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केयू के जनसंचार संस्थान में दो कोर्स हुए बंद
कुुुरुक्ष्ाेत्र/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2015 01:00 AM IST
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केयू के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान ने विद्यार्थियों के कम रुझान को देखते हुए मास्टर डिग्री के दो प्रोफेशनल कोर्स बंद कर दिए हैं।
पांच वर्षों में यह दूसरा मौका है, जब कोई कोर्स बंद करने की नौबत आई है। इस एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स को समाप्त करना पड़ा है। इससे पहले विद्यार्थियों के कम रुझान को देखते हुए इस संस्थान के एमएससी म्यूजिक, मीडिया एंड इलेक्ट्रॉनिक कोर्स को बंद कर दिया गया था।
बता दें कि वर्ष 2008 में शुरू हुए दो वर्षीय एमएससी म्यूजिक, मीडिया एंड इलेक्ट्रॉनिक कोर्स में विद्यार्थियों को संगीत की बारीकियां बताई जाती थीं। कोर्स की फीस 35 हजार रुपये थी।
तकनीकी माध्यम से बताई गई जानकारियों से विद्यार्थी स्टूडियो में जाकर बड़े आराम से रिकॉर्डिंग और अन्य संबंधित कार्य कर सकते थे। लगभग 30 सीटों वाला यह कोर्स भी विद्यार्थियों को अपनी ओर खींचने में असफल रहा। हालांकि, इस कोर्स में शुरू में कुछ विद्यार्थी आए थे, लेकिन उचित दिशा-निर्देश न मिल पाने के कारण उनका जोश खत्म होता चला गया।
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उनकी हालत देखकर अन्य विद्यार्थियों ने भी इस कोर्स से किनारा कर लिया। आखिरकार यह कोर्स बंद कर दिया गया।
इसी संस्थान में एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स को सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम के तहत शुरू किया गया था। इसकी वार्षिक फीस 40 हजार रुपये थी। कोर्स में 30 सीटें थीं। यह कोर्स की 2008-09 में करीब 10 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ था।
वर्ष 2011-12 में पहली बार इस कोर्स की सभी 30 सीटें भर गईं। लेकिन, कक्षाएं शुरू होने के कुछ दिन के अंदर ही तीन विद्यार्थी इस कोर्स को छोड़ गए।
एक विद्यार्थी नहीं
जनसंचार संस्थान द्वारा इस कोर्स में टीवी, रेडियो, वेब, वीडियोग्राफी, स्टिल कैमरा, ऑडियो-वीडियो एडिटिंग, टेलीप्रोंप्टर, ऑडिया-वीडियो कंसोल, माइक सेटिंग तथा अन्य तकनीकी गतिविधियों का ज्ञान उपलब्ध कराया जाता है। इस इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स में आज एक भी विद्यार्थी नहीं है।
प्लेसमेंट न होना मुख्य कारण
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में विद्यार्थी रोजगार की चाह में और प्लेसमेंट की सुविधा की सोच कर प्रवेश लेते थे। लेकिन, संस्थान ने इस कोर्स के एक भी विद्यार्थी का प्लेसमेंट नहीं करवाया। इसलिए विद्यार्थियोें का रुझान कम हो गया।
ये थी कोर्स के लिए फैकल्टी
एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स के तहत पांच विषय पढ़ाए जाते थे। इसके लिए एक रेगुलर, जबकि तीन शिक्षक कॉन्ट्रेक्ट पर रखे गए थे। कोर्स चार सेमेस्टरों में पूरा होता था। आखिरी सेमेस्टर में एक मेजर प्रोजेक्ट तैयार करना होता था। इसके लिए एक स्पेशल टीचर को नियुक्त किया जाता था।
एक करोड़ की लागत से बना स्टूडियो
एमएससी म्यूजिक, मीडिया एंड इलेक्ट्रॉनिक और एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स की शुरुआत के साथ ही लगभग एक करोड़ की लागत से संस्थान में एक खास स्टूडियो भी बनाया गया था।
इसमें अत्याधुनिक कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, टेलीप्रोंप्टर, ऑडियो-वीडियो मिक्सर के साथ ही लगभग सभी तकनीकी उपकरण थे।
ये कहते हैं जनसंचार संस्थान के निदेशक
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के डायरेक्टर प्रो. एसएस बूरा ने माना कि विद्यार्थियों का रुझान कम होने के कारण इस कोर्स को बंद किया है। संस्थान प्लेसमेंट कार्यक्रम आयोजित करता था, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स के लिए अलग से प्लेसमेंट की व्यवस्था नहीं थी।
