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कुरुक्षेत्र: 22 साल तक लड़ी लड़ाई, तब कमान हरियाणा के हाथ आई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Feb 2023 02:02 AM IST
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The battle fought for 22 years, then the command came in the hands of Haryana
कुरुक्षेत्र। प्रदेश के गुरुघरों की कमान अपने ही सिखों के हाथ हो और इन गुरुघरों में होने वाली आमदन भी यहीं पर खर्च की जाए, ताकि प्रदेश के सिखों के लिए बेहतर कार्य किया जा सके। इस सोच को परवान चढ़ने में 22 साल लग गए। इस दौरान कड़ा संघर्ष भी करना पड़ा। जगदीश सिंह झींडा, दीदार सिंह नलवी व प्रदेश के अन्य सिख नेताओं की अगुवाई में चलाया गया आंदोलन रंग लाया तो अब कमान भी अपने सिखों के हाथ में आ सकी।
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बता दें कि प्रदेश के सिखों ने दिसंबर 2001 में संघर्ष शुरू किया था। 14 जुलाई 2014 को तत्कालीन हुड्डा सरकार ने भी इस पर मुहर लगाते हुए प्रदेश के लिए अलग गुरुद्वारा एक्ट बनाया तो वहीं एडहॉक कमेटी का गठन भी किया गया, जिसकी कमान जगदीश सिंह झींडा को मिली थी। सरकार के इस फैसले के विरोध में एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 20 सितंबर को अलग कमेटी बनाए जाने के हक में फैसला दिया था। उस दिन ही प्रदेश के गुरुद्वारों की कमान अपने हाथ में लेने की पहल हो गई थी, लेकिन सुप्रीम आदेश के बाद भी इसके सिरे चढ़ने में करीब पांच माह लग गए। अब भले ही प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एडहॉक कमेटी द्वारा लिए जा रहे कब्जे के तरीके पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं प्रदेश के सिखों के हाथ कमान आने पर संतोष भी जाहिर किया जा रहा है।
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वाहेगुरु का शुक्र है, हमारे सिखों के हाथ आई कमान : महंत करमजीत
कमेटी के प्रधान महंत करमजीत सिंह का कहना है कि यह वाहेगुरु का शुक्र है कि प्रदेश के सिखों की उम्मीदें आज पूरी हो गई हैं। सिखों के सबसे बड़े मुख्यालय पर आज कमेटी ने अपना संचालन संभाल लिया है और अब यह कार्रवाई धीरे-धीरे आगे बढ़ाई जाएगी। संगत बेहद खुश है कि गुरुघरों की कमान अब उनके हाथ है। अब सभी सिखों को एक हो जाना चाहिए ताकि बेहतर कार्य हो सके। एसजीपीसी को भी बड़े भाई की तरह बड़प्पन दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कोई विरोध प्रबंधन संभालने के दौरान नहीं हुआ बल्कि हर किसी ने भाईचारा दिखाया है। अब एसजीपीसी प्रधान को खुद सेवा एचएसजीपीसी के हाथ में सौंप देनी चाहिए।
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कमेटी ने प्रबंधन नहीं संभाला बल्कि दबंगई दिखाई : झींडा
प्रदेश की अलग कमेटी के लिए संघर्ष करने वाले सिख नेता एवं अपनी अलग कमेटी बना चुके जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एचएसजीपीसी ने गुरुद्वारा छठी पातशाही में प्रबंधन नहीं संभाला है, बल्कि दबंगई दिखाई है। यह सरकार के इशारे पर हो रहा है, लेकिन सरकार को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाए जाने के आदेश दिए थे न कि इस तरह कब्जा करने के। कमेटी को चाहिए था कि सुप्रीम कोर्ट से ही प्रबंधन दिलाए जाने को लेकर आदेश लेते और पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए प्रबंधन लिया जाता, लेकिन जो कटर से ताले काटकर अपने ताले लगा देना सरेआम दबंगई है। झींडा ने कहा कि इस कमेटी ने पहले नाडा साहब फिर अंबाला और अब यहां ऐसी हरकत की है, जो निंदनीय है। इसके विरोध में वे संगत के बीच जाएंगे। साथ ही वे सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से भी कानूनी राय ले रहे हैं। झींडा ने कहा कि उन्होंने महंत करमजीत के पाले में ही भाईचारे की गेंद डाली थी, लेकिन यह वादाखिलाफी की है। महंत करमजीत ने उन्हें भरोसा देकर अंधेरे में रखा है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही प्रबंधन लेते तो बच जाते 50 करोड़ : नलवी
प्रदेश में अलग कमेटी के लिए संर्घषरत रहे सिख नेता दीदार सिंह नलवी का कहना है कि आज से एसजीपीसी का प्रदेश के गुरुद्वारों से राज खत्म हो गया है। अब प्रदेश के सिखों का अपने गुरुद्वारों पर राज शुरू हुआ है, जो स्वागत योग्य है। यह काम सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही 24 घंटे में हो जाना चाहिए था। नलवी ने कहा कि प्रदेश के गुरुद्वारों की हर माह करीब 10 करोड़ की आमदन है और अब तक पांच माह में करीब 50 करोड़ की आमदन एसजीपीसी के पास जा चुकी है। देर से ही सही पर अब प्रबंधन अपने सिखों के हाथ आया है, जो स्वागत योग्य है। अब उम्मीद है कि महंत करमजीत सिंह के नेतृत्व में कमेटी प्रदेश के सिखों व गुरुघरों के लिए बेहतर कार्य करेगी।
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