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Kurukshetra News: सेहत के साथ भविष्य को बिगाड़ रहा सोशल मीडिया का इस्तेमाल
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कुरुक्षेत्र। डाॅ. सरेंद्र मंढान।
कुरुक्षेत्र। सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करना सेहत के साथ भविष्य को भी बिगाड़ रहा है। आज किशोरावस्था और युवावस्था के साथ वृद्धावस्था के लोग भी सोशल मीडिया के प्रभाव में है। इसका सीधा असर उनके काम करने की क्षमता, पढ़ाई, सेहत और भविष्य पर पड़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण संयुक्त परिवार का टूटना भी है।
एक सर्वे के मुताबिक देश में 12 साल से कम उम्र के 47 फीसदी बच्चे दिन में दो से चार घंटे सोशल मीडिया से बिताते हैं, जबकि युवाओं में सोशल मीडिया की लत हर उम्र के लोगों से ज्यादा है। एक सर्वे की माने तो सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक करतीं हैं और अधिक समय तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहतीं हैं। इस कारण उनमें सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव भी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।
एलएनजेपी अस्पताल के मनोरोग विभाग से मिली रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में सोशल मीडिया की लत के शिकार 30 से 40 लोग सामने आए हैं, जिनका उपचार चल रहा है। यह आंकड़ा इसलिए चौकाने वाला नहीं है, क्योंकि अभी तक देश में सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव के बारे में कोई जागरूक कार्यक्रम या अभियान नहीं चलाए जा रहे हैं। अगर इस विषय पर जागरूक कार्यक्रम चलाए जाए तो यह आंकड़ा बढ़ने में कोई देर नहीं लगेगी।
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सोशल मीडिया के इस्तेमाल से सक्रिय होता है डोपामाइन हार्मोन
एलएनजेपी के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढान ने बताया कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल से डोपामाइन हार्मोन सक्रिय होता है, जो आनंद की अनुभूति कराता है। इसमें और ज्यादा आनंद लेने के लिए लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल ज्यादा करने लगते हैं। उसके बाद उनको इसकी लत लग जाती है रोगी को उसका पता ही नहीं चलता है। इससे बचने के लिए अपने मोबाइल का नोटिफिकेशन बंद रखना चाहिए। दिन में दो से चार घंटे अपने दोस्त, बाजार मार्केट, घूमने में और परिवार के साथ बिताने चाहिए। कम से कम एक दिन के लिए मोबाइल नहीं चलाने का उपवास करना चाहिए।
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एक सर्वे के मुताबिक देश में 12 साल से कम उम्र के 47 फीसदी बच्चे दिन में दो से चार घंटे सोशल मीडिया से बिताते हैं, जबकि युवाओं में सोशल मीडिया की लत हर उम्र के लोगों से ज्यादा है। एक सर्वे की माने तो सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक करतीं हैं और अधिक समय तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहतीं हैं। इस कारण उनमें सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव भी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।
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एलएनजेपी अस्पताल के मनोरोग विभाग से मिली रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में सोशल मीडिया की लत के शिकार 30 से 40 लोग सामने आए हैं, जिनका उपचार चल रहा है। यह आंकड़ा इसलिए चौकाने वाला नहीं है, क्योंकि अभी तक देश में सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव के बारे में कोई जागरूक कार्यक्रम या अभियान नहीं चलाए जा रहे हैं। अगर इस विषय पर जागरूक कार्यक्रम चलाए जाए तो यह आंकड़ा बढ़ने में कोई देर नहीं लगेगी।
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सोशल मीडिया के इस्तेमाल से सक्रिय होता है डोपामाइन हार्मोन
एलएनजेपी के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढान ने बताया कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल से डोपामाइन हार्मोन सक्रिय होता है, जो आनंद की अनुभूति कराता है। इसमें और ज्यादा आनंद लेने के लिए लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल ज्यादा करने लगते हैं। उसके बाद उनको इसकी लत लग जाती है रोगी को उसका पता ही नहीं चलता है। इससे बचने के लिए अपने मोबाइल का नोटिफिकेशन बंद रखना चाहिए। दिन में दो से चार घंटे अपने दोस्त, बाजार मार्केट, घूमने में और परिवार के साथ बिताने चाहिए। कम से कम एक दिन के लिए मोबाइल नहीं चलाने का उपवास करना चाहिए।