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ईशोपनिषद कुल 18 मंत्रों का छोटा सा ग्रंथ, लेकिन ज्ञान एवं अध्यात्म का है महासागर: डॉ. रामचंद्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jun 2021 02:00 AM IST
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Upanishad is the ocean of knowledge and spirituality
केयू आईआईएचएस के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र ने कहा कि उपनिषद भारतीय ऋषियों की विश्व को बहुमूल्य देन है। देश विदेश के करोड़ों लोगों ने इस साहित्य से प्रेरणा एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया है। इससे निष्काम कर्म-ज्ञान, विद्या-अविद्या, प्रकृति-पुरुष, भोग-त्याग एवं जीवात्मा-परमात्मा आदि सूक्ष्म विषयों के यथार्थ स्वरूप एवं परस्पर समन्वय का उपदेश प्राप्त होता है। डा. रामचंद्र सोमवार को केंद्रीय आर्य युवक परिषद की ओर से आयोजित 241 वें राष्ट्रीय वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
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‘ईशोपनिषद में वैश्विक कल्याण की अवधारणा’ विषय पर उन्होंने बताया कि ईशोपनिषद कुल 18 मंत्रों का बहुत छोटा सा ग्रंथ है, पर इसे ज्ञान एवं अध्यात्म का महासागर कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। संसार के कण-कण में ईश्वर के वास होने का प्रथम उल्लेख इसी उपनिषद में प्राप्त होता है। ईश्वर सब जगह पर व्याप्त है और इसलिए व्यक्ति को किसी के भी धन का लालच नहीं करना चाहिए और त्यागपूर्वक उपभोग करना चाहिए, यह इस उपनिषद का मूल मंत्र है जिसे अपनाकर संपूर्ण विश्व में आपसी सद्भाव एवं प्रेम की स्थापना की जा सकती है। निष्काम कर्म पर जोर देते हुए इसमें भौतिक विज्ञान एवं आध्यात्मिक ज्ञान तथा परस्पर विरोधी तत्वों में संतुलन पर जोर दिया गया है। वर्तमान भौतिकवादी युग में सुख-समृद्धि बढ़ रही है पर व्यक्ति का जीवन पहले से अधिक तनाव ग्रस्त एवं चिंता पूर्ण हो गया है। ईशोपनिषद के दिव्य मंत्रों का अध्ययन एवं आचरण अंधकार को दूर करके आनंद एवं उल्लास पूर्ण मार्ग को प्रशस्त करता है। वेबिनार के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अनिल आर्य ने कहा कि यह व्याख्यान अत्यंत प्रेरक एवं प्रत्येक व्यक्ति को जीवन संदेश देने वाला है। इस सत्र को फेसबुक एवं यूट्यूब चैनल पर भी प्रसारित किया गया है, जिस पर देश-विदेश के सैकड़ों लोगों ने लाभ लिया है। वेबिनार की अध्यक्षता शिक्षाविद हरिओम शास्त्री ने की। इस अवसर पर हंसराज कॉलेज, दिल्ली की प्राचार्या डॉ. रमा, वैदिक विद्वान डॉ. वागीश आचार्य, डॉ. सीडीएस कौशल, आचार्य आनंद पुरुषार्थी एवं नरेश खन्ना सहित देशभर के विचारक, शिक्षाविद, लेखक, प्राध्यापक, शोधार्थी सहित अन्य शामिल हुए।
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