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कुरुक्षेत्र की धरा में है पौराणिक संस्कृति, संस्कारों और विचारों को पुनर्जीवित करने की अपार संभावनाएं : गजेंद्र शेखावत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2024 03:21 AM IST
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There is immense potential in the land of Kurukshetra to revive the mythological culture, traditions and ideas: Gajendra Shekhawat.
कुरुक्षेत्र। पूरे देश में केवल धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर ही भारत की पौराणिक संस्कृति, संस्कारों और विचारों को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए अपार संभावनाएं हैं। इसी धरा से पूरे विश्व को आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी समझाया जा सकता है। इसलिए देश की भावी पीढ़ी को आस्था के साथ जोड़ने के लिए देश के सभी संतों और विद्वानों को एक मंच पर बैठकर मंथन करना होगा।
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यह आह्वान केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने किया। वे मंगलवार को गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के प्रयास से और केडीबी के तत्वावधान में कुवि के सीनेट हॉल में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर आयोजित पहले अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन की यह बड़ी पहल है। भविष्य में इस तरह के सम्मेलन क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग स्थानों पर होने चाहिए।
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सभी संत जनों ने संकल्प लिया कि बांग्लादेश में हिंदुओं और मंदिरों की रक्षा के लिए गीता जयंती दिवस पर गीता श्लोकों को समर्पित किया जाएगा। इस दौरान देश के 35 धामों से आए संतों ने अपने परिचय देने के साथ-साथ मंदिरों के प्रति युवाओं की आस्था फिर से बने, जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा से स्वामी ज्ञानानंद के प्रयास से देश के सभी प्रमुख धामों के संत और संचालक एक मंच पर एकत्रित हुए हैं। इस सम्मेलन से भारत के मंदिरों के प्रति आस्था बने, इसका सूत्रपात महोत्सव के दौरान हो गया है। इस देश की संस्कृति और सभ्यता हजारों वर्ष पुरानी है लेकिन समय के बदलाव के साथ-साथ अन्य देशों की सभ्यता और संस्कृति लुप्त हो गई जबकि भारत की सनातन संस्कृति आज भी संरक्षित है।
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उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा व अर्चना करने के स्थान मात्र नहीं है, अपितु सेवा, सद्भावना, स्वच्छता, संवेदनशीलता और भारत सरकार के प्रयास से सशक्तिकरण का केंद्र भी है। इस सांस्कृतिक सशक्तिकरण के कारण ही भारत को भारत बनाए रखा गया है। इस देश में समय के परिवर्तन के साथ संतों ने विचार व्यक्त किए कि मंदिरों से युवा पीढ़ी विमुख हो रही है। इसके कारणों पर मंथन करने और युवाओं को सही राह पर लाने की शुरुआत इस सम्मेलन से हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं और मंदिरों की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है। इसके लिए सामूहिक भूमिका अहम योगदान दे सकती है। इसके लिए शस्त्रों का प्रयोग किए बिना सभी धामों पर यहां पहुंचे संतों और संचालकों को हिंदुओं और मंदिरों की सुरक्षा के लिए रोज प्रार्थना करनी होगी। इससे बांग्ला देश में रहने वाले हिंदुओं का भरोसा बढ़ेगा और धीरज भी बढ़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा से महोत्सव के दौरान अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन के आगाज से निश्चित ही एक नए युग का सूत्रपात होगा। इससे देश के सभी तीर्थ एक सूत्र में बंधेंगे और जिससे देश की भावी पीढ़ी को पौराणिक संस्कृति और संस्कारों से जोड़ा जा सकेगा।

सम्मेलन में श्री भद्रकाली शक्तिपीठ के पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने कहा कि देश के सभी मंदिरों को लेकर एक ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए। इस सम्मेलन में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, राजकोट से संत परमात्मानंद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय सहित अन्य संतों ने भी विचार रखे तो वहीं संत राजेश कुमार, वैष्णो देवी मंदिर के मुख्य पुजारी सुदर्शन महाराज, मां भद्रकाली शक्तिपीठ के संचालक सतपाल शर्मा, काशी से श्रीकांत मिश्रा, गंगोत्री रावल हरीश सहित तीर्थ स्थलों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव भी दिए।
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