IST
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परीक्ष्ाािथ्ाथिऱ्र्थियाों के राोल नंबर चेक करते अधिकारी
- फोटो : amarujala
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सीबीएसई की ओर से आयोजित सी-टेट की परीक्षा में रविवार को अजीब वाकिया सामने आया है। कुछ अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र में एक ऐसे स्कूल को पता दे दिया गया, जिसे सेंटर ही नहीं बनाया गया था। प्रवेश पत्र लेकर पहुंचे अभ्यर्थियों को जब स्कूल के गेट पर ताले मिले वे हक्का बक्का रह गए। विद्यार्थियों ने अव्यवस्थाओं का अंदाजा लगाकर नाराजगी भी जताई लेकिन बाद में उन्हें वहां से जाना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी जिला कोऑर्डिनेटर को मिली ही नहीं। ऐसे में इन अभ्यर्थियों की परीक्षा को लेकर भी संशय बन गया है।
रविवार को सीटेट की परीक्षा का आयोजन शहर के 12 सेंटरों पर किया गया। जिला कोऑर्डिनेटर डॉ. ऋषि गोयल के मुताबिक इन सेंटरों पर कुल 8000 अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। कोऑर्डिनेटर के अनुसार सभी सेंटरों पर शांतिपूर्वक परीक्षा हुई। कहीं भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आई। लेकिन कुछ अभ्यर्थियों को सुबह खासी परेशानी झेलनी पड़ी। दरअसल करीब 20 से ज्यादा अभ्यर्थी सुबह करीब पौने 9 बजे रेलवे रोड स्थित गुरु नानक सीनियर सेकंडरी स्कूल परीक्षा देने पहुंच गए। जब वे यहां पहुंचे तो स्कूल के गेट पर ताला लगा मिला। इससे हक्का बक्का अभ्यर्थियों ने वहां मौजूद गार्ड से परीक्षा के बारे में पूछा। गार्ड ने किसी परीक्षा के आयोजन से इनकार किया तो उन्होंने अपने प्रवेश पत्र दिखा कर दावा किया उनका सेंटर इसी स्कूल को बनाया गया है। इसके बाद गार्ड ने स्कूल के प्राचार्य मुखत्यार सिंह को फोन पर इसकी जानकारी दी। फिर अभ्यर्थियों को वहां से समझाकर वापस भेज दिया गया। उधर, परीक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई। जगह-जगह पुलिस भी तैनात की गई थी। यहां तक कि प्रमुख चौराहों पर नाकेबंदी की भी व्यवस्था थी। भारी वाहनों को प्रवेश नहीं करने दिया गया।
सेंटर ही नहीं बनाया स्कूल को
स्कूल के प्राचार्य मुखत्यार सिंह ने बताया कि इस बार उनके स्कूल को सीटेट की परीक्षा के लिए सेंटर नहीं बनाया गया था। यदि ऐसा होता तो बाकायदा इसके लिए लेटर दिया जाता। गेट पर कैमरे लगाए जाते, जैमर की व्यवस्था की जाती। साथ ही अन्य सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते लेकिन जब सेंटर ही नहीं बनाया गया तो इन सबका कोई मतलब ही नहीं। उन्होंने बताया कि जब अभ्यर्थियों की आने की सूचना मिली तो उन्हें समझा कर अधिकारियों से बात करने की बात कही और वहां से लौटा दिया गया। प्राचार्य का कहना है कि पटवारी परीक्षा के दौरान उनके स्कूल को सेंटर बनाया गया था। ऐसा संभव है कि कुछ अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र पर वहीं डिटेल्स प्रकाशित हो गई हो। गलती कहां हुई, किससे हुई यह हम नहीं कह सकते। बाद में यह अभ्यर्थी भी कहां गए, इसकी जानकारी नहीं है।
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कोऑर्डिनेटर को जानकारी नहीं
दिलचस्प बात यह है कि सेंटर नहीं होने के बाद भी गुरुनानक स्कूल पहुंचे यह अभ्यर्थी बाद में कहां गए किसी को पता नहीं। यहां तक कि जिला कोऑर्डिनेटर तक को भी इस मामले की जानकारी नहीं दी गई। डॉ. ऋषि का कहना था कि कुल 12 सेंटर बनाए गए थे, जिनमें गुरुनानक स्कूल शामिल नहीं है। ऐसे में वहां अभ्यर्थियों का जाना समझ के परे हैं। यदि किसी वजह से वहां पहुंच भी गए थे तो इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। न ही किसी ने ऐसी शिकायत ही दी है कि उनकी परीक्षा नहीं हुई या सेंटर नहीं मिला।
दो शिफ्ट में हुई परीक्षा
सीटेट के जिला कोऑर्डिनेटर डॉ. ऋषि गोयल के मुताबिक परीक्षा में आठ हजार अभ्यर्थी शामिल हुए। यह परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की गई थी। पहली शिफ्ट सुबह 9.30 से दोपहर 12 बजे तक थी, जबकि दूसरी शिफ्ट की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 4.30 तक हुई। गौरतलब है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 90 मिनट पहले सेंटर में पहुंचने की हिदायत दी गई थी। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के बाहर कई तरह की जांच से गुजरना पड़ा। गेट पर निरीक्षकों ने अभ्यर्थियों को पेन, पेंसिल, पर्स, हेयर पिन, क्लिप, घड़ी, कंगन, बेल्ट, कड़े व मोबाइल सहित अन्य सामान भी बाहर रखवा दिया था। वहीं अभ्यर्थियों के रोल नंबर पर लगी फोटो के साथ अन्य उसी तरह की फोटो, आईडी प्रूफ और अंगूठे का निशान लेते हुए तीनों चीजों का मिलान करके के बाद ही सेंटर में प्रवेश दिया गया।
