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Kurukshetra News: सीपीआर प्रशिक्षण से लैस हुए शिक्षक और विद्यार्थी, आपात स्थिति में जीवन बचाने की सीखी तकनीक
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कुरुक्षेत्र। पिपली स्थित पूजा मॉडर्न पब्लिक स्कूल में सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। यह कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए था। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में किसी व्यक्ति की जान बचाने के लिए सीपीआर के महत्व को समझाना था।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने डमी मॉडल पर सीपीआर की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया। उन्होंने जीवनरक्षक तकनीक की विस्तृत जानकारी दी। राकेश भारद्वाज, संजय शर्मा, तनुज अग्रवाल और प्रदीप सिंगला ने प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती कुछ मिनट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर सही सीपीआर से मरीज की जान बचाई जा सकती है। चिकित्सकों ने कहा कि यह प्रशिक्षण आम लोगों के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने बेहोश व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांस जांचने के बाद चिकित्सा सहायता के लिए तुरंत संपर्क करने को कहा। प्रशिक्षित होने पर तुरंत सीपीआर शुरू करने की सलाह दी।
व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में छाती पर कंप्रेशन और रेस्क्यू ब्रीद देने की सही तकनीक का प्रदर्शन हुआ। अध्यक्ष विकासदीप सिंह संधू और प्राचार्य शशी पंवार ने कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण समय की जरूरत है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को जरूरत पड़ने पर किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों ने डमी मॉडल पर सीपीआर की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया। उन्होंने जीवनरक्षक तकनीक की विस्तृत जानकारी दी। राकेश भारद्वाज, संजय शर्मा, तनुज अग्रवाल और प्रदीप सिंगला ने प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती कुछ मिनट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर सही सीपीआर से मरीज की जान बचाई जा सकती है। चिकित्सकों ने कहा कि यह प्रशिक्षण आम लोगों के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने बेहोश व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांस जांचने के बाद चिकित्सा सहायता के लिए तुरंत संपर्क करने को कहा। प्रशिक्षित होने पर तुरंत सीपीआर शुरू करने की सलाह दी।
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व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में छाती पर कंप्रेशन और रेस्क्यू ब्रीद देने की सही तकनीक का प्रदर्शन हुआ। अध्यक्ष विकासदीप सिंह संधू और प्राचार्य शशी पंवार ने कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण समय की जरूरत है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को जरूरत पड़ने पर किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं।
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