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Kurukshetra News: साइबर ठगी के मामले में दो आरोपियों को जमानत, अदालत ने लगाई शर्तें
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कुरुक्षेत्र। साइबर ठगी के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं अवकाशकालीन न्यायाधीश महावीर सिंह की अदालत ने दो आरोपियों हर्ष सैनी और रितिक रावत को नियमित जमानत प्रदान की है। दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना कुरुक्षेत्र में वर्ष 2025 में दर्ज एफआईआर के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 61(2) के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अदालती आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता गुरभजन सिंह ने आरोप लगाया था कि 18 अप्रैल 2025 को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर आए एक फोन कॉल के दौरान उनसे कार्ड संबंधी जानकारी लेकर 87,750 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। शिकायत के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने हर्ष सैनी, रितिक रावत तथा एक अन्य आरोपी चिराग डाबर को गिरफ्तार किया। रितिक रावत की निशानदेही पर 900 रुपये भी बरामद किए गए।
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता को पूरी राशि वापस कर दी गई है तथा दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है। शिकायतकर्ता स्वयं अदालत में उपस्थित हुआ और बयान दिया कि उसे संपूर्ण राशि प्राप्त हो चुकी है तथा आरोपियों को जमानत दिए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।
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राज्य की ओर से लोक अभियोजक ने साइबर अपराध में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। हालांकि अदालत ने माना कि मामले में आरोपित अपराध समझौता योग्य है, शिकायतकर्ता को पूरी राशि वापस मिल चुकी है तथा आरोपियों के खिलाफ किसी अन्य आपराधिक मामले का रिकॉर्ड नहीं है।
इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके एवं समान राशि के एक-एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने शर्त लगाई कि आरोपी बिना न्यायालय की अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे, समान प्रकृति का कोई अपराध नहीं करेंगे तथा किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेंगे।
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अदालती आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता गुरभजन सिंह ने आरोप लगाया था कि 18 अप्रैल 2025 को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर आए एक फोन कॉल के दौरान उनसे कार्ड संबंधी जानकारी लेकर 87,750 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। शिकायत के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने हर्ष सैनी, रितिक रावत तथा एक अन्य आरोपी चिराग डाबर को गिरफ्तार किया। रितिक रावत की निशानदेही पर 900 रुपये भी बरामद किए गए।
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जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता को पूरी राशि वापस कर दी गई है तथा दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है। शिकायतकर्ता स्वयं अदालत में उपस्थित हुआ और बयान दिया कि उसे संपूर्ण राशि प्राप्त हो चुकी है तथा आरोपियों को जमानत दिए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।
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राज्य की ओर से लोक अभियोजक ने साइबर अपराध में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। हालांकि अदालत ने माना कि मामले में आरोपित अपराध समझौता योग्य है, शिकायतकर्ता को पूरी राशि वापस मिल चुकी है तथा आरोपियों के खिलाफ किसी अन्य आपराधिक मामले का रिकॉर्ड नहीं है।
इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके एवं समान राशि के एक-एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने शर्त लगाई कि आरोपी बिना न्यायालय की अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे, समान प्रकृति का कोई अपराध नहीं करेंगे तथा किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेंगे।