{"_id":"58daae474f1c1b9b7663dbe2","slug":"wall-damaged-derailed-sannihit-sarovar-chhaitra-amawash-kurukshetra","type":"story","status":"publish","title_hn":"आस्था के दर पर गिरी व्यवस्था की दीवार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आस्था के दर पर गिरी व्यवस्था की दीवार
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
दीवार का हिस्सा धमाके के साथ गिर गया।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चैत्र अमावस्या पर सन्निहित सरोवर घाट की करीब 50 फीट लंबी और पांच फीट ऊंची दीवार का हिस्सा मंगलवार को धमाके के साथ गिर गया। इस हादसे में मथुरा से आए श्रद्धालुओं के जत्थे में शामिल 15 महिलाएं सहित 21 लोग जख्मी हो गए। यह घटना लगभग साढ़े 11 बजे हुई, तब तक चैत्र अमावस्या का मुहूर्त बीत चुका था और अधिकांश श्रद्धालु स्नान करके जा चुके थे। इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि यदि यह दीवार सुबह 8 बजकर 27 मिनट से पहले ढह जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
विज्ञापन
चैत्र अमावस्या का मुहूर्त सूर्य उदय से सुबह 8 बजकर 27 मिनट तक था। इस मौके पर सन्निहित सरोवर में स्नान का खास महत्व है। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लोग यहां श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं। इस साल चैत्र चौदस के साथ ही अमावस्या पड़ने से ज्यादातर श्रद्धालु 27 मार्च को ही स्नान कर जा चुके थे। तीर्थ पुरोहित पंडित अमन शर्मा ने बताया कि हिंदू परंपराओं के लिहाज से सूर्य उदय से ही तिथि मानी जाती है और 28 मार्च को सूर्य उदय से सुबह 8 बजकर 27 मिनट तक अमावस्या थी। इसलिए कुरुक्षेत्र, पिहोवा और अन्य प्रमुख तीर्थों पर काफी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे।
विज्ञापन
तीर्थ पुरोहितों और प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि मंगलवार को करीब 11 बजे जो घटनाक्रम हुआ, वह केडीबी और प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा है। इसका खामियाजा मथुरा और अन्य यात्रियों को दीवार ढहने के दौरान भुगतना पड़ा। यात्रियों और तीर्थ पुरोहितों के अलावा आसपास स्थित दुकानदारों का कहना है कि यह पहली बार था जब सरोवर के किसी घाट पर स्नान के लिए ने पानी था और ना ही पीने के लिए।
विज्ञापन
मथुरा से आए श्रद्धालु हुए जख्मी
सन्निहित के घाट पर दीवार ढहने से मथुरा वासी 65 वर्षीया तीर्थ यात्री प्रेमवती, आशा, निशा, कृष्णा, कुसुम, शन्नों, विमला, जोगिनी देवी, लक्ष्मी, रोशनी, प्रिया, वेदांती, राधा, रिंकू, बबलू, राकेश, सोनू सहित करीब 21 लोग घायल हो गए। इनमें सबसे ज्यादा चोट प्रेमवती के सिर में लगी है। प्रेमवती का खून लगातार बह रहा था, लेकिन तीर्थ पर किसी प्रकार की प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नहीं थी।
मंगलवार 11 बजे ऐसे हुआ हादसा
करीब एक दशक पूर्व सूर्य मंदिर और ध्रुव नारायण मंदिर के निकट सन्निहित सरोवर के एक घाट पर बड़ी ईंटों और सीमेंट के साथ दीवार बनाई गई थी, ताकि रेलिंग से इधर घाट सूखे होने पर इस घाट पर में पानी भरा जा सके और यात्री इसमें स्नान कर सकें। मंगलवार को इस दीवार का पूरा हिस्सा रेत की दीवार की तरह ढह गया। सतगिरी, पंडित पवन शर्मा, मोकागिरी, स्वामी हरिनारायण गिरी, सूर्यनारायण मंदिर के पुजारी, सुखदेव पंडित, राहुल पंडित, पंडित अमन, पंडित मोहन शर्मा, प्रकाश और श्याम शर्मा आदि तीर्थ पुरोहितों ने बताया कि जैसे ही सन्निहित के घाट पर दीवार गिरी, जोरदार धमाके की आवाज से लोग सरोवर की ओर लपके। लोगों के चेहरे पर दहशत दिख रही थी।
हादसे के चार घंटे बाद अधिकारी अनभिज्ञ, हैरत में पड़ गए मंत्री