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पांच वर्षों में यह दूसरा मौका है, जब कोई कोर्स बंद करने की नौबत आई है। इस एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स को समाप्त करना पड़ा है। इससे पहले विद्यार्थियों के कम रुझान को देखते हुए इस संस्थान के एमएससी म्यूजिक, मीडिया एंड इलेक्ट्रॉनिक कोर्स को बंद कर दिया गया था।
बता दें कि वर्ष 2008 में शुरू हुए दो वर्षीय एमएससी म्यूजिक, मीडिया एंड इलेक्ट्रॉनिक कोर्स में विद्यार्थियों को संगीत की बारीकियां बताई जाती थीं। कोर्स की फीस 35 हजार रुपये थी।
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तकनीकी माध्यम से बताई गई जानकारियों से विद्यार्थी स्टूडियो में जाकर बड़े आराम से रिकॉर्डिंग और अन्य संबंधित कार्य कर सकते थे। लगभग 30 सीटों वाला यह कोर्स भी विद्यार्थियों को अपनी ओर खींचने में असफल रहा। हालांकि, इस कोर्स में शुरू में कुछ विद्यार्थी आए थे, लेकिन उचित दिशा-निर्देश न मिल पाने के कारण उनका जोश खत्म होता चला गया।
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उनकी हालत देखकर अन्य विद्यार्थियों ने भी इस कोर्स से किनारा कर लिया। आखिरकार यह कोर्स बंद कर दिया गया।
इसी संस्थान में एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स को सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम के तहत शुरू किया गया था। इसकी वार्षिक फीस 40 हजार रुपये थी। कोर्स में 30 सीटें थीं। यह कोर्स की 2008-09 में करीब 10 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ था।
वर्ष 2011-12 में पहली बार इस कोर्स की सभी 30 सीटें भर गईं। लेकिन, कक्षाएं शुरू होने के कुछ दिन के अंदर ही तीन विद्यार्थी इस कोर्स को छोड़ गए।
एक विद्यार्थी नहीं
जनसंचार संस्थान द्वारा इस कोर्स में टीवी, रेडियो, वेब, वीडियोग्राफी, स्टिल कैमरा, ऑडियो-वीडियो एडिटिंग, टेलीप्रोंप्टर, ऑडिया-वीडियो कंसोल, माइक सेटिंग तथा अन्य तकनीकी गतिविधियों का ज्ञान उपलब्ध कराया जाता है। इस इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स में आज एक भी विद्यार्थी नहीं है।
प्लेसमेंट न होना मुख्य कारण
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में विद्यार्थी रोजगार की चाह में और प्लेसमेंट की सुविधा की सोच कर प्रवेश लेते थे। लेकिन, संस्थान ने इस कोर्स के एक भी विद्यार्थी का प्लेसमेंट नहीं करवाया। इसलिए विद्यार्थियोें का रुझान कम हो गया।
ये थी कोर्स के लिए फैकल्टी
एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स के तहत पांच विषय पढ़ाए जाते थे। इसके लिए एक रेगुलर, जबकि तीन शिक्षक कॉन्ट्रेक्ट पर रखे गए थे। कोर्स चार सेमेस्टरों में पूरा होता था। आखिरी सेमेस्टर में एक मेजर प्रोजेक्ट तैयार करना होता था। इसके लिए एक स्पेशल टीचर को नियुक्त किया जाता था।
एक करोड़ की लागत से बना स्टूडियो
एमएससी म्यूजिक, मीडिया एंड इलेक्ट्रॉनिक और एमएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स की शुरुआत के साथ ही लगभग एक करोड़ की लागत से संस्थान में एक खास स्टूडियो भी बनाया गया था।
इसमें अत्याधुनिक कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, टेलीप्रोंप्टर, ऑडियो-वीडियो मिक्सर के साथ ही लगभग सभी तकनीकी उपकरण थे।
ये कहते हैं जनसंचार संस्थान के निदेशक
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के डायरेक्टर प्रो. एसएस बूरा ने माना कि विद्यार्थियों का रुझान कम होने के कारण इस कोर्स को बंद किया है। संस्थान प्लेसमेंट कार्यक्रम आयोजित करता था, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्स के लिए अलग से प्लेसमेंट की व्यवस्था नहीं थी।