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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाएगी देश में परिवर्तन, होगा नए युग का सूत्रपात : दत्तात्रेय
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कुरुक्षेत्र। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई नई शिक्षा नीति देश में बड़ा परिर्वतन लाने वाली है। इससे नए युग का सूत्रपात होगा। इससे एक नई चेतना और क्रांति पैदा होगी, जिससे वर्ष 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र बन सकेगा। ये विचार राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने व्यक्त किए।
वे सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन, हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दिशा में विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की आत्मा होती है। वर्ष 2047 तक यदि हम एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और वैश्विक नेतृत्व वाला भारत बनाना चाहते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगी। पूरी मानवता को गीता संदेश के जरिए ज्ञान देने वाली धरा कुरुक्षेत्र से इस आयोजन के जरिए शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन के नए युग का सूत्रपात कर रहे हैं, जो विकसित भारत 2047 के सपने की ओर एक सार्थक कदम है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का संचारक नहीं होता, वह चरित्र निर्माण का शिल्पकार भी होता है। शिक्षक के शब्द विद्यार्थी के भविष्य को आकार देते हैं।
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राज्यपाल ने शिक्षकों से अपील की और कहा कि वे मास्टर न बने बल्कि शिक्षक के तौर एक डिजिटल ज्ञान बैंक बनकर विद्यार्थियों को तकनीकी नवाचारों से जोड़े और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूर्ण करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें। वे ऐसे बच्चे तैयार करें, जो नौकरी मांगने वाले नहीं देने वाले बनकर संस्थान से निकलें। विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्य भी संजोए। शिक्षक अपने कार्य के प्रति हर तरह से स्मार्ट हो। एनसीटीई के चेयरपर्सन प्रो. पंकज अरोड़ा ने भी इस दौरान नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षक तैयार करने पर बल दिया।
...जब केंद्रीय मंत्री होते हुए छुए अपने शिक्षक के पांव
एक आर्दश शिक्षक कैसा होना चाहिए, यह पाठ राज्यपाल ने अपने निजी अनुभवों के जिक्र के साथ पढ़ाया। उन्होंने बताया कि स्कूल स्तर पर उनके शिक्षक रामआया थे, जो बेहद गुणी थे और हर विद्यार्थी उनसे प्रभावित रहता था। वे हर गुण से इस तरह पारंगत थे कि पूरी जिंदगी उन्हें नहीं भूल सकते। यहां तक कि वर्ष 1998 में जब वे केंद्रीय शहरी विकास मंत्री थे तो हैदराबाद विश्वविद्यालय में अचानक मुलाकात हुई तो उन्होंने उनके पांव छुए। उन्होंने एक केंद्रीय मंत्री की ओर से पांव छूने से हैरानी हुई तो उन्हें याद दिलाया कि उनकी ओर से दी शिक्षा की बदौलत ही वे यहां तक पहुंचे हैं। ऐसे में वे गौरव से भर उठे। हर शिक्षक ऐसा होना चाहिए कि उनके पढ़ाए बच्चों में इस तरह आदर भावना बने।
पांच साल की पौत्री की सोच देख मैं हैरान
राज्यपाल ने कहा कि उनकी पांच साल की पौत्री है, जो चंद्रमा पर जाने के बारे में उनसे सवाल करती है। यह नई पीढि़यों की सोच की झलक है। ऐसे बच्चों के भविष्य को आकार देने वाले शिक्षकों की जरूरत है। आज जो बच्चे स्कूलों में हैं 2047 तक उनके हाथों में ही देश का भविष्य होगा।
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वे सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन, हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दिशा में विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की आत्मा होती है। वर्ष 2047 तक यदि हम एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और वैश्विक नेतृत्व वाला भारत बनाना चाहते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगी। पूरी मानवता को गीता संदेश के जरिए ज्ञान देने वाली धरा कुरुक्षेत्र से इस आयोजन के जरिए शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन के नए युग का सूत्रपात कर रहे हैं, जो विकसित भारत 2047 के सपने की ओर एक सार्थक कदम है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का संचारक नहीं होता, वह चरित्र निर्माण का शिल्पकार भी होता है। शिक्षक के शब्द विद्यार्थी के भविष्य को आकार देते हैं।
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राज्यपाल ने शिक्षकों से अपील की और कहा कि वे मास्टर न बने बल्कि शिक्षक के तौर एक डिजिटल ज्ञान बैंक बनकर विद्यार्थियों को तकनीकी नवाचारों से जोड़े और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूर्ण करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें। वे ऐसे बच्चे तैयार करें, जो नौकरी मांगने वाले नहीं देने वाले बनकर संस्थान से निकलें। विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्य भी संजोए। शिक्षक अपने कार्य के प्रति हर तरह से स्मार्ट हो। एनसीटीई के चेयरपर्सन प्रो. पंकज अरोड़ा ने भी इस दौरान नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षक तैयार करने पर बल दिया।
...जब केंद्रीय मंत्री होते हुए छुए अपने शिक्षक के पांव
एक आर्दश शिक्षक कैसा होना चाहिए, यह पाठ राज्यपाल ने अपने निजी अनुभवों के जिक्र के साथ पढ़ाया। उन्होंने बताया कि स्कूल स्तर पर उनके शिक्षक रामआया थे, जो बेहद गुणी थे और हर विद्यार्थी उनसे प्रभावित रहता था। वे हर गुण से इस तरह पारंगत थे कि पूरी जिंदगी उन्हें नहीं भूल सकते। यहां तक कि वर्ष 1998 में जब वे केंद्रीय शहरी विकास मंत्री थे तो हैदराबाद विश्वविद्यालय में अचानक मुलाकात हुई तो उन्होंने उनके पांव छुए। उन्होंने एक केंद्रीय मंत्री की ओर से पांव छूने से हैरानी हुई तो उन्हें याद दिलाया कि उनकी ओर से दी शिक्षा की बदौलत ही वे यहां तक पहुंचे हैं। ऐसे में वे गौरव से भर उठे। हर शिक्षक ऐसा होना चाहिए कि उनके पढ़ाए बच्चों में इस तरह आदर भावना बने।
पांच साल की पौत्री की सोच देख मैं हैरान
राज्यपाल ने कहा कि उनकी पांच साल की पौत्री है, जो चंद्रमा पर जाने के बारे में उनसे सवाल करती है। यह नई पीढि़यों की सोच की झलक है। ऐसे बच्चों के भविष्य को आकार देने वाले शिक्षकों की जरूरत है। आज जो बच्चे स्कूलों में हैं 2047 तक उनके हाथों में ही देश का भविष्य होगा।