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Kurukshetra News: किरमच का खेल मैदान झाड़ियों से बदहाल, अब बना भूसे का गोदाम
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कुरुक्षेत्र। खेल मैदान के मुख्य गेट पर लगी चर्चित खिलाड़ियों की फोटो व बाहर लगा भूसे का ढेर। स
कुरुक्षेत्र। किरमच गांव में करीब चार एकड़ में बना खेल मैदान बदहाली का शिकार हो चुका है। खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए तैयार किया गया मैदान अब पशुओं के चारे का गोदाम बनता जा रहा है। मैदान के मुख्य गेट पर प्रदेश और देश के चर्चित खिलाड़ियों की तस्वीरें लगी हैं लेकिन अंदर झाड़ियां, भूसा और गंदगी पसरी हुई है। मैदान में बड़ी-बड़ी घास और झाड़ियां उगी हुई हैं, ट्रैक खराब हो चुका है और पानी व शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी बदहाल हैं।
करीब 10 साल पहले मैदान की चाहरदीवारी की गई थी और दो साल पहले इसका मुख्य गेट तैयार हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार ऐसा भव्य गेट आसपास के किसी ग्रामीण खेल मैदान में देखने के लिए नहीं मिलता।
गांव में बड़ी संख्या में खिलाड़ी हैं। हाल ही में गांव की क्रिकेट टीम ने ईशाकपुर में आयोजित प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया था। इसके बावजूद सरकार की ओर से मैदान के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं मिल रही। हालांकि गांव को वॉलीबॉल की नर्सरी मिली हुई है लेकिन वह नहर के पास बने कोर्ट में संचालित हो रही है, जहां 100 से अधिक बच्चे अभ्यास कर रहे हैं।
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हमारे अधीन नहीं है यह स्टेडियम : डीएसओ
जिला खेल अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि यह खेल मैदान पंचायत के अधीन आता है। पंचायत ही इसकी देखरेख करती है। जो खेल मैदान विभाग के अधीन हैं, उनमें सुविधाओं के लिए काम किया जा रहा है।
पंचायत ने अपने स्तर पर बनाया मैदान : सरपंच
सरपंच रणबीर सिंह ने कहा कि पंचायत ने अपने स्तर पर यह मैदान तैयार करवाया था। सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिलने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पंचायत साल में दो से तीन बार मैदान की सफाई करवाती है लेकिन पंचायत की भी सीमाएं हैं। यहां न कोच है और न ही खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं। अगर सरकार कोच और सुविधाएं उपलब्ध करवाए तो मैदान फिर से सुचारू रूप से चल सकता है।
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करीब 10 साल पहले मैदान की चाहरदीवारी की गई थी और दो साल पहले इसका मुख्य गेट तैयार हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार ऐसा भव्य गेट आसपास के किसी ग्रामीण खेल मैदान में देखने के लिए नहीं मिलता।
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गांव में बड़ी संख्या में खिलाड़ी हैं। हाल ही में गांव की क्रिकेट टीम ने ईशाकपुर में आयोजित प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया था। इसके बावजूद सरकार की ओर से मैदान के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं मिल रही। हालांकि गांव को वॉलीबॉल की नर्सरी मिली हुई है लेकिन वह नहर के पास बने कोर्ट में संचालित हो रही है, जहां 100 से अधिक बच्चे अभ्यास कर रहे हैं।
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हमारे अधीन नहीं है यह स्टेडियम : डीएसओ
जिला खेल अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि यह खेल मैदान पंचायत के अधीन आता है। पंचायत ही इसकी देखरेख करती है। जो खेल मैदान विभाग के अधीन हैं, उनमें सुविधाओं के लिए काम किया जा रहा है।
पंचायत ने अपने स्तर पर बनाया मैदान : सरपंच
सरपंच रणबीर सिंह ने कहा कि पंचायत ने अपने स्तर पर यह मैदान तैयार करवाया था। सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिलने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पंचायत साल में दो से तीन बार मैदान की सफाई करवाती है लेकिन पंचायत की भी सीमाएं हैं। यहां न कोच है और न ही खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं। अगर सरकार कोच और सुविधाएं उपलब्ध करवाए तो मैदान फिर से सुचारू रूप से चल सकता है।