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रविवार को सीटेट की परीक्षा का आयोजन शहर के 12 सेंटरों पर किया गया। जिला कोऑर्डिनेटर डॉ. ऋषि गोयल के मुताबिक इन सेंटरों पर कुल 8000 अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। कोऑर्डिनेटर के अनुसार सभी सेंटरों पर शांतिपूर्वक परीक्षा हुई। कहीं भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आई। लेकिन कुछ अभ्यर्थियों को सुबह खासी परेशानी झेलनी पड़ी। दरअसल करीब 20 से ज्यादा अभ्यर्थी सुबह करीब पौने 9 बजे रेलवे रोड स्थित गुरु नानक सीनियर सेकंडरी स्कूल परीक्षा देने पहुंच गए। जब वे यहां पहुंचे तो स्कूल के गेट पर ताला लगा मिला। इससे हक्का बक्का अभ्यर्थियों ने वहां मौजूद गार्ड से परीक्षा के बारे में पूछा। गार्ड ने किसी परीक्षा के आयोजन से इनकार किया तो उन्होंने अपने प्रवेश पत्र दिखा कर दावा किया उनका सेंटर इसी स्कूल को बनाया गया है। इसके बाद गार्ड ने स्कूल के प्राचार्य मुखत्यार सिंह को फोन पर इसकी जानकारी दी। फिर अभ्यर्थियों को वहां से समझाकर वापस भेज दिया गया। उधर, परीक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई। जगह-जगह पुलिस भी तैनात की गई थी। यहां तक कि प्रमुख चौराहों पर नाकेबंदी की भी व्यवस्था थी। भारी वाहनों को प्रवेश नहीं करने दिया गया।
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सेंटर ही नहीं बनाया स्कूल को
स्कूल के प्राचार्य मुखत्यार सिंह ने बताया कि इस बार उनके स्कूल को सीटेट की परीक्षा के लिए सेंटर नहीं बनाया गया था। यदि ऐसा होता तो बाकायदा इसके लिए लेटर दिया जाता। गेट पर कैमरे लगाए जाते, जैमर की व्यवस्था की जाती। साथ ही अन्य सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते लेकिन जब सेंटर ही नहीं बनाया गया तो इन सबका कोई मतलब ही नहीं। उन्होंने बताया कि जब अभ्यर्थियों की आने की सूचना मिली तो उन्हें समझा कर अधिकारियों से बात करने की बात कही और वहां से लौटा दिया गया। प्राचार्य का कहना है कि पटवारी परीक्षा के दौरान उनके स्कूल को सेंटर बनाया गया था। ऐसा संभव है कि कुछ अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र पर वहीं डिटेल्स प्रकाशित हो गई हो। गलती कहां हुई, किससे हुई यह हम नहीं कह सकते। बाद में यह अभ्यर्थी भी कहां गए, इसकी जानकारी नहीं है।
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कोऑर्डिनेटर को जानकारी नहीं
दिलचस्प बात यह है कि सेंटर नहीं होने के बाद भी गुरुनानक स्कूल पहुंचे यह अभ्यर्थी बाद में कहां गए किसी को पता नहीं। यहां तक कि जिला कोऑर्डिनेटर तक को भी इस मामले की जानकारी नहीं दी गई। डॉ. ऋषि का कहना था कि कुल 12 सेंटर बनाए गए थे, जिनमें गुरुनानक स्कूल शामिल नहीं है। ऐसे में वहां अभ्यर्थियों का जाना समझ के परे हैं। यदि किसी वजह से वहां पहुंच भी गए थे तो इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। न ही किसी ने ऐसी शिकायत ही दी है कि उनकी परीक्षा नहीं हुई या सेंटर नहीं मिला।
दो शिफ्ट में हुई परीक्षा
सीटेट के जिला कोऑर्डिनेटर डॉ. ऋषि गोयल के मुताबिक परीक्षा में आठ हजार अभ्यर्थी शामिल हुए। यह परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की गई थी। पहली शिफ्ट सुबह 9.30 से दोपहर 12 बजे तक थी, जबकि दूसरी शिफ्ट की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 4.30 तक हुई। गौरतलब है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 90 मिनट पहले सेंटर में पहुंचने की हिदायत दी गई थी। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के बाहर कई तरह की जांच से गुजरना पड़ा। गेट पर निरीक्षकों ने अभ्यर्थियों को पेन, पेंसिल, पर्स, हेयर पिन, क्लिप, घड़ी, कंगन, बेल्ट, कड़े व मोबाइल सहित अन्य सामान भी बाहर रखवा दिया था। वहीं अभ्यर्थियों के रोल नंबर पर लगी फोटो के साथ अन्य उसी तरह की फोटो, आईडी प्रूफ और अंगूठे का निशान लेते हुए तीनों चीजों का मिलान करके के बाद ही सेंटर में प्रवेश दिया गया।