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Kurukshetra News: आधे घंटे में उजड़ गई सुनीता और सुखबीर की दुनिया
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कुरुक्षेत्र। आधे घंटे के अंदर इंदबड़ी के सुखबीर और सुनीता की पूरी दुनिया उजड़ गई। पिछले सप्ताह 27 जुलाई को ही सुखबीर ने अपनी बेटी तमन्ना का 11वां जन्मदिन मनाया था। बेटी के साथ-साथ बड़े बेटे सूरज 13 और अभिषेक सात का भी तिलक किया था। तीनों बच्चे लोहार माजरा के स्कूल में एक साथ पढ़ने जाते थे, मगर परिवार पर मंगलवार-बुधवार की रात भारी पड़ गई। संदिग्ध परिस्थितियों में तमन्ना और अभिषेक की मौत हो गई। इस घटना ने परिवार को ही नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया।
मंगलवार-बुधवार रात करीब ढाई बजे तमन्ना की मौत हो गई, जिसके आधे घंटे के बाद अभिषेक की जान चली गई। परिवार के साथ-साथ चिकित्सक भी दाेनों बच्चों की मौत से परेशान है। आखिर बच्चाें की मौत का कारण क्या है? मगर सुखबीर और सुनीता तो रो-रोकर सिर्फ यही पुकार रहे हैं कि उनकी मौत का कारण जो भी रहे अब उनके बच्चे तो वापस आने वाले नहीं है। उधर, मासूम सूरज को कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उसके भाई-बहन को क्या हो गया। वे कहां चले गए हैं।
वहीं गमगीन माहौल में बुधवार दोपहर दोनों बच्चों को अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम संस्कार में आसपास के गांव के लोग भी शामिल हुए। सभी लोग सुखबीर को हौसला दे रहे थे। किसी तरह सुखबीर ने तो अपने आप को रोक रखा था, मगर बच्चों की मां सुनीता बार-बार बेसुध हो रही थी। वो रोते-रोते अपने बच्चों को पुकार रही थी।
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सूरज ने किया अंतिम संस्कार
मासूम सूरज ने अपने भाई और बहन का अंतिम संस्कार किया। उसके पिता ने उसके साथ लगकर दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया। इसे देखकर वहां हर किसी की आंखें नम हो गईं। दोनों बच्चों का अलग-अलग संस्कार किया गया।
मंगलवार-बुधवार रात करीब ढाई बजे तमन्ना की मौत हो गई, जिसके आधे घंटे के बाद अभिषेक की जान चली गई। परिवार के साथ-साथ चिकित्सक भी दाेनों बच्चों की मौत से परेशान है। आखिर बच्चाें की मौत का कारण क्या है? मगर सुखबीर और सुनीता तो रो-रोकर सिर्फ यही पुकार रहे हैं कि उनकी मौत का कारण जो भी रहे अब उनके बच्चे तो वापस आने वाले नहीं है। उधर, मासूम सूरज को कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उसके भाई-बहन को क्या हो गया। वे कहां चले गए हैं।
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वहीं गमगीन माहौल में बुधवार दोपहर दोनों बच्चों को अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम संस्कार में आसपास के गांव के लोग भी शामिल हुए। सभी लोग सुखबीर को हौसला दे रहे थे। किसी तरह सुखबीर ने तो अपने आप को रोक रखा था, मगर बच्चों की मां सुनीता बार-बार बेसुध हो रही थी। वो रोते-रोते अपने बच्चों को पुकार रही थी।
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सूरज ने किया अंतिम संस्कार
मासूम सूरज ने अपने भाई और बहन का अंतिम संस्कार किया। उसके पिता ने उसके साथ लगकर दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया। इसे देखकर वहां हर किसी की आंखें नम हो गईं। दोनों बच्चों का अलग-अलग संस्कार किया गया।