सन्निहित सरोवर पर हुए हादसे के चार घंटे बाद भी केडीबी के और अन्य प्रशासनिक अधिकारी इस घटना से अनभिज्ञ थे। घटनाक्रम सुबह लगभग 11 बजे घटी, लेकिन दोपहर बाद साढ़े तीन बजे तक केडीबी और प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं थी। दरअसल पर्यटन मंत्री कुरुक्षेत्र के एक शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे। मंत्री को इस कार्यक्रम के बाद ब्रह्मसरोवर पर चलायमान पानी के लिए चल रहे प्रोजेक्ट का मुआयना करना था। इसलिए वे पहले ब्रह्मसरोवर स्थित कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कार्यालय में पहुंचे। यहां अमर उजाला ने पर्यटन मंत्री को सन्निहित की अव्यवस्था के साथ मंगलवार को 11 बजे हुए हादसे की सूचना दी तो अधिकारी मुंह ताकते रह गए।
जब पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा ने मौके पर मौजूद केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा, चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर और सिटी मजिस्ट्रेट गौरव अंतिल के साथ डीसी सुमेधा कटारिया से इस बारे में पूछा तो इन्होंने माना कि उक्त हादसे की जानकारी उन्हें नहीं है। यह सुनते ही पर्यटन मंत्री ने पूछा कि स्थानीय विधायक सुभाष सुधा कहां हैं तो मौके पर मौजूद लाडवा के विधायक डॉ.पवन सैनी ने बताया कि वे कश्मीर में हैं। पर्यटन मंत्री ने विधायक सुधा को फोन कर स्थिति की जानकारी दी। शर्मा ने ब्रह्मसरोवर वाटर प्रोजेक्ट के प्रोग्राम रद कर अधिकारियों को सन्निहित सरोवर के उस घाट पर पहुंचने को कहा, जहां सुबह यह हादसा हुआ था। सन्निहित के हालात देख पर्यटन मंत्री ने डीसी को सख्ती से आदेश दिए कि तीर्थ में यह दीवार कब और किस अधिकारी ने बनवाई थी, उसकी जांच कराई जाए। डीसी सुमेधा कटारिया भी सरोवर के यह हालात देख सकते में आ गई। उन्होंने केडीबी अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई।
लगातार उठाया सन्निहित का मामला
अमर उजाला ने सन्निहित तीर्थ और ब्रह्मसरोवर पर फैली अव्यवस्था का मामला पिछले कई दिनों से लगातार उठाया था, दुर्भाग्यवश आज के घटनाक्रम से एक बार फिर यहां की व्यवस्था की पोल खुल गई।
सांस्कृतिक राजधानी बनेगा कुरुक्षेत्र : पर्यटनमंत्री
प्रदेश के पर्यटन एवं शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि कुरुक्षेत्र भारत की नहीं, अब विश्व की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा। इस योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। इतना नहीं श्रीकृष्णा सर्किट परियोजना के अंतर्गत कुरुक्षेत्र के पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाएगा और सरकार की ओर से 48 कोस की परिक्रमा के तीर्थों का उद्धार किया जाएगा। श्रीकृष्णा सर्किट के प्रथम चरण में ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर, नरकरतारी और के तीर्थ स्थलों को विकसित किया जाएगा और इस चरण में सरकार की तरफ से करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
श्रीकृष्णा सर्किट व सरस्वती नदी महत्वाकांक्षी योजना
शिक्षा मंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की श्रीकृष्णा सर्किट और सरस्वती नदी एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके अलावा महाभारतकालीन कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिक्रमा के अंतर्गत आने वाले तीर्थ स्थलों को भी विकसित किया जाएगा। इसके लिए तीर्थ स्थलों को चिह्नित कर लिया गया है। सरकार इस दिशा में युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इन तमाम परियोजनाओं के चलते कुरुक्षेत्र भारत ही नहीं, विश्व की सांस्कृतिक राजधानी के रुप में विकसित होगा।
घटना से आहत हूं : डीसी
डीसी सुमेधा कटारिया ने माना कि सन्निहित तीर्थ पर दीवार गिरने की घटना घोर लापरवाही का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस घटना से आहत हूं। इस लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उसने खिलाफ कार्रवाई अवश्य होगी। इस मामले की जांच कराई जा रही है। डीसी ने माना कि यह केडीबी की लापरवाही का दूसरा बड़ा उदाहरण है कि दफ्तर से चंद कदम की दूरी पर सन्निहित सरोवर में हुई घटना का अधिकारियों को चार घंटे बाद भी नहीं पता था। यह लापरवाही अक्षम्य है।