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Kurukshetra News: चार दिन रत्नावली में दिखेंगे हरियाणवी संस्कृति के विविध रंग
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) में 1 से 4 नवंबर तक राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव का आयोजन होगा। इस चार दिवसीय महोत्सव में हरियाणवी संस्कृति के विविध रंग देखने को मिलेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक नवंबर को सुबह 10 बजे इसका शुभारंभ करेंगी। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी समारोह से जुड़ेंगे। महोत्सव में लोकगीत, रागिनी, लोक नृत्य, हरियाणवी फैशन शो, नाटक और संगीत संध्या जैसे कार्यक्रम होंगे।
विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रतिभा के साथ हरियाणा की लोक परंपराओं और कलात्मक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। पहले दिन भजन, लोक नृत्य और रागिनी प्रतियोगिताएं होंगी। दो नवंबर को हरियाणवी फैशन शो और प्रश्नोत्तरी जैसी प्रस्तुतियां होंगी। तीन नवंबर को हरियाणवी चौपाल, समूह नृत्य और लघु फिल्म से जुड़ी प्रस्तुतियां होंगी। चार नवंबर को पेशेवर कलाकारों की रागिनी प्रतियोगिता और पुरस्कार वितरण के साथ महोत्सव का समापन होगा। समापन समारोह शाम 3:30 बजे निर्धारित है।
पारंपरिक कला एवं शिल्प
महोत्सव में मंचीय कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक कला एवं शिल्प को भी विशेष स्थान मिलेगा। दो से चार नवंबर तक लोक चित्रकला की कार्यशाला और प्रदर्शनी आयोजित होगी। बोहिया, पीढ़ा और सांझी जैसी पारंपरिक कलात्मक वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। क्रश हॉल में पुरानी एवं प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं का संग्रह प्रदर्शित होगा। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति को युवा पीढ़ी से जोड़ना है।
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विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रतिभा के साथ हरियाणा की लोक परंपराओं और कलात्मक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। पहले दिन भजन, लोक नृत्य और रागिनी प्रतियोगिताएं होंगी। दो नवंबर को हरियाणवी फैशन शो और प्रश्नोत्तरी जैसी प्रस्तुतियां होंगी। तीन नवंबर को हरियाणवी चौपाल, समूह नृत्य और लघु फिल्म से जुड़ी प्रस्तुतियां होंगी। चार नवंबर को पेशेवर कलाकारों की रागिनी प्रतियोगिता और पुरस्कार वितरण के साथ महोत्सव का समापन होगा। समापन समारोह शाम 3:30 बजे निर्धारित है।
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पारंपरिक कला एवं शिल्प
महोत्सव में मंचीय कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक कला एवं शिल्प को भी विशेष स्थान मिलेगा। दो से चार नवंबर तक लोक चित्रकला की कार्यशाला और प्रदर्शनी आयोजित होगी। बोहिया, पीढ़ा और सांझी जैसी पारंपरिक कलात्मक वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। क्रश हॉल में पुरानी एवं प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं का संग्रह प्रदर्शित होगा। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति को युवा पीढ़ी से जोड़ना है।
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