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Kurukshetra News: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवि व ठेकेदार का विवाद, सत्र न्यायालय में कल सुनवाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 02:09 AM IST
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The dispute between the university and the contractor reached the Supreme Court, hearing in the Sessions Court tomorrow.
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कुवि) और ठेकेदार नौशाद अली के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। विश्वविद्यालय ने स्पेशल लीव पिटीशन (क्रिमिनल) दाखिल कर इलाका मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी है जिसमें विश्वविद्यालय के पूर्व एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पंकज शर्मा से संबंधित दस्तावेज मंगवाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को इस मामले में सुनवाई के दौरान दस्तावेज मंगवाने वाले सम्मन पर छह सप्ताह के लिए स्टे लगा दिया और अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की है।
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यह विवाद जून 2023 से जुड़ा है, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), अंबाला ने विश्वविद्यालय के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पंकज शर्मा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता नौशाद अली ने आरोप लगाया था कि शर्मा ने उनके और उनके भाई के पेंटिंग कार्य के पेंडिंग बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगी। इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत पंकज शर्मा पर अलग से मुकदमा चल रहा है। इसके बाद नौशाद अली ने इलाका मजिस्ट्रेट कोर्ट में नई शिकायत दर्ज की, जिसमें विश्वविद्यालय अधिकारियों पर बिल रोकने और पेमेंट न करने का आरोप लगाया गया। मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 94 के तहत पंकज शर्मा से जुड़े दस्तावेज मंगवाने का आदेश दिया।
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विश्वविद्यालय का तर्क है कि शिकायत में कोई अपराध बनता ही नहीं, इसलिए मजिस्ट्रेट को दस्तावेज मंगवाने का अधिकार नहीं था। हाई कोर्ट ने भी इस पहलू को नजरअंदाज किया।
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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी में विश्वविद्यालय ने दावा किया कि शिकायत फर्जी लगती है और इससे उनके कर्मचारी पर चल रहे प्रॉसीक्यूशन को प्रभावित किया जा सकता है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि शिकायत में अपराध नहीं बनता, इसलिए मजिस्ट्रेट दस्तावेज नहीं मंगा सकता था। सम्मन पर स्टे लगाते हुए कोर्ट ने नौशाद अली को नोटिस जारी किया है कि वे एक अप्रैल को पेश होकर बताएं कि क्यों एसएलपी और अंतरिम राहत नहीं दी जाए।




ठेकेदार नौशाद अली का पक्ष अलग है। उन्होंने विश्वविद्यालय पर कमीशन मांगने और पेमेंट रोकने के आरोप लगाए हैं। मूल विवाद आयु सीमा पार कर चुके व्यक्ति को एक्शन के पद पर भर्ती करने से भी जुड़ा है, जिसकी सुनवाई कल सत्र न्यायालय में होनी है। सत्र न्यायालय ने पिछली तारीख में विश्वविद्यालय को भर्ती से जुड़े सारे दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया था।
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