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आतंकी न मिटा सकें किसी का सुहाग, ऐसा कदम उठाए सरकार : प्रेरणा
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कुरुक्षेत्र। सरकार ऐसा कदम उठाए कि आतंकी सिर उठाकर न देख सकें। वे न किसी का सुहाग मिटा सकें और न किसी का घर उजाड़ सकें। आतंकवाद को पूरी तरह से नेस्तनाबूत कर देना चाहिए। इसके लिए पूरा देश सरकार के साथ खड़ा दिखाई देगा। उक्त बातें पहलगाम की घटना से आहत होकर प्रेरणा ने कही। वे बीते दिनों को याद कर भावुक हो गईं और उन्होंने बताया कि अक्तूबर 2016 में कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए उनके पति मनदीप सिंह भी देश के लिए शहीद हो गए थे।
प्रेरणा ने बताया कि अनटेहड़ी गांव के रहने वाले मनदीप सिंह 17 सिख रेजीमेंट के जवान थे। एक नवंबर 2016 को जब उनका शव घर पहुंचा था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की आंखें भर आईं थी। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले पर हरियाणा पुलिस में बतौर मुख्य सिपाही के पद पर तैनात प्रेरणा ने खुल कर चर्चा की और कहा कि उन्हें इस खबर ने पूरी तरह से झकझोर दिया है।
करीब नौ साल पहले पति मनदीप की शहादत फिर एकाएक सामने आ गई। करनाल की जिस महिला ने अपने सैन्य अधिकारी पति को शादी के कुछ ही दिनों बाद खो दिया है, वह उनका दर्द महसूस कर सकती है। यह ऐसा दर्द है जिसका कोई अंत नहीं। वही नहीं जिनकी भी जान इस वारदात में गई हैं, उनके परिवारों के जख्म जिंदगी भर नहीं भरे जा सकते।
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प्रेरणा कहती हैं कि पति खोने के बाद उन्हें जो जख्म मिला है, उससे वह इस कदर आहत हैं कि ऐसी खबर देखने व सुनने तक की हिम्मत नहीं रही है। गत दिवस कश्मीर में हुई वारदात की खबर जैसे ही उन्होंने मोबाइल पर देखी तो वह सन्न रह गई। वह समझ नहीं पा रही है कि आखिर हमारे जवान व नागरिक कब तक आतंकियों को निशाना बनाते रहेंगे। इसके लिए सरकार को राजनीति से दूर हटते हुए बड़ा और सख्त कदम उठाना ही पड़ेगा। आज भारत का पूरी दुनिया में दबदबा है इसके बावजूद इस तरह की वारदातें बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। सत्तासीन ही नहीं हर राजनीतिक दल को इसमें एकजुटता दिखानी होगी।
ऐसी वारदात से सहम जाता है हर परिवार : शर्मा
सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार आरपी शर्मा का कहना है कि जब आतंकी ऐसी वारदात को अंजाम दे देते हैं तो न केवल संबंधित परिवार व देश की बड़ी हानि होती है। हर कोई सहम जाता है। रह-रहकर आतंकी इस तरह की वारदात को अंजाम देते आए हैं, जिन पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाए जाने की जरूरत है। उनका कहना था कि ऐसे हम कब तक अपने जवान व नागरिकों को खोते रहेंगे। पहलगाम की वारदात से पूरा देश सन्न है।
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प्रेरणा ने बताया कि अनटेहड़ी गांव के रहने वाले मनदीप सिंह 17 सिख रेजीमेंट के जवान थे। एक नवंबर 2016 को जब उनका शव घर पहुंचा था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की आंखें भर आईं थी। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले पर हरियाणा पुलिस में बतौर मुख्य सिपाही के पद पर तैनात प्रेरणा ने खुल कर चर्चा की और कहा कि उन्हें इस खबर ने पूरी तरह से झकझोर दिया है।
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करीब नौ साल पहले पति मनदीप की शहादत फिर एकाएक सामने आ गई। करनाल की जिस महिला ने अपने सैन्य अधिकारी पति को शादी के कुछ ही दिनों बाद खो दिया है, वह उनका दर्द महसूस कर सकती है। यह ऐसा दर्द है जिसका कोई अंत नहीं। वही नहीं जिनकी भी जान इस वारदात में गई हैं, उनके परिवारों के जख्म जिंदगी भर नहीं भरे जा सकते।
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प्रेरणा कहती हैं कि पति खोने के बाद उन्हें जो जख्म मिला है, उससे वह इस कदर आहत हैं कि ऐसी खबर देखने व सुनने तक की हिम्मत नहीं रही है। गत दिवस कश्मीर में हुई वारदात की खबर जैसे ही उन्होंने मोबाइल पर देखी तो वह सन्न रह गई। वह समझ नहीं पा रही है कि आखिर हमारे जवान व नागरिक कब तक आतंकियों को निशाना बनाते रहेंगे। इसके लिए सरकार को राजनीति से दूर हटते हुए बड़ा और सख्त कदम उठाना ही पड़ेगा। आज भारत का पूरी दुनिया में दबदबा है इसके बावजूद इस तरह की वारदातें बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। सत्तासीन ही नहीं हर राजनीतिक दल को इसमें एकजुटता दिखानी होगी।
ऐसी वारदात से सहम जाता है हर परिवार : शर्मा
सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार आरपी शर्मा का कहना है कि जब आतंकी ऐसी वारदात को अंजाम दे देते हैं तो न केवल संबंधित परिवार व देश की बड़ी हानि होती है। हर कोई सहम जाता है। रह-रहकर आतंकी इस तरह की वारदात को अंजाम देते आए हैं, जिन पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाए जाने की जरूरत है। उनका कहना था कि ऐसे हम कब तक अपने जवान व नागरिकों को खोते रहेंगे। पहलगाम की वारदात से पूरा देश सन्न है।