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सांग में कभी झूमे तो कभी भावुक हुए दर्शक
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कुरुक्षेत्र। आन-बान और शान के लिए मनुष्य कुछ भी कर गुजरता है। इसी जद्दोजहद में नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। अभिमन्युपुर में शुरू हुए दो दिवसीय सांग महोत्सव में अजीत सिंह राज बाला के किस्से में कलाकारों ने यही संदेश दिया। हरियाणा कला परिषद के सौजन्य से सूर्यकुंड मेले के उपलक्ष्य में करवाए जा रहे इस सांग महोत्सव में दर्शक कभी झूमते तो कभी भावुक नजर आए।
मार्तण्ड सूर्य की जयंती के उपलक्ष्य में शुरू हुआ सांग महोत्सव पहले दिन पूरे शबाब पर दिखा। दूरदराज से बड़ी संख्या में संस्कृति प्रेमी सांग देखने पहुंचे। हरियाणा के प्रसिद्ध सांगी सूरज बेदी ने सह कलाकारों के साथ अजीत सिंह राज बाला के किस्से पर सांग की शानदार प्रस्तुति दी। इस सांग के माध्यम से कलाकारों ने राजा अजीत सिंह की बेबसी और गरीबी के बावजूद खुद्दारी को दर्शाया। अजीत सिंह की बचपन में राजकुमारी से सगाई हो जाती है, लेकिन शादी की उम्र होते-होते अजीत सिंह कंगाल हो जाते हैं। जब उनको पता लगता है तो वो राजकुमारी को चिट्ठी लिखते हैं। राजकुमारी भी अपना प्रण पुगाने के लिए दृढ़ हो जाती हैं। किंतु अजीत सिंह की गरीबी और बेबसी आड़े आती है। राजा अजीत सिंह अपने संकल्प को पूरा करने की ठान लेते हैं। शादी के लिए 20 हजार रुपये की शर्त रखी जाती है। एक सेठ से बीस हजार रुपये लेकर अजीत सिंह राजबाला के साथ शादी कर लेते हैं लेकिन उधार देने वाले सेठ शर्त रखते हैं, जब तक कर्ज नहीं चुकाएंगे तो उन दोनों को बहन-भाई की तरह रहना होगा। वो अपना प्रण निभाते हैं। एक राजा खुश होकर अजीत सिंह को 20 हजार रुपये देते हैं। वो कर्ज चुका कर अपनी गृहस्थी में प्रवेश करते हैं।
सांगी कलाकार सूरज बेदी ने इस सांग के जरिये जीवन में शुचिता का संदेश दिया। सांग की पटकथा औऱ प्रस्तुति ने समां बांध दिया। दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सूरज बेदी व उनके सह कलाकारों ने सांग की शानदार प्रस्तुति दी। रागिनियों पर दर्शक खूब झूमे। अदितिवन सूर्यकुंड समिति ने इस दो दिवसीय सांग महोत्सव के लिए हरियाणा कला परिषद का आभार जताया। हरियाणा कला परिषद ने हरियाणवी संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अभिमन्युपुर के सूर्यकुंड मेले में यह सांग की परंपरा शुरू की है।
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मार्तण्ड सूर्य की जयंती के उपलक्ष्य में शुरू हुआ सांग महोत्सव पहले दिन पूरे शबाब पर दिखा। दूरदराज से बड़ी संख्या में संस्कृति प्रेमी सांग देखने पहुंचे। हरियाणा के प्रसिद्ध सांगी सूरज बेदी ने सह कलाकारों के साथ अजीत सिंह राज बाला के किस्से पर सांग की शानदार प्रस्तुति दी। इस सांग के माध्यम से कलाकारों ने राजा अजीत सिंह की बेबसी और गरीबी के बावजूद खुद्दारी को दर्शाया। अजीत सिंह की बचपन में राजकुमारी से सगाई हो जाती है, लेकिन शादी की उम्र होते-होते अजीत सिंह कंगाल हो जाते हैं। जब उनको पता लगता है तो वो राजकुमारी को चिट्ठी लिखते हैं। राजकुमारी भी अपना प्रण पुगाने के लिए दृढ़ हो जाती हैं। किंतु अजीत सिंह की गरीबी और बेबसी आड़े आती है। राजा अजीत सिंह अपने संकल्प को पूरा करने की ठान लेते हैं। शादी के लिए 20 हजार रुपये की शर्त रखी जाती है। एक सेठ से बीस हजार रुपये लेकर अजीत सिंह राजबाला के साथ शादी कर लेते हैं लेकिन उधार देने वाले सेठ शर्त रखते हैं, जब तक कर्ज नहीं चुकाएंगे तो उन दोनों को बहन-भाई की तरह रहना होगा। वो अपना प्रण निभाते हैं। एक राजा खुश होकर अजीत सिंह को 20 हजार रुपये देते हैं। वो कर्ज चुका कर अपनी गृहस्थी में प्रवेश करते हैं।
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सांगी कलाकार सूरज बेदी ने इस सांग के जरिये जीवन में शुचिता का संदेश दिया। सांग की पटकथा औऱ प्रस्तुति ने समां बांध दिया। दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सूरज बेदी व उनके सह कलाकारों ने सांग की शानदार प्रस्तुति दी। रागिनियों पर दर्शक खूब झूमे। अदितिवन सूर्यकुंड समिति ने इस दो दिवसीय सांग महोत्सव के लिए हरियाणा कला परिषद का आभार जताया। हरियाणा कला परिषद ने हरियाणवी संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अभिमन्युपुर के सूर्यकुंड मेले में यह सांग की परंपरा शुरू की है।
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